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बाल शोषण रोकने की मुहिम में शिक्षाविद एकजुट
Ambala
Updated Mon, 20 May 2013 05:31 AM IST
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यमुनानगर। समाज की विकृत मानसिकता का द्योतक बाल यौन शोषण है। इससे निपटने के लिए सामाजिक एकजुटता और चुप्पी तोड़ने जैसे संकल्पों की आवश्यकता है। ये विचार चाइल्ड लाइन यमुनानगर की ओर से महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम अब और नहीं बाल शोषण के विरुद्ध एक आवाज, कार्यक्रम में चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू बाजपेयी ने कहे। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े विभाग को संवेदनशील होने की आवश्यकता है। बच्चों का मतलब सिर्फ लड़कियों की सुरक्षा ही नहीं बल्कि लड़का-लड़की दोनों की सुरक्षा समाज के लिए चुनौती बन गई है। मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऐके सिंह पंवार ने कहा कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों को रोकने के लिए स्वस्थ मानसिकता की आवश्यकता है। इसके लिए हर व्यक्ति को घर में अच्छे संस्कार देना जरूरी है। क्योंकि परिवार अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभा पा रहे हैं। इसलिए समाज में दिन-प्रतिदिन बच्चों के शोषण की घटना बढ़ती जा रही हैं। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. पीके बाजपेयी ने कहा कि वर्तमान में कुछ लोग दुराचार की घटना के लिए लड़कियाें के पहनावे को जिम्मेवार ठहराते हैं लेकिन जब दो से पांच साल की अबोध बच्चियां दुराचार का शिकार हो रही हैं तो लड़कियां क्या पहनती हैं। इसके मायने कहां रह जाते हैं समाज की बीमार मानसिकता के लिए जीरो टॉलरेंस ही मात्र एक फार्मूला है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने कहा कि जिस समाज में अबोध बच्चे सुरक्षित नहीं हैं वह समाज कभी प्रगतिशील नहीं हो सकता। शिक्षाविद् डॉ. अमरीक सिंह ने कहा कि यौन शोषण का शिकार होने वाले बच्चे का पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। इसलिए अब और नहीं जैसी मुहिम कैंडल मार्च या गोष्ठी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आकर बाल अपराध पर रोक लगाने में सहयोग करना चाहिए। प्रो. बी. मदन मोहन ने गोष्ठी के सार को हर गली मोहल्ले तक पहुंचाने का आह्वान किया, वहीं अधिवक्ता अजय वर्मा ने न्यायालय के साथ-साथ परिवार की भूमिका को भी अहम बताया।
डॉ. उदयभान सिंह ने समाज, परिवार, पुलिस, न्यायालय और बाल सुरक्षा संस्थाओं से बाल अपराध के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। प्रवीन छाबड़ा ने गोष्ठी में भाग लेने वाले सभी सुपरवाइजर, वकील, डॉक्टर, सिद्धि विनायक इंस्टीट्यूट, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जानकी इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन, गुरु नानक खालसा कॉलेज और एमएलएन कॉलेज के वक्ताओं ने भाग लिया।
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डॉ. उदयभान सिंह ने समाज, परिवार, पुलिस, न्यायालय और बाल सुरक्षा संस्थाओं से बाल अपराध के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। प्रवीन छाबड़ा ने गोष्ठी में भाग लेने वाले सभी सुपरवाइजर, वकील, डॉक्टर, सिद्धि विनायक इंस्टीट्यूट, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जानकी इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन, गुरु नानक खालसा कॉलेज और एमएलएन कॉलेज के वक्ताओं ने भाग लिया।
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