वैदिक खेलों में शक्ति प्रदर्शन के रोमांच का पहला ट्रायल कल

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Thu, 27 Sep 2018 09:56 AM IST
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स्कंध युद्ध, अश्वरोही युद्ध, हस्ति युद्ध और बंदीकरण युद्ध कलाएं करेंगी रोमांचित
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कुलदीप चहल
अंबाला कैंट। खेल मैदानों में हावी हो रहीं आधुनिक गेम्स को भारत के वैदिक गेम्स अब टक्कर देने की तैयारी में हैं। इन गेम्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें टीमें अपना शक्ति प्रदर्शन तो करेंगी, जबकि दिमागी कसरत भी भरपूर होगी। दावा किया जा रहा है कि इस तरह की गेम्स का ट्रायल पहली बार किया जा रहा है। यदि यह सफल रहा तो इसका विस्तृत रूप भी आगे मैदान में देखने को मिल सकता है। यह आयोजन कैंट के एसडी कॉलेज में 28 सितंबर से होगा, जबकि इसका प्रारूप संस्कृत विभाग द्वारा किया गया है।
कॉलेज प्रिंसिपल डा. राजेंद्र सिंह, द्वितीय हरियाणा एनसीसी बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल परमजीत सिंह संधू, हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डा. सोमेश्वर दत्त विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। संस्कृत प्राध्यापक प्रो. आशुतोष अंगीरस ने बताया कि वैदिक काल में इस तरह के खेल प्रचलित थे, जो आज आधुनिक खेलों की छाया में खो गए हैं। इनको दोबारा मैदान में जीवित करने के लिए यह प्रारूप तैयार किया गया है।
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यह है आयोजन का प्रारूप
संस्कृत शास्त्राधारित प्रथम क्रीड़ोत्सव का आयोजन कैंट के एसडी कॉलेज में किया जा रहा है। इसमें स्कंध युद्ध (शोल्डर फाइट), अश्वरोही युद्ध (हॉर्स राइडर्स फाइट), हस्ति युद्ध (ऐलिफेंट फाइट) तथा बंदीकरण युद्ध (कैपटिविटी स्पोर्ट) का आयोजन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इनमें हाथी या घोड़ों को शामिल नहीं किया जाएगा, जबकि इसी प्रारूप में टीमें मैदान में अपने दमखम का प्रदर्शन करेंगी। यह प्रारूप अभी प्रारंभिक स्तर पर तैयार किया गया है, जबकि इसकी सफलता आगे की तैयारियों को बल देगी।
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इस तरह से खेलेंगी टीमें
स्कंध युद्ध में पांच-पांच खिलाड़ियों की दो टीमें मैदान में खेलेंगी। जब तक एक टीम हार नहीं जाती, तब तक यह जारी रहेगा। इसी तरह अश्वारोही युद्ध में बीस प्रतिभागी होंगे, जबकि एक टीम में दो खिलाड़ी शामिल रहेंगे। हस्ति युद्ध में भी बीस प्रतिभागी होंगे, जबकि इनको चार टीमों में बांटा गया है। इसी तरह बंदीकरण युद्ध में भी बीस प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, जो दो टीमों में मैदान में उतरेंगे। इन सभी खेलों में समय सीमा तो दी है, लेकिन साथ ही समय बीतने के बाद भी यदि कोई टीम नहीं हारती, तो विजेता का फैसला होने तक खेल जारी रहेगा।
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पहली बार हो रहे हैं वैदिक गेम्स
दावा किया जा रहा है कि अंबाला ही नहीं बल्कि हरियाणा में इस तरह के खेलों का आयोजन पहली बार हो रहा है। इन खेलों में जहां ताकत का इस्तेमाल होता है, वहीं पुरातन शैली में एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है। इससे लीडरशिप, स्पर्धा की भावना, एक साथ टीम बनाकर आगे बढ़ना, जाति भेद को समाप्त करने की प्रेरणा मिलती है।

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