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Ambala News: ईनामी दंगल तक ही सीमित रह गए अंबाला के पहलवान
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रूपचंद उर्फ खलीफा पहलवान
अंबाला। अखाड़ों में मिट्टी पर कुश्ती लड़ने वाले पहलवानों का अपना अलग ही दबदबा था। इन पहलवानों को किसी न किसी कारण से आगे जाने का मौका नहीं मिला और यह पहलवान ईनामी दंगल तक सीमित होकर रह गए।
अपने आप को न बदलने के कारण यह पहलवान देश विदेश में अपना नाम नहीं बना पाए। समय बदला रहा। कुश्ती अखाड़ों से निकलकर मैट पर पहुंच गई। नहीं बदले अखाड़ों के पहलान। रूपचंद उर्फ खलीफा पहलवान बताते हैं कि जब वह पहलवानी करते थे तो उन्हें कोई बताने वाला ही नहीं था कि उन्हें पहलवानी में आगे जाने के लिए क्या करना है। कहां जाना है, घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं था।
रूपचंद उर्फ खलीफा पहलवान ने बताया कि उनकी उम्र 77 साल है और उनका जन्म 15 अगस्त 1947 को छावनी की ग्वाल मंडी में हुआ था, 12 साल की उम्र से ही उन्होंने उस्ताद जुगल किशोर के पास अखाड़े में कुश्ती के दांवपेच सीखने शुरू कर दिए थे, 1965 में वह कुश्ती के दांवपेच सीख गए और उन्होंने अंबाला के नामचीन पहलवान राधेश्याम, फकीरचंद, मुंशी चौधरी, नानक लक्कड़ पहलवान, खोखर पहलवान, मुन्ना पहलवान और पवन कुमार यादव को हराया। खलीफा पहलवान ने बताया कि उनकी नामी पहलवान ओमी से चार बार कुश्ती हुई थी चोरों ही कुश्ती में दोनों बराबर रहे, लेकिन पांचवीं बार हुई कुश्ती में उन्होंने ओमी पहलवान को हरा दिया।
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1966 में मेरठ से अंबाला छावनी आए पहलवान हनीफ ने कई नामी पहलवानों को हरा दिया। इसके बाद उसने कई पहलवानों को चुनौती दी। इसके बाद कोई भी पहलवान आगे नहीं आया लेकिन उन्होंने हनीफ पहलवान की चुनौती को स्वीकार किया और मात्र तीन मिनट में ही हनीफ को हरा दिया। इसी तरह से दिल्ली से सुरेश पहलवान, कैथल से हरि सिंह पहलवान और अन्य राज्यों ने पहलवान अंबाला में कुश्ती करने आए। लेकिन उन्होंने उन पहलवानों को जीतकर जाने नहीं दिया। इसमें कई कुश्ती दोनों पहलवानों के बीच बराबर रही।
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अपने आप को न बदलने के कारण यह पहलवान देश विदेश में अपना नाम नहीं बना पाए। समय बदला रहा। कुश्ती अखाड़ों से निकलकर मैट पर पहुंच गई। नहीं बदले अखाड़ों के पहलान। रूपचंद उर्फ खलीफा पहलवान बताते हैं कि जब वह पहलवानी करते थे तो उन्हें कोई बताने वाला ही नहीं था कि उन्हें पहलवानी में आगे जाने के लिए क्या करना है। कहां जाना है, घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं था।
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रूपचंद उर्फ खलीफा पहलवान ने बताया कि उनकी उम्र 77 साल है और उनका जन्म 15 अगस्त 1947 को छावनी की ग्वाल मंडी में हुआ था, 12 साल की उम्र से ही उन्होंने उस्ताद जुगल किशोर के पास अखाड़े में कुश्ती के दांवपेच सीखने शुरू कर दिए थे, 1965 में वह कुश्ती के दांवपेच सीख गए और उन्होंने अंबाला के नामचीन पहलवान राधेश्याम, फकीरचंद, मुंशी चौधरी, नानक लक्कड़ पहलवान, खोखर पहलवान, मुन्ना पहलवान और पवन कुमार यादव को हराया। खलीफा पहलवान ने बताया कि उनकी नामी पहलवान ओमी से चार बार कुश्ती हुई थी चोरों ही कुश्ती में दोनों बराबर रहे, लेकिन पांचवीं बार हुई कुश्ती में उन्होंने ओमी पहलवान को हरा दिया।
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1966 में मेरठ से अंबाला छावनी आए पहलवान हनीफ ने कई नामी पहलवानों को हरा दिया। इसके बाद उसने कई पहलवानों को चुनौती दी। इसके बाद कोई भी पहलवान आगे नहीं आया लेकिन उन्होंने हनीफ पहलवान की चुनौती को स्वीकार किया और मात्र तीन मिनट में ही हनीफ को हरा दिया। इसी तरह से दिल्ली से सुरेश पहलवान, कैथल से हरि सिंह पहलवान और अन्य राज्यों ने पहलवान अंबाला में कुश्ती करने आए। लेकिन उन्होंने उन पहलवानों को जीतकर जाने नहीं दिया। इसमें कई कुश्ती दोनों पहलवानों के बीच बराबर रही।