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कोरोना के बीच ब्लैक फंगस बना फांस, तीन मरीज मिले, एक संदिग्ध
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अंबाला। कोरोना की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस यानी म्यूकर मायकोसिस स्वास्थ्य विभाग के लिए नई फांस बन गया है। अभी कोरोना से संक्रमण व मौत के आंकड़े पर अंकुश भी नहीं लग पा रहा था कि इसी बीच ब्लैक फंगस ने दस्तक दे दी। महज तीन दिन में दो व्यक्तियों सहित एक महिला इसकी चपेट में आ गई। ये अंबाला के शहजादपुर, छावनी के नग्गल व मुलाना के रहने वाले हैं। इनके अलावा एक अन्य संदिग्ध मरीज भी मिला है। जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी कि यह ब्लैक फंगस का है या नहीं।
इनमें नग्गल निवासी 38 वर्षीय युवक रणधीर तो समय पर ऑपरेशन के बाद दुरुस्त हो गया लेकिन शहजादपुर के मरीज की पीजीआई में एक आंख निकालनी पड़ी। इसी प्रकार मुलाना एमएम अस्पताल में 54 वर्षीय महिला की एक आंख निकालकर उसकी जान बचाई गई। इसके अलावा कच्चा बाजार निवासी महिला को भी अपनी एक आंख की रोशनी गंवानी पड़ी। अभी वह पीजीआई में उपचाराधीन है। वह भी ब्लैक फंगस की संदिग्ध मरीज बताई जा रही है। उधर, बेकाबू हो रहे ब्लैक फंगस को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर हो गया है। डॉक्टरों ने भी अपील है कि ब्लैक फंगस के लक्षण सामने आने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लें।
मुलाना एमएम अस्पताल बना ब्लैक फंगस का केयर सेंटर
ब्लैक फंगस के तीन मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमेटी गठित करने के साथ-साथ जिलेभर के प्राइवेट अस्पतालों को भी नोटिस जारी कर ऐसे मामले की जानकारी देने के लिए बोला गया है। मुलाना के एमएम मेडिकल अस्पताल को कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस के लिए भी चयनित किया गया है। जहां मरीजों को उपचार के साथ-साथ उनकी देखभाल भी की जाएगी।
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पीजीआई रोहतक के डॉक्टरों ने दिए दिशा निर्देेश
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुधा ने बताया कि कुछ ही दिनों में अचानक मामले सामने आए है। पीजीआई रोहतक के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी दिशा निर्देश देते हुए ब्लैक फंगस के मामले में बरती जाने वाली सावधानियां बारे अवगत करवाया है। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी डॉक्टर मौजूद थे।
किसे हो सकता है ब्लैक फंगस
- कोविड के दौरान स्टेरॉयड दी गई हो। डेक्सामिथाजोन, मिथाइल प्रेडनीसोलोन इत्यादि ले रहा हो।
- कोविड मरीज को ऑक्सीजन पर रखना पड़ा हो या फिर आईसीयू में रखा हो
- शुगर पर नियंत्रण न हो
- कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट इत्यादि के लिए दवा चल रही हो
इस तरह बरतनी चाहिए एहतियात
- धूल भरी जगह पर जाने से बचें।
- हमेशा मास्क लगाएं।
- खेतों या बागवानी में मिट्टी या खाद का काम करते समय शरीर को जूते, ग्लब्स से पूरी तरह ढककर रखें।
- स्क्रब बाथ के जरिए सफाई पर पूरा ध्यान दें।
ब्लैक फंगस के लक्षण
- चेहरे पर एक तरफ दर्द होना या सूजन व सुन्न होना।
- नाक जाम होना, नाक से काला या लाल स्राव होना।
- सीने में दर्द और सांस में परेशानी।
- दांत या जबड़े में दर्द, दांत टूटना।
- गाल की हड्डी में दर्द होना
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना
- उल्टी या खांसने पर बलगम में खून आना
ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए
- कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल या फिर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं
- नाक, कान, गले, नाक, मेडिसिन, छाती या प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ से संपर्क किया जा सकता है।
कोविड-19 संक्रमित इस तरह बरते एहतियात
- कोरोना से ठीक हुए लोग ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें।
- खून में शुगर ज्यादा नहीं होने दें तथा हाइपरग्लाइसेमिया से बचें।
- एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श से ही करें।
- बिना किसी डॉक्टर की परामर्श के स्टेरॉयड का इस्तेमाल किसी भी हाल में न करें।
- स्टेरॉयड का इस्तेमाल विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ ही मरीजों को 5 से अधिकतम 10 दिन के लिए करते हैं।
- लक्षण के पहले 5 से 7 दिनों में स्टेरॉयड देने के दुष्परिणाम होते हैं। शुरू में स्टेरॉयड लेने से बीमारी बढ़ जाती है। उपचार शुरू करवाने से पहले डॉक्टर से पूछे इन दवाओं में स्टेरॉयड तो नहीं है और अगर है तो यह दवा क्यूं दी जा रही है।
ऑक्सीजन लगाने से पहले इसका रखे खास ध्यान
जिला सिविल सर्जन डॉक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन मास्क की नोजल को समय-समय बदल लेना चाहिए। साथ ही चेहरे पर लगने वाले मास्क या फिर ऑक्सीजन मास्क को भी समय-समय पर बदल लेना चाहिए ताकि फंगस न फैल सके। आसपास की चीजों को अच्छी तरह से सैनिटाइज करना चाहिए।
अंबाला में पहला मरीज पकड़ने वाले नेत्र विशेषज्ञ की राय
अंबाला शहर लीलावती अस्पताल के डॉक्टर व नेत्र विशेषज्ञ रजत माथुर ने बताया कि यह फंगस नार्मल फंगस होता है। यह धूल, मिट्टी, गंदगी, खाद, टूटी लकड़ियां, पुराने फर्नीचर इन सब में मौजूद होता है। यह मौका मिलते ही ह्यूमन बॉडी पर अटैक करता है। कोरोना की वजह से बॉडी का शुगर लेवल, आयरन लोड बढ़ने व कीटाणुओं से लड़ने की शक्ति कम होने के कारण यह फंगस नाक के रास्ते साइनस में प्रवेश कर जाता है। हड्डियों को गलाने व खून और हड्डियों के रास्ते आंख में होता हुआ दिमाग में चला जाता है। इसके बाद वह जानलेवा हो जाता है। यह आंख के पीछे की मांसपेशियों पर अटैक कर उसे खत्म कर देता है। लक्षण लगते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जिलेभर में ब्लैक फंगस को लेकर पूरी तैयारी है। एंटीफंगस दवाएं ऐसे मरीजों के लिए अंबाला में पर्याप्त हैं। ब्लैक फंगस को लेकर कोरोना संक्रमित मरीज व संक्रमण को मात देने वाले लोगों के साथ-साथ शुगर के मरीजों पर भी नजर रखी जा रही है। अंबाला में ब्लैक फंगस के फिलहाल दो मामलों की पुष्टि है।
डॉ. कुलदीप, सिविल सर्जन अंबाला
पहला मामला: शहजादपुर निवासी 45 वर्षीय अश्वनी दो दिन पहले ही कोरोना को मात देकर घर लौटा था कि आंख में सूजन आ गई। अंबाला शहर लीलावती अस्पताल में एमआरआई करवाने के लिए ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। पीजीआई में ऑपरेशन कर एक आंख निकाली गई जबकि दूसरी सुरक्षित है। ऑपरेशन से पहले ही अश्वनी दोबारा से कोरोना संक्रमित हो गया।
दूसरा मामला: गांव नग्गल निवास 38 वर्षीय रणधीर भी ब्लैक फंगस का शिकार हो गया था। आंख व नाक पर सूजन आते ही वह अंबाला शहर के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास पहुंचा और फंगस निकालने का सफल ऑपरेशन करवाने के बाद ठीक है। फिलहाल वह चंडीगढ़ के प्राइवेट अस्पताल में उपचाराधीन है।
तीसरा मामला : महिला की एक आंख निकालकर किया फंगस का उपचार चौथा मामला: मुलाना की रहने वाली 54 वर्षीय परविंद्र कौर सोमवार को ब्लैक फंगस का शिकार हो गई। एमएम अस्पताल के डाक्टरों ने पुष्टि करते हुए बताया कि आंख की रोशनी ही चली गई थी। आंख का ऑपरेशन किया गया।
परविंद्र कौर के पुत्र जतिन ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनकी माता को बुखार हुआ था और सामान्य दवाएं लेकर ठीक हो गई थीं लेकिन कुछ दिन बीत जाने के बाद 5-6 मई को उन की आंख में दर्द हुआ। स्थानीय डॉक्टर से दवाई ली लेकिन आराम न होता देख वो बराड़ा स्थित आंखों के सर्जन के पास चेकअप के लिए पहुंचे। एमएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अमित मित्तल ने बताया कि महिला उपचाराधीन है। कुछ दिन वह कोरोना संक्रमित रही थी। ऑपरेशन से आंख निकालकर फंगस निकाला गया।
महिला ने गंवाई एक आंख की रोशनी, पीजीआई रेफर
सोमवार को कच्चा बाजार निवासी 45 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला की अचानक एक आंख की रोशनी चली गई। एक आंख में सूजन आने के बाद जब नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुधा ने जांच की तो आंख की रोशनी जा चुकी थी। अंबाला में एमआरआई न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और उसे छावनी नागरिक अस्पताल से पीजीआई रेफर कर दिया। लेकिन आंख में सूजन, जबड़े में दर्द इसी के लक्षण हैं।
एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के नाम पर काला बाजारी शुरू
ब्लैक फंगस के मामले आने पर बाजारों में एंटीफंगल इंजेक्शन यानी एम्फोटेरिसिन-बी की कमी हो गई है।जिनके पास इंजेक्शन है वो मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सोमवार को मुलाना में सामने आया। महिला मरीज की आंख निकालने से पहले जब बेटा जतिन इंजेक्शन लेने के लिए गया तो 2800 रुपये की कीमत वाला इंजेक्शन उन्हें 6500 रुपये में दिया जा रहा था। फिर उन्हें पता चला कि यह इंजेक्शन सिविल अस्पताल अंबाला से प्राप्त हो जाएगा। वहां उन्हें सुबह से लेकर शाम तक जद्दोजहद के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पांच इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराए।
ब्लैक फंगस को लेकर प्रदेशभर में पुख्ता इंतजाम है। सभी अस्पतालों में संबंधित दवाओं के बंदोबस्त कर लिए गए हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट रोहतक के वरिष्ठ डॉक्टरों के निगरानी में ब्लैक फंगस को लेकर प्रदेशभर के डॉक्टरों, सीएमओ को दिशा-निर्देश दिए गए है।
अनिल विज, स्वास्थ्य एवं गृहमंत्री हरियाणा
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इनमें नग्गल निवासी 38 वर्षीय युवक रणधीर तो समय पर ऑपरेशन के बाद दुरुस्त हो गया लेकिन शहजादपुर के मरीज की पीजीआई में एक आंख निकालनी पड़ी। इसी प्रकार मुलाना एमएम अस्पताल में 54 वर्षीय महिला की एक आंख निकालकर उसकी जान बचाई गई। इसके अलावा कच्चा बाजार निवासी महिला को भी अपनी एक आंख की रोशनी गंवानी पड़ी। अभी वह पीजीआई में उपचाराधीन है। वह भी ब्लैक फंगस की संदिग्ध मरीज बताई जा रही है। उधर, बेकाबू हो रहे ब्लैक फंगस को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर हो गया है। डॉक्टरों ने भी अपील है कि ब्लैक फंगस के लक्षण सामने आने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लें।
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ब्लैक फंगस के तीन मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमेटी गठित करने के साथ-साथ जिलेभर के प्राइवेट अस्पतालों को भी नोटिस जारी कर ऐसे मामले की जानकारी देने के लिए बोला गया है। मुलाना के एमएम मेडिकल अस्पताल को कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस के लिए भी चयनित किया गया है। जहां मरीजों को उपचार के साथ-साथ उनकी देखभाल भी की जाएगी।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुधा ने बताया कि कुछ ही दिनों में अचानक मामले सामने आए है। पीजीआई रोहतक के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जरूरी दिशा निर्देश देते हुए ब्लैक फंगस के मामले में बरती जाने वाली सावधानियां बारे अवगत करवाया है। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी डॉक्टर मौजूद थे।
किसे हो सकता है ब्लैक फंगस
- कोविड के दौरान स्टेरॉयड दी गई हो। डेक्सामिथाजोन, मिथाइल प्रेडनीसोलोन इत्यादि ले रहा हो।
- कोविड मरीज को ऑक्सीजन पर रखना पड़ा हो या फिर आईसीयू में रखा हो
- शुगर पर नियंत्रण न हो
- कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट इत्यादि के लिए दवा चल रही हो
इस तरह बरतनी चाहिए एहतियात
- धूल भरी जगह पर जाने से बचें।
- हमेशा मास्क लगाएं।
- खेतों या बागवानी में मिट्टी या खाद का काम करते समय शरीर को जूते, ग्लब्स से पूरी तरह ढककर रखें।
- स्क्रब बाथ के जरिए सफाई पर पूरा ध्यान दें।
ब्लैक फंगस के लक्षण
- चेहरे पर एक तरफ दर्द होना या सूजन व सुन्न होना।
- नाक जाम होना, नाक से काला या लाल स्राव होना।
- सीने में दर्द और सांस में परेशानी।
- दांत या जबड़े में दर्द, दांत टूटना।
- गाल की हड्डी में दर्द होना
- धुंधला या दोहरा दिखाई देना
- उल्टी या खांसने पर बलगम में खून आना
ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए
- कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल या फिर विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं
- नाक, कान, गले, नाक, मेडिसिन, छाती या प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ से संपर्क किया जा सकता है।
कोविड-19 संक्रमित इस तरह बरते एहतियात
- कोरोना से ठीक हुए लोग ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें।
- खून में शुगर ज्यादा नहीं होने दें तथा हाइपरग्लाइसेमिया से बचें।
- एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर के परामर्श से ही करें।
- बिना किसी डॉक्टर की परामर्श के स्टेरॉयड का इस्तेमाल किसी भी हाल में न करें।
- स्टेरॉयड का इस्तेमाल विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ ही मरीजों को 5 से अधिकतम 10 दिन के लिए करते हैं।
- लक्षण के पहले 5 से 7 दिनों में स्टेरॉयड देने के दुष्परिणाम होते हैं। शुरू में स्टेरॉयड लेने से बीमारी बढ़ जाती है। उपचार शुरू करवाने से पहले डॉक्टर से पूछे इन दवाओं में स्टेरॉयड तो नहीं है और अगर है तो यह दवा क्यूं दी जा रही है।
ऑक्सीजन लगाने से पहले इसका रखे खास ध्यान
जिला सिविल सर्जन डॉक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों को ऑक्सीजन मास्क की नोजल को समय-समय बदल लेना चाहिए। साथ ही चेहरे पर लगने वाले मास्क या फिर ऑक्सीजन मास्क को भी समय-समय पर बदल लेना चाहिए ताकि फंगस न फैल सके। आसपास की चीजों को अच्छी तरह से सैनिटाइज करना चाहिए।
अंबाला में पहला मरीज पकड़ने वाले नेत्र विशेषज्ञ की राय
अंबाला शहर लीलावती अस्पताल के डॉक्टर व नेत्र विशेषज्ञ रजत माथुर ने बताया कि यह फंगस नार्मल फंगस होता है। यह धूल, मिट्टी, गंदगी, खाद, टूटी लकड़ियां, पुराने फर्नीचर इन सब में मौजूद होता है। यह मौका मिलते ही ह्यूमन बॉडी पर अटैक करता है। कोरोना की वजह से बॉडी का शुगर लेवल, आयरन लोड बढ़ने व कीटाणुओं से लड़ने की शक्ति कम होने के कारण यह फंगस नाक के रास्ते साइनस में प्रवेश कर जाता है। हड्डियों को गलाने व खून और हड्डियों के रास्ते आंख में होता हुआ दिमाग में चला जाता है। इसके बाद वह जानलेवा हो जाता है। यह आंख के पीछे की मांसपेशियों पर अटैक कर उसे खत्म कर देता है। लक्षण लगते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जिलेभर में ब्लैक फंगस को लेकर पूरी तैयारी है। एंटीफंगस दवाएं ऐसे मरीजों के लिए अंबाला में पर्याप्त हैं। ब्लैक फंगस को लेकर कोरोना संक्रमित मरीज व संक्रमण को मात देने वाले लोगों के साथ-साथ शुगर के मरीजों पर भी नजर रखी जा रही है। अंबाला में ब्लैक फंगस के फिलहाल दो मामलों की पुष्टि है।
डॉ. कुलदीप, सिविल सर्जन अंबाला
पहला मामला: शहजादपुर निवासी 45 वर्षीय अश्वनी दो दिन पहले ही कोरोना को मात देकर घर लौटा था कि आंख में सूजन आ गई। अंबाला शहर लीलावती अस्पताल में एमआरआई करवाने के लिए ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। पीजीआई में ऑपरेशन कर एक आंख निकाली गई जबकि दूसरी सुरक्षित है। ऑपरेशन से पहले ही अश्वनी दोबारा से कोरोना संक्रमित हो गया।
दूसरा मामला: गांव नग्गल निवास 38 वर्षीय रणधीर भी ब्लैक फंगस का शिकार हो गया था। आंख व नाक पर सूजन आते ही वह अंबाला शहर के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास पहुंचा और फंगस निकालने का सफल ऑपरेशन करवाने के बाद ठीक है। फिलहाल वह चंडीगढ़ के प्राइवेट अस्पताल में उपचाराधीन है।
तीसरा मामला : महिला की एक आंख निकालकर किया फंगस का उपचार चौथा मामला: मुलाना की रहने वाली 54 वर्षीय परविंद्र कौर सोमवार को ब्लैक फंगस का शिकार हो गई। एमएम अस्पताल के डाक्टरों ने पुष्टि करते हुए बताया कि आंख की रोशनी ही चली गई थी। आंख का ऑपरेशन किया गया।
परविंद्र कौर के पुत्र जतिन ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनकी माता को बुखार हुआ था और सामान्य दवाएं लेकर ठीक हो गई थीं लेकिन कुछ दिन बीत जाने के बाद 5-6 मई को उन की आंख में दर्द हुआ। स्थानीय डॉक्टर से दवाई ली लेकिन आराम न होता देख वो बराड़ा स्थित आंखों के सर्जन के पास चेकअप के लिए पहुंचे। एमएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अमित मित्तल ने बताया कि महिला उपचाराधीन है। कुछ दिन वह कोरोना संक्रमित रही थी। ऑपरेशन से आंख निकालकर फंगस निकाला गया।
महिला ने गंवाई एक आंख की रोशनी, पीजीआई रेफर
सोमवार को कच्चा बाजार निवासी 45 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला की अचानक एक आंख की रोशनी चली गई। एक आंख में सूजन आने के बाद जब नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुधा ने जांच की तो आंख की रोशनी जा चुकी थी। अंबाला में एमआरआई न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और उसे छावनी नागरिक अस्पताल से पीजीआई रेफर कर दिया। लेकिन आंख में सूजन, जबड़े में दर्द इसी के लक्षण हैं।
एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के नाम पर काला बाजारी शुरू
ब्लैक फंगस के मामले आने पर बाजारों में एंटीफंगल इंजेक्शन यानी एम्फोटेरिसिन-बी की कमी हो गई है।जिनके पास इंजेक्शन है वो मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सोमवार को मुलाना में सामने आया। महिला मरीज की आंख निकालने से पहले जब बेटा जतिन इंजेक्शन लेने के लिए गया तो 2800 रुपये की कीमत वाला इंजेक्शन उन्हें 6500 रुपये में दिया जा रहा था। फिर उन्हें पता चला कि यह इंजेक्शन सिविल अस्पताल अंबाला से प्राप्त हो जाएगा। वहां उन्हें सुबह से लेकर शाम तक जद्दोजहद के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पांच इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराए।
ब्लैक फंगस को लेकर प्रदेशभर में पुख्ता इंतजाम है। सभी अस्पतालों में संबंधित दवाओं के बंदोबस्त कर लिए गए हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट रोहतक के वरिष्ठ डॉक्टरों के निगरानी में ब्लैक फंगस को लेकर प्रदेशभर के डॉक्टरों, सीएमओ को दिशा-निर्देश दिए गए है।
अनिल विज, स्वास्थ्य एवं गृहमंत्री हरियाणा