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Ambala News: 13 माह में 813 लापता, इनमें 136 किशोरियां
Tue, 10 Feb 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 10 Feb 2026 06:03 AM IST
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अंबाला सिटी। बीते 13 महीनों में अंबाला से 247 बच्चों की पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की है। इसमें अंबाला शहर से लेकर साहा मुलाना तक के बच्चे गायब हो गए। हैरानी की बात है कि इन बच्चों में 18 साल तक के बच्चे शामिल हैं। गुमशुदगी की रिपोर्ट देखने पर पता चलता है कि जिला में कुल 813 लोग जनवरी 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक गुमशुदा हुए। इसमें 566 बड़े लोग तो 136 किशोरियां शामिल रहीं।
वहीं 43 बच्चों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई, यह वह बच्चे थे जो एक साल से 13 साल तक की उम्र के थे। इसमें एक बच्चा तो ऐसा भी गुमशुदा हुआ जो कुछ ही महीनों का था। एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट के अधिकारियों का कहना है कि इन गुमशुदा बच्चों में से अधिकांश को तलाश लिया गया है। करीब चार से पांच बच्चे ऐसे हैं जिनकी तलाश नहीं हो सकी है। इन बच्चों को को तलाशना पुलिस के सामने आज भी एक चुनौती बना हुआ है।
पुलिस के पास गुमशुदा लोगों की तलाश के अलावा भी कई केसों का भार है। इस कारण से कई बार पूरी क्षमता के साथ गुमशुदा के मामलों में तफ्तीश ठीक से हो नहीं पाती है। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस ने सफलता भी हासिल की है। जब तीन महीने तक बच्चा ट्रेस नहीं होता है तो मामले को एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग शाखा को दे दिया जाता है। कोई केस ट्रेस नहीं होता उस केस में परिजनों की काउंसलिंग करने से पता चलता है कि बच्चा पिता की डांट या किसी घरेलू कलह से चला गया। ब्यूरो
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वहीं 43 बच्चों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई, यह वह बच्चे थे जो एक साल से 13 साल तक की उम्र के थे। इसमें एक बच्चा तो ऐसा भी गुमशुदा हुआ जो कुछ ही महीनों का था। एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग यूनिट के अधिकारियों का कहना है कि इन गुमशुदा बच्चों में से अधिकांश को तलाश लिया गया है। करीब चार से पांच बच्चे ऐसे हैं जिनकी तलाश नहीं हो सकी है। इन बच्चों को को तलाशना पुलिस के सामने आज भी एक चुनौती बना हुआ है।
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पुलिस के पास गुमशुदा लोगों की तलाश के अलावा भी कई केसों का भार है। इस कारण से कई बार पूरी क्षमता के साथ गुमशुदा के मामलों में तफ्तीश ठीक से हो नहीं पाती है। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस ने सफलता भी हासिल की है। जब तीन महीने तक बच्चा ट्रेस नहीं होता है तो मामले को एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग शाखा को दे दिया जाता है। कोई केस ट्रेस नहीं होता उस केस में परिजनों की काउंसलिंग करने से पता चलता है कि बच्चा पिता की डांट या किसी घरेलू कलह से चला गया। ब्यूरो
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