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Ambala News: चार दिन एक ही छत पर परिवारों सहित फंसे रहे करीब 60 लोग
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मोहन सैनी
अंबाला सिटी। बड़ीघेल गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जगत सिंह का डेरा व पटियाला वालों का डेरा में बाढ़ के हालातों के बीच चार दिनों तक एक ही छत पर करीब 60 लोग परिवारों सहित फंसे रहे। इन दोनों डेरों में मात्र एक घर को छोड़कर सभी लोगों के घरों की कच्ची छतें हैं।
डेरों तक पहुंचने का रास्ता भी कच्चा हैं। स्थानीय डेरा वासियों ने बताया कि बीते दिनों देर रात उनके घरों में अचानक से जलभराव की स्थिति बन चुकी थी। देखते ही देखते जलस्तर बढ़ गया। सभी लोग अपने बच्चों व कुछ जरूरतों के सामान को बचाने का प्रयास कर रहे थे। मात्र कुछ ही घंटों पश्चात पानी का जलस्तर कुछ मकानों की छतों तक पहुंच गया।
पक्के मकान की छत पर उन्होंने एक तिरपाल लगाकर मुश्किल से चार दिन निकाले। बिजली, पानी व मोबाइल आदि बंद होने के पश्चात किसी मदद व सहयोग से रहे। पानी व खाने की कोई व्यवस्था उनके पास नहीं थी। चौथे दिन कुछ लोगों ने उनके पास पानी व खाने के पैकेट लेकर पहुंचे।
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सभी परेशान थे
परमजीत सिंह ने बताया कि डेरावासी परेशान हो चुके थे। चारों ओर शोर मचा हुआ था और सभी अपने-अपने छोटे बच्चों को बचाने का प्रयास कर रहे थे। वह मंजर देखकर आज भी बहुत डर लगता है।
एक मकान है पक्का
गुरदीप सिंह ने बताया कि दोनों डेरों में मात्र एक ही मकान पक्का बना हुआ है। जिसकी छत पर करीब 50 से 60 लोगों ने एक डर के साये में करीब चार दिन बिताए। आपदा से बचाने के लिए भगवान से दुआएं मांगते रहे।
खाने-पीने का संकट
मनजीत सिंह ने बताया कि इस बाढ़ में सबसे बड़ा संकट खाने व पीने के पानी को लेकर रहा है। बच्चे बिना पानी के रोते-बिलखते देखें हैं। यह मंजर बहुत ही दुखदायी था। छोटे बच्चे समझने को भी तैयार नहीं थे।
दीवारों में दरार
कर्मचंद ने बताया कि इस आपदा में दोनों डेरों के रिहायशी मकानों की छतों के ऊपर से लगातार तीन दिनों तक तेज बहाव से पानी बहता रहा। जिस वजह से मकानों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं।
सहयोग की जरूरत
नच्छतर सिंह का कहना है कि इस बड़ी आपदा का शिकार हुए डेरा वासियों के लिए जिला प्रशासन को सहयोग करने के जरूरत है। सब कुछ खत्म हो चुका है। कच्ची छतें जोकि कभी भी गिर सकती हैं।
इन दोनों डेरा वासियों के लिए बीते तीन दिनों से हर प्रकार से सहयोग किया जा रहा है। इन लोगों के लिए दूध व खाने के लिए पैकेट आदि भेजे गए थे और वर्तमान हालातों में डेरा वासियों के लिए जिला प्रशासन से विशेष सर्वे की मांग की जाएगी, ताकि इनके डेरा में हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
-जोगिन्द्र कौर, स्थानीय पार्षद नगर निगम अंबाला।
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अंबाला सिटी। बड़ीघेल गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जगत सिंह का डेरा व पटियाला वालों का डेरा में बाढ़ के हालातों के बीच चार दिनों तक एक ही छत पर करीब 60 लोग परिवारों सहित फंसे रहे। इन दोनों डेरों में मात्र एक घर को छोड़कर सभी लोगों के घरों की कच्ची छतें हैं।
डेरों तक पहुंचने का रास्ता भी कच्चा हैं। स्थानीय डेरा वासियों ने बताया कि बीते दिनों देर रात उनके घरों में अचानक से जलभराव की स्थिति बन चुकी थी। देखते ही देखते जलस्तर बढ़ गया। सभी लोग अपने बच्चों व कुछ जरूरतों के सामान को बचाने का प्रयास कर रहे थे। मात्र कुछ ही घंटों पश्चात पानी का जलस्तर कुछ मकानों की छतों तक पहुंच गया।
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पक्के मकान की छत पर उन्होंने एक तिरपाल लगाकर मुश्किल से चार दिन निकाले। बिजली, पानी व मोबाइल आदि बंद होने के पश्चात किसी मदद व सहयोग से रहे। पानी व खाने की कोई व्यवस्था उनके पास नहीं थी। चौथे दिन कुछ लोगों ने उनके पास पानी व खाने के पैकेट लेकर पहुंचे।
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सभी परेशान थे
परमजीत सिंह ने बताया कि डेरावासी परेशान हो चुके थे। चारों ओर शोर मचा हुआ था और सभी अपने-अपने छोटे बच्चों को बचाने का प्रयास कर रहे थे। वह मंजर देखकर आज भी बहुत डर लगता है।
एक मकान है पक्का
गुरदीप सिंह ने बताया कि दोनों डेरों में मात्र एक ही मकान पक्का बना हुआ है। जिसकी छत पर करीब 50 से 60 लोगों ने एक डर के साये में करीब चार दिन बिताए। आपदा से बचाने के लिए भगवान से दुआएं मांगते रहे।
खाने-पीने का संकट
मनजीत सिंह ने बताया कि इस बाढ़ में सबसे बड़ा संकट खाने व पीने के पानी को लेकर रहा है। बच्चे बिना पानी के रोते-बिलखते देखें हैं। यह मंजर बहुत ही दुखदायी था। छोटे बच्चे समझने को भी तैयार नहीं थे।
दीवारों में दरार
कर्मचंद ने बताया कि इस आपदा में दोनों डेरों के रिहायशी मकानों की छतों के ऊपर से लगातार तीन दिनों तक तेज बहाव से पानी बहता रहा। जिस वजह से मकानों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं।
सहयोग की जरूरत
नच्छतर सिंह का कहना है कि इस बड़ी आपदा का शिकार हुए डेरा वासियों के लिए जिला प्रशासन को सहयोग करने के जरूरत है। सब कुछ खत्म हो चुका है। कच्ची छतें जोकि कभी भी गिर सकती हैं।
इन दोनों डेरा वासियों के लिए बीते तीन दिनों से हर प्रकार से सहयोग किया जा रहा है। इन लोगों के लिए दूध व खाने के लिए पैकेट आदि भेजे गए थे और वर्तमान हालातों में डेरा वासियों के लिए जिला प्रशासन से विशेष सर्वे की मांग की जाएगी, ताकि इनके डेरा में हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
-जोगिन्द्र कौर, स्थानीय पार्षद नगर निगम अंबाला।