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Ambala News: बारिश की दोहरी मार, मंडी में भीगी तो खेतों में बिछी फसल
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अंबाला सिटी की अनाज मंडी में भीगता धान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। जिले में वीरवार सुबह हुई अचानक बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश से अंबाला सिटी की मुख्य अनाज मंडी सहित अन्य मंडियों में खुले आसमान नीचे रखी धान की बोरियां और ढेरियां भीग गईं, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई।
तेज हवा के साथ हुई बारिश से गांव मटेहड़ी जट्टां, आनंदपुर जलबेड़ा, दुराली, उगाड़ा बाड़ा, कांवला, सौंडा, मोहड़ी, भानोखेड़ी, बहबलपुर, बेगोमाजरा, लखनौर साहिब, ठरवा, मिर्जापुर, माजरी, बीच पड़ी, ललाना और आदोमाजरा सहित आसपास के कई गांवों में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पक चुकी धान की बालियों पर बारिश का पानी पड़ने से वजन बढ़ गया, जिससे पौधे सीधे जमीन पर गिर पड़े। किसानों का कहना है कि जो फसल गिर गई है और जो पकने के बाद खड़ी है, दोनों में ही बार-बार बारिश और धूप के कारण दाने का वजन कम हो जाएगा। इससे प्रति एकड़ लगभग 10 क्विंटल तक पैदावार घटने की आशंका है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले और दब जाएगा।
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खेतों से पानी निकालने में जुटे किसान
गांव जलबेड़ा में बारिश के पानी से ज्वार और धान के खेत लबालब भर गए। किसान राजेश कुमार अपने भाई राजेंद्र के साथ मिलकर खेतों से पानी निकालने की जद्दोजहद करते नजर आए।
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किसानों को नुकसान का मुआवजा मिले
किसान सरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी तक धान की कटाई शुरू भी नहीं की थी कि पूरी फसल खेतों में बिछ गई। उन्होंने मांग की कि सरकार छोटे किसानों के नुकसान की तुरंत गिरदावरी करवाए और उचित मुआवजा प्रदान करे।
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नमी के मापदंडों में राहत की मांग
किसान रघुवीर सिंह ने सरकार से नमी के मापदंडों में ढील देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि खराब मौसम में धान में नमी रहना स्वाभाविक है, इसलिए सरकारी खरीद के लिए 17 प्रतिशत नमी की सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को मंडी में परेशान न होना पड़े।
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अंबाला सिटी। जिले में वीरवार सुबह हुई अचानक बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश से अंबाला सिटी की मुख्य अनाज मंडी सहित अन्य मंडियों में खुले आसमान नीचे रखी धान की बोरियां और ढेरियां भीग गईं, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई।
तेज हवा के साथ हुई बारिश से गांव मटेहड़ी जट्टां, आनंदपुर जलबेड़ा, दुराली, उगाड़ा बाड़ा, कांवला, सौंडा, मोहड़ी, भानोखेड़ी, बहबलपुर, बेगोमाजरा, लखनौर साहिब, ठरवा, मिर्जापुर, माजरी, बीच पड़ी, ललाना और आदोमाजरा सहित आसपास के कई गांवों में फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पक चुकी धान की बालियों पर बारिश का पानी पड़ने से वजन बढ़ गया, जिससे पौधे सीधे जमीन पर गिर पड़े। किसानों का कहना है कि जो फसल गिर गई है और जो पकने के बाद खड़ी है, दोनों में ही बार-बार बारिश और धूप के कारण दाने का वजन कम हो जाएगा। इससे प्रति एकड़ लगभग 10 क्विंटल तक पैदावार घटने की आशंका है, जिससे किसान कर्ज के बोझ तले और दब जाएगा।
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खेतों से पानी निकालने में जुटे किसान
गांव जलबेड़ा में बारिश के पानी से ज्वार और धान के खेत लबालब भर गए। किसान राजेश कुमार अपने भाई राजेंद्र के साथ मिलकर खेतों से पानी निकालने की जद्दोजहद करते नजर आए।
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किसानों को नुकसान का मुआवजा मिले
किसान सरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी तक धान की कटाई शुरू भी नहीं की थी कि पूरी फसल खेतों में बिछ गई। उन्होंने मांग की कि सरकार छोटे किसानों के नुकसान की तुरंत गिरदावरी करवाए और उचित मुआवजा प्रदान करे।
नमी के मापदंडों में राहत की मांग
किसान रघुवीर सिंह ने सरकार से नमी के मापदंडों में ढील देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि खराब मौसम में धान में नमी रहना स्वाभाविक है, इसलिए सरकारी खरीद के लिए 17 प्रतिशत नमी की सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को मंडी में परेशान न होना पड़े।

अंबाला सिटी की अनाज मंडी में भीगता धान। संवाद

अंबाला सिटी की अनाज मंडी में भीगता धान। संवाद

अंबाला सिटी की अनाज मंडी में भीगता धान। संवाद

अंबाला सिटी की अनाज मंडी में भीगता धान। संवाद