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11 गांवों में अघोषित कटों से लोगों में गुस्से का ‘करंट’
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:19 AM IST
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अंधड़ से बिजली सप्लाई ठप
- फोटो : अमर उजाला
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सिटी विधानसभा क्षेत्र 11 गांवों में पिछले कई दिनों से बिजली व पानी किल्लत को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। यहां ग्रामीण इतने ज्यादा परेशान हो चुके हैं, अब उनका सब्र टूटने वाला है। गांवों के जनप्रतिनिधियों से लेकर आम ग्रामीणों व कृषकों तक में खासा आक्रोश है कि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली निगम ने गांवों की समस्या पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो उन्हें मजबूरन आंदोलन को रास्ता अपनाना पड़ेगा।
इसी बात से खफा ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने सीएम मनोहर लाल को पत्र लिखा है, जबकि उसकी एक प्रति स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, बिजली महकमे के एसई व एक्सईएन को भी दी है। इन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसी वजह से ग्रामीण बहुत ही ज्यादा परेशान हैं और लोगों में काफी आक्रोश भी है।
इन गांवों में लग रहे हैं अघोषित बिजली कट
सिटी के इन 11 गांवों उगाड़ा, बाड़ा, ठरवा, माजरी, धुराली, बाबाहेड़ी, कोटकछुआ, लखनौर साहब, ललाना व बिचपड़ी आदि गांवों में भयंकर बिजली किल्लत बनी हुई है। इलाकावासी व समाजसेवी ग्रामीण मस्तान सिंह, जसविंद्र सिंह, कुलवंत सिंह उगाड़ा, करनैल सिंह, अच्छर सिंह, जगमीत सिंह, सतबीर सिंह, राजेंद्र सिंह, भाग सिंह, कृष्णलाल, गुरचरण, बलबीर सिंह, ओमनारायण, साधु राम, नीरज कुमार, सूरज भान, रिटायर्ड मेजर आरएस रंधावा इत्यादि ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांवों के लोग इस समस्या से पिछले पंद्रह दिनों से परेशान है और लगातार बिजली घरों और बिजली अफसरों के कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं।
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हर बार वहां से उन्हे झूठा आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। थोड़ी देर के लिए बिजली आ जाती है, लेकिन बाद में वही हालात पैदा हो जाते हैं। इन ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे लाइट आती है और दोपहर 3 बजे गुल हो जाती है। इसी तरह सुबह 5 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक भी बिजली कट का यही हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली महकमा उनके साथ ऐसा करके भद्दा मजाक कर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी वजह से उनके घरेलू कार्यों की वजह से कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि इन दिनों धान बिजाई और सिंचाई दोनों का काम चल रहा है। लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उस तरह बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। इसीलिए अफसरों की अनदेखी से हारकर उन्होंने अब सीएम को शिकायत भेजी है।
बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी बढ़ी
इन गांवों में न दिन में चैन है और न रात में। ऐसे में जवान और कामकाजी लोग अपने कार्यालयों, स्कूलों व कॉलेजों में चले जाते हैं। महिलाएं भी जैसे-तैसे गर्मी को सहन कर रही हैं। लेकिन बुजुर्ग और नवजात बच्चे इस गर्मी व उसम से बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। कुलवंत व अच्छर सिंह उगाड़ा बताते हैं कि बुजुर्ग चौपालों व बैठकों में गर्मी व उमस में बैठे पसीने से तर-बत्तर रहते हैं, लेकिन बीमार व हार्ट पेशेंट बुजुर्गों की हालत तो ज्यादा खराब रहती है। बिजली न होने से उनकी बैचेनी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी तरह नवजात बच्चों का हाल है, वे भी अत्यधिक गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
गहराया जल संकट, भटक रहे ग्रामीण
इसी बिजली के अघोषित कटों की वजह से इन गांवों में जल संकट भी गहराया हुआ है। ग्रामीणों की न तो मोटरें चल रही हैं और न ही ट्यूबवेल। जिस वजह से गांवों में पेयजल संकट बहुत ज्यादा हो गया है। गांवों में लोगों की छतों पर रखी टंकियां खाली हैं, इतनी देर भी बिजली नहीं आती कि टंकियां भर जाए। लिहाजा लोग पानी के लिए अपने घरों में लगे हैंडपंपों के खारे पानी पर आश्रित है, जबकि बहुत से लोग मंदिरों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों से पानी भरकर ला रहे हैं और खारा पानी पीने का मजबूर है। ग्रामीणों ने सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि वे इस समस्या का समाधान करवाएं, अन्यथा उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा।
वर्जन
ग्रामीणों की शिकायत उनके महकमे को मिल गई थी। माजरी फीडर पर कुछ फाल्ट थे, उन्हें दूर कर दिया गया है, सभी गांवों में बिजली को भी पूरी तरह से सुचारू बनाया जा रहा है। गांवों में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं रहने देंगे। सभी गांवों में पर्याप्त बिजली सप्लाई देने के लिए बिजली निगम पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
- अमोलक सिंह, एक्सईएन, बिजली निगम।
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इसी बात से खफा ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने सीएम मनोहर लाल को पत्र लिखा है, जबकि उसकी एक प्रति स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, बिजली महकमे के एसई व एक्सईएन को भी दी है। इन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसी वजह से ग्रामीण बहुत ही ज्यादा परेशान हैं और लोगों में काफी आक्रोश भी है।
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इन गांवों में लग रहे हैं अघोषित बिजली कट
सिटी के इन 11 गांवों उगाड़ा, बाड़ा, ठरवा, माजरी, धुराली, बाबाहेड़ी, कोटकछुआ, लखनौर साहब, ललाना व बिचपड़ी आदि गांवों में भयंकर बिजली किल्लत बनी हुई है। इलाकावासी व समाजसेवी ग्रामीण मस्तान सिंह, जसविंद्र सिंह, कुलवंत सिंह उगाड़ा, करनैल सिंह, अच्छर सिंह, जगमीत सिंह, सतबीर सिंह, राजेंद्र सिंह, भाग सिंह, कृष्णलाल, गुरचरण, बलबीर सिंह, ओमनारायण, साधु राम, नीरज कुमार, सूरज भान, रिटायर्ड मेजर आरएस रंधावा इत्यादि ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांवों के लोग इस समस्या से पिछले पंद्रह दिनों से परेशान है और लगातार बिजली घरों और बिजली अफसरों के कार्यालयों के धक्के खा रहे हैं।
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हर बार वहां से उन्हे झूठा आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। थोड़ी देर के लिए बिजली आ जाती है, लेकिन बाद में वही हालात पैदा हो जाते हैं। इन ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे लाइट आती है और दोपहर 3 बजे गुल हो जाती है। इसी तरह सुबह 5 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक भी बिजली कट का यही हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली महकमा उनके साथ ऐसा करके भद्दा मजाक कर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इसी वजह से उनके घरेलू कार्यों की वजह से कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि इन दिनों धान बिजाई और सिंचाई दोनों का काम चल रहा है। लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उस तरह बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। इसीलिए अफसरों की अनदेखी से हारकर उन्होंने अब सीएम को शिकायत भेजी है।
बुजुर्गों और बच्चों की परेशानी बढ़ी
इन गांवों में न दिन में चैन है और न रात में। ऐसे में जवान और कामकाजी लोग अपने कार्यालयों, स्कूलों व कॉलेजों में चले जाते हैं। महिलाएं भी जैसे-तैसे गर्मी को सहन कर रही हैं। लेकिन बुजुर्ग और नवजात बच्चे इस गर्मी व उसम से बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। कुलवंत व अच्छर सिंह उगाड़ा बताते हैं कि बुजुर्ग चौपालों व बैठकों में गर्मी व उमस में बैठे पसीने से तर-बत्तर रहते हैं, लेकिन बीमार व हार्ट पेशेंट बुजुर्गों की हालत तो ज्यादा खराब रहती है। बिजली न होने से उनकी बैचेनी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी तरह नवजात बच्चों का हाल है, वे भी अत्यधिक गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
गहराया जल संकट, भटक रहे ग्रामीण
इसी बिजली के अघोषित कटों की वजह से इन गांवों में जल संकट भी गहराया हुआ है। ग्रामीणों की न तो मोटरें चल रही हैं और न ही ट्यूबवेल। जिस वजह से गांवों में पेयजल संकट बहुत ज्यादा हो गया है। गांवों में लोगों की छतों पर रखी टंकियां खाली हैं, इतनी देर भी बिजली नहीं आती कि टंकियां भर जाए। लिहाजा लोग पानी के लिए अपने घरों में लगे हैंडपंपों के खारे पानी पर आश्रित है, जबकि बहुत से लोग मंदिरों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगे हैंडपंपों से पानी भरकर ला रहे हैं और खारा पानी पीने का मजबूर है। ग्रामीणों ने सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि वे इस समस्या का समाधान करवाएं, अन्यथा उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा।
वर्जन
ग्रामीणों की शिकायत उनके महकमे को मिल गई थी। माजरी फीडर पर कुछ फाल्ट थे, उन्हें दूर कर दिया गया है, सभी गांवों में बिजली को भी पूरी तरह से सुचारू बनाया जा रहा है। गांवों में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं रहने देंगे। सभी गांवों में पर्याप्त बिजली सप्लाई देने के लिए बिजली निगम पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
- अमोलक सिंह, एक्सईएन, बिजली निगम।