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चंचल मन है पतन का कारण : स्वामी ज्ञान नाथ
Tue, 14 Jul 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:40 AM IST
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रुहानी सत्संग में मध्य में खड़े स्वामी ज्ञाननाथ। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। निराकारी जागृति मिशन के गद्दीनशीन चेयरमैन स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि चंचल मन ही मनुष्य के बंधन और पतन का मूल कारण है।
रुहानी सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मन का जन्म अहंकार से होता है और जहां मन समाप्त होता है, वहीं से आत्मा का बोध शुरू होता है। मनुष्य का मित्र और शत्रु दोनों मन ही है।
उन्होंने कहा कि मन आत्मा का बिगड़ैल पुत्र है। जो व्यक्ति मन के पीछे चलता है, उसका लौकिक और पारलौकिक जीवन प्रभावित होता है।
स्वामी ज्ञान नाथ ने कहा कि मुक्ति मन को चाहिए, आत्मा को नहीं। आत्मा अजर-अमर, अविनाशी और स्वभाव से ही स्वतंत्र है।
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अंबाला सिटी। निराकारी जागृति मिशन के गद्दीनशीन चेयरमैन स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि चंचल मन ही मनुष्य के बंधन और पतन का मूल कारण है।
रुहानी सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मन का जन्म अहंकार से होता है और जहां मन समाप्त होता है, वहीं से आत्मा का बोध शुरू होता है। मनुष्य का मित्र और शत्रु दोनों मन ही है।
उन्होंने कहा कि मन आत्मा का बिगड़ैल पुत्र है। जो व्यक्ति मन के पीछे चलता है, उसका लौकिक और पारलौकिक जीवन प्रभावित होता है।
स्वामी ज्ञान नाथ ने कहा कि मुक्ति मन को चाहिए, आत्मा को नहीं। आत्मा अजर-अमर, अविनाशी और स्वभाव से ही स्वतंत्र है।