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छठ पूजा पर बाजार हुए गुलजार, महिलाओं ने की जमकर की खरीदारी
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:51 AM IST
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प्रस्तावित पेज चार लीड
फोटो नंबर---11 और 12
छठ पूजा पर बाजार गुलजार, महिलाओं ने की खरीददारी
गन्ना, सूप, हल्दी के पत्ते व अन्य सामान की हुई ब्रिकी
अर्घ्य का समय :
मंगलवार : सूर्यास्त: 18:01 बजे
बुधवार : सूर्योदय: 06:45 बजे
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। छठ पूजा को लेकर सोमवार को बाजार गुलजार रहे। सुबह से ही बाजारों में रौनक लगनी शुरू हो गई थी। महिलाएं भी पूजा के लिए गन्ने, हल्दी के पत्ते व अन्य पूजा में प्रयोग होने वाले सामान की जमकर खरीददारी की। वहीं दूसरे दिन खरने में व्रतधारियों ने दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को प्रसाद ग्रहण के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी का भोग लगाया। वहीं तीसरे दिन होने वाली विशेष छठ की पूजा के लिए कृत्रिम तालाबों का भी निर्माण किया।
ऐसे होती है छठ पूजा
पंडित दीप लाल जयपुरी ने बताया कि छठ पूजा के तीसरे दिन छठ प्रसाद बनाया जाता है। इस दौरान प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू, चढ़ावा के रूप में लाया गया सांचा और फल भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रति के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर जाते है। इस दौरान तालाब के किनारे सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है। वहीं चौथे दिन की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
इन छठ गीतों का होता है गुणगान
लोकपर्व छठ के विभिन्न अवसरों पर जैसे प्रसाद बनाते समय, खरना के समय, अर्घ्य देने के लिए जाते हुए, अर्घ्य दान के समय और घाट से घर लौटते समय अनेक सुमधुर और भक्ति भाव से पूर्ण लोकगीत गाए जाते हैं। इस दौरान व्रति केलवा जे फरेला घवद से, बहंगी लचकत जाए, सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार, उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर। ऐसे ही अन्य गीतों का भी महिलाओं द्वारा गुणगान किया जाता है।
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छठ पूजा का अर्घ्य समय
पंडित दीप लाल जयपुरी ने बताया कि तीसरे दिन संध्या समय में सूर्य देवता को पहला अर्घ्य दिया जाता है। इससे पूर्व पूरे दिन का उपवास होता है। शाम को सूर्यास्त: 18:01 बजे होगा। वहीं चौथे दिन सुबह सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाएगा। यह छठ पूजा का दूसरा अर्घ्य होता है जिसके बाद 36 घंटे के लंबे उपवास का समापन हो जाता है। इस दिन सूर्योदय: 6:45 बजे होगा।
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छठ पूजा पर बाजार गुलजार, महिलाओं ने की खरीददारी
गन्ना, सूप, हल्दी के पत्ते व अन्य सामान की हुई ब्रिकी
अर्घ्य का समय :
मंगलवार : सूर्यास्त: 18:01 बजे
बुधवार : सूर्योदय: 06:45 बजे
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। छठ पूजा को लेकर सोमवार को बाजार गुलजार रहे। सुबह से ही बाजारों में रौनक लगनी शुरू हो गई थी। महिलाएं भी पूजा के लिए गन्ने, हल्दी के पत्ते व अन्य पूजा में प्रयोग होने वाले सामान की जमकर खरीददारी की। वहीं दूसरे दिन खरने में व्रतधारियों ने दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को प्रसाद ग्रहण के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी का भोग लगाया। वहीं तीसरे दिन होने वाली विशेष छठ की पूजा के लिए कृत्रिम तालाबों का भी निर्माण किया।
ऐसे होती है छठ पूजा
पंडित दीप लाल जयपुरी ने बताया कि छठ पूजा के तीसरे दिन छठ प्रसाद बनाया जाता है। इस दौरान प्रसाद के रूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू, चढ़ावा के रूप में लाया गया सांचा और फल भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। शाम को बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रति के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर जाते है। इस दौरान तालाब के किनारे सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है। वहीं चौथे दिन की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
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इन छठ गीतों का होता है गुणगान
लोकपर्व छठ के विभिन्न अवसरों पर जैसे प्रसाद बनाते समय, खरना के समय, अर्घ्य देने के लिए जाते हुए, अर्घ्य दान के समय और घाट से घर लौटते समय अनेक सुमधुर और भक्ति भाव से पूर्ण लोकगीत गाए जाते हैं। इस दौरान व्रति केलवा जे फरेला घवद से, बहंगी लचकत जाए, सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार, उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर। ऐसे ही अन्य गीतों का भी महिलाओं द्वारा गुणगान किया जाता है।
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छठ पूजा का अर्घ्य समय
पंडित दीप लाल जयपुरी ने बताया कि तीसरे दिन संध्या समय में सूर्य देवता को पहला अर्घ्य दिया जाता है। इससे पूर्व पूरे दिन का उपवास होता है। शाम को सूर्यास्त: 18:01 बजे होगा। वहीं चौथे दिन सुबह सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाएगा। यह छठ पूजा का दूसरा अर्घ्य होता है जिसके बाद 36 घंटे के लंबे उपवास का समापन हो जाता है। इस दिन सूर्योदय: 6:45 बजे होगा।