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शहादत पर याद आया अंबाला का वीर सपूत गरुढ़ कमांडो गुरसेवक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 12:38 AM IST
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Ambala's heroic son Garuda commandos guruseval on martyrdom
शहीद गुरसेवक की प्रतिमा। - फोटो : Ambala
पठानकोट एयरबेस हमले में शहीद हुए अंबाला के वीर सपूत गुरसेवक को उसकी शहादत पर बेशक जिला प्रशासन याद करना भूल गया, लेकिन शहीद की यूनिट से आए उसके दोस्तों ने गुरसेवक को शहादत के बाद भी नहीं भुलाया। 2 जनवरी को उसकी यूनिट से तीन दोस्त आए। स्मारक पर धूप जलाई और एक घंटा बैठकर चले गए। दो जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले में अंबाला के गांव गरनाला के रहने वाले 26 वर्षीय गुरसेवक शहीद हो गए थे। गरुसेवक गरुड़ कमांडो बल के पहले शहीद थे। 4 जनवरी को उनका पार्थिव शरीर अंबाला पहुंचा था।
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गुरसेवक के पिता सुच्चा सिंह और मां अमरीक कौर ने अमर उजाला संवाददाता को बताया कि हमें न तो अब सरकार से कोई आस है न ही सेना से, क्योंकि हमारा लाल, जिगर का टुकड़ा तो हमेशा के लिए हमसे दूर जा चुका है। बहू जसप्रीत का कुछ समय सहारा था लेकिन वह भी बाद में अपने मायके जा चुकी है। पौती गुरकीरत भी अब तो चलने-फिरने लगी होगी, लेकिन अब तो उसे भी देखे हुए लंबा समय बीत गया है। हमारे पास तो बस बची हैं तो सिर्फ और सिर्फ बेटे की यादें। अब तो बुढ़ापे का वही सहारा हैं। यह कहते -कहते दोनों बुजुुर्गों की आंखें नम हो गईं और इसके बाद वह रुंधे गले से भी कुछ न बोल पाए। बता दें कि सुच्चा सिंह भी सेना में सिपाही रहे थे, लेकिन किन्हीं कारणों ने उन्होंने नौकरी बीच में ही छोड़ दी थी। बड़ा बेटा हरदीप सिंह भी सेना में ही है, जबकि गुरसेवक एयरफोर्स में भर्ती हुआ था।
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गांव के ही सरकारी स्कूल से की थी 10वीं की पढ़ाई
उसने दसवीं कक्षा तक गांव के ही गवर्नमेंट सीनियर स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद बारहवीं कक्षा में अंबाला शहर एसए जैन स्कूल में दाखिला लिया। बारहवीं पास करने के बाद शहर के ही डीएवी कॉलेज में ग्रेजुएशन में दाखिला लेकर डिग्री हासिल की। उन्होंने बताया कि उसे बचपन से केवल कबड्डी जैसे खेलों में दिलचस्पी थी। जिसके कारण उसमें काफी फुर्ती थी और शारीरिक दक्षता में वह काफी निपुण था। उसका बचपन से ही सपना था कि वह सेना में जाकर ही देश सेवा करेगा। यही कारण था कि पढ़ाई के साथ-साथ वह सेना की कोई भी भर्ती का फार्म निकलता तो उसे भरने में देर नहीं करता था। सेना में जाने के लिए उसने ग्राउंड स्तर पर भी काफी मेहनत की और उसकी मेहनत तब रंग लाई जब उसका चयन एयरफोर्स के लिए हो गया। करीब साढ़े चार साल तक एयरफोर्स में ही देश सेवा करने के साथ ही वहां भी मेहनत रंग लाई और विभाग ने प्रमोशन का तोहफा दिया था। बता दें शहादत से एक माह पहले ही गुरसेवक की शादी गांव कुराली जोकि रोपड़ पंजाब में है कि जसप्रीत कौर से हुआ था।
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स्कूल में बनाया मेमोरियल हाल, लाइब्रेरी
गांव के ही स्कूल में शहीद गुरसेवक का मेमोरियल बनाया गया है। इसमें शहीद गुरसेवक से जुड़ी यादें हैं। इसके अलावा गुरसेवक का स्मारक भी यहां बनाया गया है। विधायक असीम गोयल ने शहीद की याद में भव्य स्कूल गेट भी बनाया है जिस पर शहीद गुरसेवक लिखा गया है। इसी स्कूल को बाद में सरकार ने अपग्रेड करके 12वीं तक कर दिया था। सुच्चा सिंह बताते हैं कि हमें बस खुशी इस बात है कि हमारे बेटे ने देश के लिए अपने प्राण त्यागे और आज गांव के स्कूल में पढ़ने वाला हर बच्चा उसके बारे में जानता है।
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