{"_id":"53-51655","slug":"Ambala-51655-53","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंडस्ट्री को चाहिए पैकेज की संजीवनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंडस्ट्री को चाहिए पैकेज की संजीवनी
Ambala
Updated Thu, 28 Feb 2013 05:31 AM IST
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अंबाला। संसद में वीरवार को केंद्रीय वित्त मंत्री आम बजट को पेश करेंगे। बढ़ती महंगाई, टैक्सों की मार, आवश्यक वस्तुओं की कीमत में लगातार इजाफा, खर्च का बढ़ता बोझ, कर्मचारी वर्ग सभी इस बजट की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उद्योग जगत विशेष पैकेज की मांग कर रहा है तो कर्मचारी चाहते हैं कि आयकर सीमा और बढ़ाया जाय। गृहिणियों का कहना है कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या बढ़ाकर 12 कर दिया जाय। अब देखना है कि पी चिदंबरम के पिटारे से किस वर्ग को कितनी सौगात मिलती है।
दवा उद्योग
इंडस्ट्री लगाने के लिए पैकेज मिले
दवा निर्माता रमेश धमीजा का कहना है कि हिमाचल की तर्ज पर हरियाणा में भी इंडस्ट्री को पैकेज दिया जाए। पैकेज के अभाव में ही अंबाला से दवा इंडस्ट्री पलायन कर हिमाचल का रुख कर गई। हिमाचल सरकार ने भी इस इंडस्ट्री को हाथों हाथ लिया और पैकेज दिया, लेकिन हरियाणा में ऐसा नहीं मिला। दूसरा यहां पर सबसे बड़ी दिक्कत बिजली की है, जबकि टैक्स स्लैब भी इस इंडस्ट्री के माफिक नहीं है।
दवा मार्जन कम होने का खतरा
अंबाला। हरियाणा स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके खेड़ा का कहना है कि ऐसा आभास हो रहा है कि सरकार कुछ दवाओं को नॉन शेड्यूल से निकालकर शेड्यूल ड्रग की श्रेणी में ला रही है। यदि ऐसा होता है, तो रिटेलर और होल सेलर का मार्जन काफी कम हो जाएगा। ऐसे में मार्केट में बने रहना ही काफी मुश्किल होगा और उपभोक्ताओं को महंगी दवा मिलेगी।
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दवा के क्षेत्र में नियम कड़े किए जाएं
अंबाला। होलसेल दवा विक्रेता बलित नागपाल का कहना है कि कई दवाएं ऐसी हैं, जो एक ही साल्ट की अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं। लेकिन नियंत्रण न होने के कारण इनके रेट अलग-अलग होते हैं। लेकिन रॉ मेटीरियल की कीमत इसके मुकाबले काफी कम बढ़ी हैं। यानी दवा के रेटों पर तो कोई नियंत्रण हो।
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आम आदमी की पहुंच में हो दवाएं
अंबाला। रिटेल दवा विक्रेता ब्रिजेंद्र मल्होड़ा का कहना है कि इस बजट में कुछ ऐसी व्यवस्था की जाए, ताकि उपभोक्ता को दवा सस्ते दामों पर मिले। इसके लिए दवा कंपनियों की मनमानी के लिए कुछ सख्ती की जाए।
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साइंस इंडस्ट्री : टैक्स की मार से राहत मिले
साइंस कारोबारी बजट में टैक्स को लेकर उम्मीदें बांधे हैं, ताकि इसकी मार से साइंस उद्योग को बचाया जा सके। साइंस उद्यमी पुनीत कुमार का कहना है कि अंबाला में माइक्रोस्कोप, ग्लास तथा अन्य उपकरण बनते हैं। लेकिन सरकार द्वारा राज्य के अनुसार एडवांटेज दी जाती है। यही कारण है कि हरियाणा के उद्यमियों पर करों का बोझ है, जिसे यूनिफार्म टैक्स स्लैब लागू कर बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसी तरह साइंस उद्यमी ज्ञानचंद अग्रवाल का कहना है कि सरकार पिछले काफी समय से सीएसटी खत्म करने की बात कर रही है, लेकिन वर्तमान में भी यह दो परसेंट है, जबकि राज्य सरकार वैट भी लगा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि इस बार बजट में सीएसटी समाप्त किया जाए और पूरे देश में एक समान टैक्स प्रणाली लागू की जाए, राज्य के अनुसार अधिमान न दिया जाए। एक बार ही टैक्स लगाए जाएं और उसको बार-बार न बदला जाए।
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साइंटिफिक क्लस्टर लटका
अंबाला। करीब पचास करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला साइंटिफिक क्लस्टर योजना अधर में लटकी है। इसे सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई थी, जिस पर बजट अलाट होना है। इस में 25 प्रतिशत स्थानीय इंडस्ट्री को तथा अन्य राशि केंद्र सरकार को देना है। यह प्रोजेक्ट हर साल लटकता आ रहा है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा रहा है। यह योजना जहां साइंस इंडस्ट्री को कुशल कारीगर देगी, वहीं कई अन्य मायनों में सुविधा प्रदान करेगी। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि यह योजना इस बार तो सिरे चढ़े।
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मिक्सी उद्योग : टैक्स ने हाशिए पर
अंबाला। जिला का मिक्सी उद्योग भी अब हाशिये पर जाता दिखाई दे रहा है। मिक्सी उद्योग से जुउ़े अश्विनी गोयल का कहना है कि टैक्स अधिक हैं, जिसके कारण यह उद्योग अब लोग छोड़ रहे हैं। जिला भर में करीब 50 इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि यह पहले अधिक होती थीं। घरों में बिना रजिस्ट्रेशन काम करने वाली इकाइयां भी हैं। दूसरा अब विदेशों से आर्डर भी कम ही मिल रहे हैं। इसी तरह जो उद्योग यहां पर थे उनमें से कई पलायन कर हिमाचल में चले गए हैं। इस इंडस्ट्री के लिए इस बजट में राहत पैकेज चाहिए, ताकि अंबाला में यह इंडस्ट्री फिर से अपने पांव जमा सके।
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कृषि : अनुदान पर मिले खाद, उपकरण
अंबाला। किसान राम सिंह व कर्मचंद का कहना कि कृषि क्षेत्र के लिए इस बजट में बड़ी राहत दी जाए। बैंकों से लोन प्रक्रिया को सरल किया जाए और खाद, उपकरण व अन्य वस्तुओं पर और अनुदान मिले। साथ वितरण प्रणाली को ऐसा बनाया जाए ताकि छोटे और मझोले किसानों को नुकसान न हो। यही वर्ग है, जो हर बार प्राकृतिक आपदा में नुकसान उठाता है। इसी तरह विभिन्न योजनाओं के तहत बैंकों से मिलने वाले ऋण की सीमा बढ़ाई जाए और अदायगी को भी और सरल किया जाए।
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इलेक्ट्रानिक उत्पाद : टैक्स में चाहिए राहत
अंबाला। इलेक्ट्रानिक उत्पादों के व्यवसायी हरप्रीत सिंह व दविंदर सिंह का कहना है कि यह उत्पाद अब आम व्यक्ति की जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में यदि सरकार इन पर टैक्स आदि कम करती है, तो इनकी बिक्री ज्यादा हो सकती है। इलेक्ट्रानिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की स्कीमों पर भी नियंत्रण होना चाहिए क्योंकि वितरकों को यह उनकी सेल के अनुसार स्कीम देते हैं, जबकि यह सभी के लिए एक समान होनी चाहिए।
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कर्मचारी : आयकर स्लैब बढ़े
अंबाला। सरकारी कर्मचारी नरेश मित्तल, राजेंद्र कुमार, अमरनाथ का कहना है कि आयकर की सीमा तीन लाख रुपए कर दी जानी चाहिए। कर्मचारियाें की आय में वृद्धि हुई है साथ ही यह स्लैब भी बढ़ना चाहिए। इसी तरह कर्मचारियों के वार्षिक सेविंग सीमा भी बढ़कर डेढ़ लाख रुपए होनी चाहिए।
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सिलेंडर बारह चाहिए, महंगाई से मुक्ति मिले
अंबाला। गृहणियां इस बजट में सबसिडी वाले बारह गैस सिलेंडर चाहती हैं। सरकार ने पहले छह और अब नौ कर दिए हैं, लेकिन यह नाकाफी हैं। शहर से कुलवंत कौर, शालिनी शर्मा, कैंट से पुष्पा व पिंकी का कहना है कि महंगाई के इस दौर में सबसिडी वाले सिलेंडर बारह करने चाहिएं। इसी तरह महंगाई पर रोक लगे, ताकि रसोई पर बोझ न पड़े। सरकार आंकड़ों न उलझाते हुए जमीनी स्तर पर काम करे ताकि आम जनता को महंग्राइ से राहत मिले। इसके लिए सरकार को कुछ कड़े कानून बनाने चाहिएं।
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सर्विस टैक्स में और छूट मिले
अंबाला। प्रिंटिंग शॉप चलाने वाले बृजभूषण गुप्ता, टीवी रिपेयर करने वाले सचिन, सर्विस सेंटर चलाने वाले रोहित बजाज का कहना है कि सरकार सर्विस टैक्स में और छूट दे। सालाना करीब दस लाख पर सर्विस टैक्स नहीं है, जिसे और बढ़ाया जाना चाहिए। उम्मीद है कि इस बजट में कुछ तो राहत मिलेगी।
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दवा उद्योग
इंडस्ट्री लगाने के लिए पैकेज मिले
दवा निर्माता रमेश धमीजा का कहना है कि हिमाचल की तर्ज पर हरियाणा में भी इंडस्ट्री को पैकेज दिया जाए। पैकेज के अभाव में ही अंबाला से दवा इंडस्ट्री पलायन कर हिमाचल का रुख कर गई। हिमाचल सरकार ने भी इस इंडस्ट्री को हाथों हाथ लिया और पैकेज दिया, लेकिन हरियाणा में ऐसा नहीं मिला। दूसरा यहां पर सबसे बड़ी दिक्कत बिजली की है, जबकि टैक्स स्लैब भी इस इंडस्ट्री के माफिक नहीं है।
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दवा मार्जन कम होने का खतरा
अंबाला। हरियाणा स्टेट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके खेड़ा का कहना है कि ऐसा आभास हो रहा है कि सरकार कुछ दवाओं को नॉन शेड्यूल से निकालकर शेड्यूल ड्रग की श्रेणी में ला रही है। यदि ऐसा होता है, तो रिटेलर और होल सेलर का मार्जन काफी कम हो जाएगा। ऐसे में मार्केट में बने रहना ही काफी मुश्किल होगा और उपभोक्ताओं को महंगी दवा मिलेगी।
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दवा के क्षेत्र में नियम कड़े किए जाएं
अंबाला। होलसेल दवा विक्रेता बलित नागपाल का कहना है कि कई दवाएं ऐसी हैं, जो एक ही साल्ट की अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं। लेकिन नियंत्रण न होने के कारण इनके रेट अलग-अलग होते हैं। लेकिन रॉ मेटीरियल की कीमत इसके मुकाबले काफी कम बढ़ी हैं। यानी दवा के रेटों पर तो कोई नियंत्रण हो।
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आम आदमी की पहुंच में हो दवाएं
अंबाला। रिटेल दवा विक्रेता ब्रिजेंद्र मल्होड़ा का कहना है कि इस बजट में कुछ ऐसी व्यवस्था की जाए, ताकि उपभोक्ता को दवा सस्ते दामों पर मिले। इसके लिए दवा कंपनियों की मनमानी के लिए कुछ सख्ती की जाए।
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साइंस इंडस्ट्री : टैक्स की मार से राहत मिले
साइंस कारोबारी बजट में टैक्स को लेकर उम्मीदें बांधे हैं, ताकि इसकी मार से साइंस उद्योग को बचाया जा सके। साइंस उद्यमी पुनीत कुमार का कहना है कि अंबाला में माइक्रोस्कोप, ग्लास तथा अन्य उपकरण बनते हैं। लेकिन सरकार द्वारा राज्य के अनुसार एडवांटेज दी जाती है। यही कारण है कि हरियाणा के उद्यमियों पर करों का बोझ है, जिसे यूनिफार्म टैक्स स्लैब लागू कर बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसी तरह साइंस उद्यमी ज्ञानचंद अग्रवाल का कहना है कि सरकार पिछले काफी समय से सीएसटी खत्म करने की बात कर रही है, लेकिन वर्तमान में भी यह दो परसेंट है, जबकि राज्य सरकार वैट भी लगा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि इस बार बजट में सीएसटी समाप्त किया जाए और पूरे देश में एक समान टैक्स प्रणाली लागू की जाए, राज्य के अनुसार अधिमान न दिया जाए। एक बार ही टैक्स लगाए जाएं और उसको बार-बार न बदला जाए।
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साइंटिफिक क्लस्टर लटका
अंबाला। करीब पचास करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला साइंटिफिक क्लस्टर योजना अधर में लटकी है। इसे सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई थी, जिस पर बजट अलाट होना है। इस में 25 प्रतिशत स्थानीय इंडस्ट्री को तथा अन्य राशि केंद्र सरकार को देना है। यह प्रोजेक्ट हर साल लटकता आ रहा है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा रहा है। यह योजना जहां साइंस इंडस्ट्री को कुशल कारीगर देगी, वहीं कई अन्य मायनों में सुविधा प्रदान करेगी। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि यह योजना इस बार तो सिरे चढ़े।
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मिक्सी उद्योग : टैक्स ने हाशिए पर
अंबाला। जिला का मिक्सी उद्योग भी अब हाशिये पर जाता दिखाई दे रहा है। मिक्सी उद्योग से जुउ़े अश्विनी गोयल का कहना है कि टैक्स अधिक हैं, जिसके कारण यह उद्योग अब लोग छोड़ रहे हैं। जिला भर में करीब 50 इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि यह पहले अधिक होती थीं। घरों में बिना रजिस्ट्रेशन काम करने वाली इकाइयां भी हैं। दूसरा अब विदेशों से आर्डर भी कम ही मिल रहे हैं। इसी तरह जो उद्योग यहां पर थे उनमें से कई पलायन कर हिमाचल में चले गए हैं। इस इंडस्ट्री के लिए इस बजट में राहत पैकेज चाहिए, ताकि अंबाला में यह इंडस्ट्री फिर से अपने पांव जमा सके।
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कृषि : अनुदान पर मिले खाद, उपकरण
अंबाला। किसान राम सिंह व कर्मचंद का कहना कि कृषि क्षेत्र के लिए इस बजट में बड़ी राहत दी जाए। बैंकों से लोन प्रक्रिया को सरल किया जाए और खाद, उपकरण व अन्य वस्तुओं पर और अनुदान मिले। साथ वितरण प्रणाली को ऐसा बनाया जाए ताकि छोटे और मझोले किसानों को नुकसान न हो। यही वर्ग है, जो हर बार प्राकृतिक आपदा में नुकसान उठाता है। इसी तरह विभिन्न योजनाओं के तहत बैंकों से मिलने वाले ऋण की सीमा बढ़ाई जाए और अदायगी को भी और सरल किया जाए।
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इलेक्ट्रानिक उत्पाद : टैक्स में चाहिए राहत
अंबाला। इलेक्ट्रानिक उत्पादों के व्यवसायी हरप्रीत सिंह व दविंदर सिंह का कहना है कि यह उत्पाद अब आम व्यक्ति की जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में यदि सरकार इन पर टैक्स आदि कम करती है, तो इनकी बिक्री ज्यादा हो सकती है। इलेक्ट्रानिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की स्कीमों पर भी नियंत्रण होना चाहिए क्योंकि वितरकों को यह उनकी सेल के अनुसार स्कीम देते हैं, जबकि यह सभी के लिए एक समान होनी चाहिए।
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कर्मचारी : आयकर स्लैब बढ़े
अंबाला। सरकारी कर्मचारी नरेश मित्तल, राजेंद्र कुमार, अमरनाथ का कहना है कि आयकर की सीमा तीन लाख रुपए कर दी जानी चाहिए। कर्मचारियाें की आय में वृद्धि हुई है साथ ही यह स्लैब भी बढ़ना चाहिए। इसी तरह कर्मचारियों के वार्षिक सेविंग सीमा भी बढ़कर डेढ़ लाख रुपए होनी चाहिए।
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सिलेंडर बारह चाहिए, महंगाई से मुक्ति मिले
अंबाला। गृहणियां इस बजट में सबसिडी वाले बारह गैस सिलेंडर चाहती हैं। सरकार ने पहले छह और अब नौ कर दिए हैं, लेकिन यह नाकाफी हैं। शहर से कुलवंत कौर, शालिनी शर्मा, कैंट से पुष्पा व पिंकी का कहना है कि महंगाई के इस दौर में सबसिडी वाले सिलेंडर बारह करने चाहिएं। इसी तरह महंगाई पर रोक लगे, ताकि रसोई पर बोझ न पड़े। सरकार आंकड़ों न उलझाते हुए जमीनी स्तर पर काम करे ताकि आम जनता को महंग्राइ से राहत मिले। इसके लिए सरकार को कुछ कड़े कानून बनाने चाहिएं।
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सर्विस टैक्स में और छूट मिले
अंबाला। प्रिंटिंग शॉप चलाने वाले बृजभूषण गुप्ता, टीवी रिपेयर करने वाले सचिन, सर्विस सेंटर चलाने वाले रोहित बजाज का कहना है कि सरकार सर्विस टैक्स में और छूट दे। सालाना करीब दस लाख पर सर्विस टैक्स नहीं है, जिसे और बढ़ाया जाना चाहिए। उम्मीद है कि इस बजट में कुछ तो राहत मिलेगी।