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इकलौते बेटे की मौत के बाद दंपती ने जीवन किया समाज के नाम, मरने के बाद भी आएंगे काम
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अंबाला। वृद्ध अवस्था में माता-पिता की उसके बच्चे ही एक उम्मीद होती है, लेकिन वे ही न रहे तो कुछ बुजुर्ग जीवन की जंग हार जाते हैं। वहीं छावनी के रामनगर निवासी बनमाली दंपती ने मिसाल पेश की है। उन्होंने इकलौते बेटे की मौत के बाद पूरा जीवन समाज को समर्पित कर दिया। आज यह दंपती कहीं भी जाता है तो हर कोई इनके जज्बे को देखकर सलाम करना नहीं भूलता।
यूनियन बैंक से रिटायर्ड ओम प्रकाश बनमाली व उनकी पत्नी पंजाब स्टेट फाइनेंस कमीशन ऑफिस से असिस्टेंट रिटायर्ड रचना बनमाली समाजसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे अपनी पेंशन से जरूरतमंदों की उम्मीद की मशाल बनकर उन्हें रोशन करने निकल पड़ते हैं। चाहे फिर सरकारी स्कूलों में उनकी फीस देना हो या फिर स्टेशनरी का सामान।
ओम प्रकाश बनमाली का कहना है कि जिंदा रहने तक वह लोगों के काम आएंगे ही, लेकिन मरने के बाद भी वह कई लोगों को नया जीवन देकर जाएंगे। ओम प्रकाश ने बताया कि उन्होंने अपना देह दान कर दिया है। वहीं पत्नी ने भी अपनी आंखें दान की हैं। ओम प्रकाश ने बताया कि पत्नी और वह पिछले 20 साल से सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी 2017 को इकलौते बेटे अंशुल बनमाली की मौत के बाद पूरा जीवन ही समाज को समर्पित कर दिया। रचना बनमाली रोटरी क्लब अंबाला इंडस्ट्रियल एरिया की प्रधान हैं। इसके अलावा बनमाली दंपती बुजुर्गों के हित में काम करने वाली एल्डर फॉर संस्थान, भारत विकास परिषद विवेक शाखा से भी जुड़कर काम कर रही हैं।
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बैंक से जुड़ी जानकारी देने के लिए लगाते हैं निशुल्क शिविर
ओम प्रकाश बनमाली ने बताया कि आर्थिक रूप से मदद करने के साथ-साथ वह बैंकिंग से जुड़े अपने जीवन के अनुभव को भी लोगों के साथ निशुल्क साझा करते हैं। स्कूलों में बच्चों को बताने के अलावा वह गांव-गांव जाकर भी शिविर के जरिए उन्हें बैंक से जुड़े काम करवाने के बारे में बताते हैं ताकि वह किसी भी तरह ठगे न जाएं।
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यूनियन बैंक से रिटायर्ड ओम प्रकाश बनमाली व उनकी पत्नी पंजाब स्टेट फाइनेंस कमीशन ऑफिस से असिस्टेंट रिटायर्ड रचना बनमाली समाजसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं वे अपनी पेंशन से जरूरतमंदों की उम्मीद की मशाल बनकर उन्हें रोशन करने निकल पड़ते हैं। चाहे फिर सरकारी स्कूलों में उनकी फीस देना हो या फिर स्टेशनरी का सामान।
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ओम प्रकाश बनमाली का कहना है कि जिंदा रहने तक वह लोगों के काम आएंगे ही, लेकिन मरने के बाद भी वह कई लोगों को नया जीवन देकर जाएंगे। ओम प्रकाश ने बताया कि उन्होंने अपना देह दान कर दिया है। वहीं पत्नी ने भी अपनी आंखें दान की हैं। ओम प्रकाश ने बताया कि पत्नी और वह पिछले 20 साल से सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी 2017 को इकलौते बेटे अंशुल बनमाली की मौत के बाद पूरा जीवन ही समाज को समर्पित कर दिया। रचना बनमाली रोटरी क्लब अंबाला इंडस्ट्रियल एरिया की प्रधान हैं। इसके अलावा बनमाली दंपती बुजुर्गों के हित में काम करने वाली एल्डर फॉर संस्थान, भारत विकास परिषद विवेक शाखा से भी जुड़कर काम कर रही हैं।
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बैंक से जुड़ी जानकारी देने के लिए लगाते हैं निशुल्क शिविर
ओम प्रकाश बनमाली ने बताया कि आर्थिक रूप से मदद करने के साथ-साथ वह बैंकिंग से जुड़े अपने जीवन के अनुभव को भी लोगों के साथ निशुल्क साझा करते हैं। स्कूलों में बच्चों को बताने के अलावा वह गांव-गांव जाकर भी शिविर के जरिए उन्हें बैंक से जुड़े काम करवाने के बारे में बताते हैं ताकि वह किसी भी तरह ठगे न जाएं।