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Ambala News: लोकेशन के लिए वायु सेना की मशक्कत, नारायणगढ़ थाने में किया था संपर्क
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एयरफोर्स स्टेशन से उड़ान भरता हुआ जगुआर: आर्काइव
अंबाला। अंबाला एयरबेस से उड़े भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान के गिरने पर लगातार एयरबेस से संपर्क किया जा रहा था। मगर फाइटर पायलट से संपर्क नहीं हो पा रहा था। विमान की लोकेशन पता करने को वायु सेना अधिकारियों को काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने नारायणगढ़ थाने में संपर्क किया।
नारायणगढ़ थाने से पुलिस अधिकारियों ने अपने स्तर पर आसपास के क्षेत्र में पता लगाया। इसके बाद उन्हें पता चला कि रायपुररानी थाना क्षेत्र में यह हादसा हुआ है। यह जानकारी मिलने के बाद ही एयरफोर्स के अधिकारी जगुआर चला रहे पायलट के लिए मदद भेज सके। बताया जाता है कि पायलट की मदद के लिए अंबाला से ही एक हैलीकॉप्टर भेजा गया था। सूत्रों की मानें तो चंडीगढ़ में ही पायलट का उपचार किया जा रहा है। वायु सेना के प्रवक्ता ने बताया कि पायलट सुरक्षित है। तकनीकी खामी के कारण यह हादसा हुआ था। मामले में जांच की जा रही है।
दो साल पहले लोगों ने देखा था प्रदर्शन
अंबाला एयरबेस भारतीय वायु सेना के सबसे पुराने एयरबेस में से एक हैं। अंबाला में कई वर्षों से जगुआर तैनात हैं। नवंबर 2023 में वायु सेना की पांच स्कवाड्रन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में टस्कर्स ने जगुआर का प्रदर्शन कर इसकी आसमान में ताकत भी दिखाई थी। इसके अलावा भी अंबाला में आसमान पर अक्सर जगुआर को उड़ान भरते देखते हुए लोग गौरवान्वित होते हैं। मगर वर्षों से यह विमान सेना भारतीय वायु सेना की सेवा कर रहा है। यह अच्छी संख्या में अंबाला में तैनात है।
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जगुआर का इतिहास 5 स्क्वाड्रन के बिना अधूरा
वायु सेना की 5 स्क्वाड्रन एएफ (टस्कर्स) का इतिहास काफी पुराना है। अगस्त 1981 में तत्कालीन विंग कमांडर (बाद में एयर वाइस मार्शल) जेएस सिसौदिया की कमान के तहत, इसे अंबाला में फिर से गठित किया गया। इसी स्कवाड्रन ने जगुआर जैसे लड़ाकू जहाज को साथ लेकर नए कीर्तिमान स्थापित किए। श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए। ऑपरेशन पवन अभियान में भी यह भाग ले चुका है। मौजूदा समय में टस्कर्स जगुआर विमान उड़ाकर वायु सेना की गहरी पैठ वाली स्ट्राइक फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं।
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नारायणगढ़ थाने से पुलिस अधिकारियों ने अपने स्तर पर आसपास के क्षेत्र में पता लगाया। इसके बाद उन्हें पता चला कि रायपुररानी थाना क्षेत्र में यह हादसा हुआ है। यह जानकारी मिलने के बाद ही एयरफोर्स के अधिकारी जगुआर चला रहे पायलट के लिए मदद भेज सके। बताया जाता है कि पायलट की मदद के लिए अंबाला से ही एक हैलीकॉप्टर भेजा गया था। सूत्रों की मानें तो चंडीगढ़ में ही पायलट का उपचार किया जा रहा है। वायु सेना के प्रवक्ता ने बताया कि पायलट सुरक्षित है। तकनीकी खामी के कारण यह हादसा हुआ था। मामले में जांच की जा रही है।
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दो साल पहले लोगों ने देखा था प्रदर्शन
अंबाला एयरबेस भारतीय वायु सेना के सबसे पुराने एयरबेस में से एक हैं। अंबाला में कई वर्षों से जगुआर तैनात हैं। नवंबर 2023 में वायु सेना की पांच स्कवाड्रन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में टस्कर्स ने जगुआर का प्रदर्शन कर इसकी आसमान में ताकत भी दिखाई थी। इसके अलावा भी अंबाला में आसमान पर अक्सर जगुआर को उड़ान भरते देखते हुए लोग गौरवान्वित होते हैं। मगर वर्षों से यह विमान सेना भारतीय वायु सेना की सेवा कर रहा है। यह अच्छी संख्या में अंबाला में तैनात है।
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जगुआर का इतिहास 5 स्क्वाड्रन के बिना अधूरा
वायु सेना की 5 स्क्वाड्रन एएफ (टस्कर्स) का इतिहास काफी पुराना है। अगस्त 1981 में तत्कालीन विंग कमांडर (बाद में एयर वाइस मार्शल) जेएस सिसौदिया की कमान के तहत, इसे अंबाला में फिर से गठित किया गया। इसी स्कवाड्रन ने जगुआर जैसे लड़ाकू जहाज को साथ लेकर नए कीर्तिमान स्थापित किए। श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए। ऑपरेशन पवन अभियान में भी यह भाग ले चुका है। मौजूदा समय में टस्कर्स जगुआर विमान उड़ाकर वायु सेना की गहरी पैठ वाली स्ट्राइक फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं।