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भक्ति, वैराग्य, मुक्ति के लिए भागवत कथा सुननी चाहिए : शास्त्री
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अंबाला। श्रीधाम वृंदावन से आए कथा वाचक अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि भगवान इस धरती पर बार-बार इसलिए आते हैं ताकि हम कलियुग में उनकी अनूठी कथाओं का आनंद ले सकें और उन कथाओं के माध्यम से अपने मन को शुद्ध व पवित्र कर सकें। उन्होंने कहा कि वेद व्यास महाराज ने श्रीमद भगवद्गीता में लिखा है कि जिनके करोड़ों जन्मों के पुण्य एकत्रित हो जाते हैं, वही व्यक्ति भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त करता है। यह भागवत कल्पवृक्ष है आप जिस भी मनोरथ के साथ भागवत कथा श्रवण करेंगे आपके उसी मनोरथ की सिद्धि होगी।
वह नागरिक सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्तों को प्रवचन दे रहे थे। इस दौरान यजमान दीप चंद गुप्ता व उनकी धर्म पत्नी आशा गुप्ता ने कथा में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। भागवत कथा समारोह के पहले दिन व्यास पीठ से कथावाचक अतुल कृष्ण शास्त्री ने पंडित नीरज तिवारी के सानिध्य में विधि विधान के साथ वेदी पूजन किया। कथावाचक के मुखारविंद से भागवत महात्म्य की कथा, धुंधकारी की कथा और कथा सुनने के नियमों के वर्णन से संपूर्ण वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
कथा वाचन करते हुए शास्त्री जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है। मनुष्य इस संसार में केवल अपना कर्म लेकर जाता है, इसलिए अच्छे कर्म करो, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भागवत कथा सुनें, केवल सुनना ही नहीं चाहिए अपितु अपने जीवन में उसका आचरण भी करना चाहिए। अत: कलियुग में सबसे सरल उपाय भगवान नाम का जप स्मरण करना है। व्यक्ति को सभी सांसारिक दुखों व कठिनाइयों से छुटकारा मिल जाता है। भागवत कथा सभी सभी सुखों की प्राप्ति का सरल मार्ग है। प्रत्येक मानव को समय निकालकर पूजा, कथा श्रवण, सत्संग, प्रवचन अवश्य करना चाहिए। तभी मानव जीवन सफल है।
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वह नागरिक सदन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्तों को प्रवचन दे रहे थे। इस दौरान यजमान दीप चंद गुप्ता व उनकी धर्म पत्नी आशा गुप्ता ने कथा में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। भागवत कथा समारोह के पहले दिन व्यास पीठ से कथावाचक अतुल कृष्ण शास्त्री ने पंडित नीरज तिवारी के सानिध्य में विधि विधान के साथ वेदी पूजन किया। कथावाचक के मुखारविंद से भागवत महात्म्य की कथा, धुंधकारी की कथा और कथा सुनने के नियमों के वर्णन से संपूर्ण वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।
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कथा वाचन करते हुए शास्त्री जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है। मनुष्य इस संसार में केवल अपना कर्म लेकर जाता है, इसलिए अच्छे कर्म करो, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भागवत कथा सुनें, केवल सुनना ही नहीं चाहिए अपितु अपने जीवन में उसका आचरण भी करना चाहिए। अत: कलियुग में सबसे सरल उपाय भगवान नाम का जप स्मरण करना है। व्यक्ति को सभी सांसारिक दुखों व कठिनाइयों से छुटकारा मिल जाता है। भागवत कथा सभी सभी सुखों की प्राप्ति का सरल मार्ग है। प्रत्येक मानव को समय निकालकर पूजा, कथा श्रवण, सत्संग, प्रवचन अवश्य करना चाहिए। तभी मानव जीवन सफल है।
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