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सैन्य क्षेत्र में 9 करोड़ का विकास बजट अटका
अमर उजाला अंबाला
Updated Tue, 18 Feb 2014 12:09 AM IST
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अंबाला कैंट। सैन्य क्षेत्र में विकास की रफ्तार इस वक्त काफी धीमी बनी हुई है। वजह है फंड की कमी। किसी न किसी वजह से कैंटोनमेंट बोर्ड को आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ रही है। कैंटोनमेंट बोर्ड का करीब 97 करोड़ का बकाया बतौर सर्विस चार्ज पहले ही सेना के पास फंसा हुआ है। उधर, सर्विस चार्ज के ही सात करोड़ रुपये रेलवे से लेने हैं।
ऐसे में खराब माली हालत की मार झेल रहे कैंटोनमेंट बोर्ड को एक और झटका लग गया है। कैंटोनमेंट बोर्ड का सितंबर में सेक्शन के लिए भेजा रिवाइज्ड बजट अभी तक नहीं आया है। ये रिवाइज्ड बजट कमांड स्तर पर ही अटका हुआ है, जबकि बताया जा रहा है बजट की अप्रूवल जीओसी से मिली चुकी है, लेकिन कमांड स्तर से अभी इसका सेक्शन लैटर कैंटोनमेंट बोर्ड तक नहीं पहुंचा है। इस वजह से कैंटोनमेंट बोर्ड के विभिन्न वार्डों का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।
नौ करोड़ का है विकास बजट
दरअसल, सितंबर 2013 में कैंटोनमेंट बोर्ड सदन ने करीब 34.50 करोड़ का रिवाइज्ड बजट तैयार कर इसकी अप्रूवल व सेक्शन के लिए हाईकमान को भेजा था। इस रिवाइज्ड बजट में लगभग 9.9 करोेड़ रुपये डेवलपमेंट बजट रखा गया था। यानी डेवलपमेंट बजट से कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी आठ वार्डों में विकास करवाया जाना था। लेकिन सितंबर 2013 के बाद अब फरवरी 2014 भी गुजरने वाला है। लेकिन अभी तक कैंटोनमेंट बोर्ड रिवाइज्ड बजट की सेक्शन नहीं पहुंची है। जिस वजह से विकास कार्य खासे प्रभावित हो रहे हैं। वार्डों में कई तरह के विकास कार्य इस वजह से ठप पड़े हैं। विकास की रफ्तार इस वजह से अपेक्षाकृत धीमी है।
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ठेकेदारों से उधार करवा रहे काम
कैंटोनमेंट बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट वीरेंद्र कुमार गांधी के अनुसार रिवाइज्ड बजट की सेक्शन का काम प्रोसेस में हैं, जल्द ही ये सेक्शन कैंटोनमेंट बोर्ड को मिल जाएगी। विकास कार्यों का काम फिलहाल रुकने नहीं दिया जा रहा है। अधिकृत ठेकेदारों से आग्रह करके उनसे काम करने को कहा जा रहा है। लेकिन उनके कामों की पेमेंट तभी हो पाएगी, जब रिवाइज्ड बजट की सेक्शन आ जाएगी। उनके अनुसार सेक्शन आते ही विकास कार्यों में गति आएगी। फिलहाल किसी तकनीकी वजह से ही बजट में देरी होती है, वैसे बजट वक्त पर आ जाता है।
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2 करोड़ की पेमेंट अटकी, भड़के ठेकेदार
एमईएस ठेकेदारों ने आर्मी व एयरफोर्स कार्यालयों क बाहर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। लोकल मिलिट्री अथारिटी और एयरफोर्स अथारिटी ने मिलिट्री इंजीनियिरिंग सर्विस के माध्यम से अधिकृत बिल्डर व ठेकेदारों से विकास कार्य तो करवा लिए हैं, लेकिन उनका बकाया अभी तक चुकाया नहीं है। जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ सौ बिल्डर का दो करोड़ रुपया महीनों से बकाया पड़ा है, जबकि बिल्डरों की और भी कुछ मांगें हैं, जिसे सेना हाईकमान नजरअंदाज किए हुए है।
इसी को लेकर अंबाला में एमईएस बिल्डर एसोसिएशन ने एमईएस के आर्मी व एयरफोर्स कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। चेयरमैन प्रवेश गुप्ता और सचिव अश्वनी कुमार ने बताया कि एसोसिएशन की मांगों पर सेना हाईकमान गौर नहीं कर रहा है, इसलिए उन्हें मजबूरन प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने बताया कि बिल्डरों की काफी समय से पेमेंट आर्मी व एयरफोर्स के पास अटकी पड़ी है, जिससे उनका गुजारा करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन वे फिर भी विकास कार्यों में जुटे रहते हैं। लेकिन उनका बकाया अभी तक नहीं चुकाया जा रहा है।
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ऐसे में खराब माली हालत की मार झेल रहे कैंटोनमेंट बोर्ड को एक और झटका लग गया है। कैंटोनमेंट बोर्ड का सितंबर में सेक्शन के लिए भेजा रिवाइज्ड बजट अभी तक नहीं आया है। ये रिवाइज्ड बजट कमांड स्तर पर ही अटका हुआ है, जबकि बताया जा रहा है बजट की अप्रूवल जीओसी से मिली चुकी है, लेकिन कमांड स्तर से अभी इसका सेक्शन लैटर कैंटोनमेंट बोर्ड तक नहीं पहुंचा है। इस वजह से कैंटोनमेंट बोर्ड के विभिन्न वार्डों का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।
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नौ करोड़ का है विकास बजट
दरअसल, सितंबर 2013 में कैंटोनमेंट बोर्ड सदन ने करीब 34.50 करोड़ का रिवाइज्ड बजट तैयार कर इसकी अप्रूवल व सेक्शन के लिए हाईकमान को भेजा था। इस रिवाइज्ड बजट में लगभग 9.9 करोेड़ रुपये डेवलपमेंट बजट रखा गया था। यानी डेवलपमेंट बजट से कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी आठ वार्डों में विकास करवाया जाना था। लेकिन सितंबर 2013 के बाद अब फरवरी 2014 भी गुजरने वाला है। लेकिन अभी तक कैंटोनमेंट बोर्ड रिवाइज्ड बजट की सेक्शन नहीं पहुंची है। जिस वजह से विकास कार्य खासे प्रभावित हो रहे हैं। वार्डों में कई तरह के विकास कार्य इस वजह से ठप पड़े हैं। विकास की रफ्तार इस वजह से अपेक्षाकृत धीमी है।
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ठेकेदारों से उधार करवा रहे काम
कैंटोनमेंट बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट वीरेंद्र कुमार गांधी के अनुसार रिवाइज्ड बजट की सेक्शन का काम प्रोसेस में हैं, जल्द ही ये सेक्शन कैंटोनमेंट बोर्ड को मिल जाएगी। विकास कार्यों का काम फिलहाल रुकने नहीं दिया जा रहा है। अधिकृत ठेकेदारों से आग्रह करके उनसे काम करने को कहा जा रहा है। लेकिन उनके कामों की पेमेंट तभी हो पाएगी, जब रिवाइज्ड बजट की सेक्शन आ जाएगी। उनके अनुसार सेक्शन आते ही विकास कार्यों में गति आएगी। फिलहाल किसी तकनीकी वजह से ही बजट में देरी होती है, वैसे बजट वक्त पर आ जाता है।
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2 करोड़ की पेमेंट अटकी, भड़के ठेकेदार
एमईएस ठेकेदारों ने आर्मी व एयरफोर्स कार्यालयों क बाहर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। लोकल मिलिट्री अथारिटी और एयरफोर्स अथारिटी ने मिलिट्री इंजीनियिरिंग सर्विस के माध्यम से अधिकृत बिल्डर व ठेकेदारों से विकास कार्य तो करवा लिए हैं, लेकिन उनका बकाया अभी तक चुकाया नहीं है। जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ सौ बिल्डर का दो करोड़ रुपया महीनों से बकाया पड़ा है, जबकि बिल्डरों की और भी कुछ मांगें हैं, जिसे सेना हाईकमान नजरअंदाज किए हुए है।
इसी को लेकर अंबाला में एमईएस बिल्डर एसोसिएशन ने एमईएस के आर्मी व एयरफोर्स कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। चेयरमैन प्रवेश गुप्ता और सचिव अश्वनी कुमार ने बताया कि एसोसिएशन की मांगों पर सेना हाईकमान गौर नहीं कर रहा है, इसलिए उन्हें मजबूरन प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने बताया कि बिल्डरों की काफी समय से पेमेंट आर्मी व एयरफोर्स के पास अटकी पड़ी है, जिससे उनका गुजारा करना मुश्किल हो रहा है, लेकिन वे फिर भी विकास कार्यों में जुटे रहते हैं। लेकिन उनका बकाया अभी तक नहीं चुकाया जा रहा है।