{"_id":"5ab6a72a4f1c1b2c678b47b5","slug":"71521919786-ambala-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारदर्शिता व जवाबदेही ही आरटीआई एक्ट की मूल भावना: पीपी कपूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पारदर्शिता व जवाबदेही ही आरटीआई एक्ट की मूल भावना: पीपी कपूर
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:59 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पारदर्शिता और जवाबदेही ही आरटीआई एक्ट की मूल भावना : पीपी कपूर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
जन अभियान मंच की ओर से प्रदेश के प्रमुख आरटीआई और सोशल एक्टिविस्टों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया गया। यादव धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आरटीआई एक्ट को स्कूली पाठ्यक्रम मेें शामिल करने, लोकायुक्त को सशक्त करने, आरटीआई एक्ट के सेक्शन चार को लागू करने, सूचना न देने के दोषी सूचना अधिकारियों को दंडित करने और आरटीआई एक्टिविस्टों को सुरक्षा दिलाने की मांग की गई।
जन अभियान मंच के अध्यक्ष पीपी कपूर ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ होते हैं, लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और पारदर्शिता और जवाबदेही ही आरटीआई एक्ट की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि आरटीआई और सोशल एक्टिविस्ट जान जोखिम में डाल ही सरकार द्वारा किए जा रहे ‘कारनामों’ को जनता तक पहुंचा रहे हैं और इसी कारण आए दिन हमले भी होते रहते हैं। गुरुग्राम से आए आरटीआई एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा ने कहा कि सरकार की ओर से जीरो टोलरेंस का दावा किया गया है। लेकिन आरटीआई के माध्यम से बेनकाब हुए कुल 40 हजार करोड़ रुपये के घोटालों यह बताते हैं कि इस सरकार की ओर से घोटालेबाजों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पवन आर्य ने कहा कि आरटीआई को लागू करने में सरकारों में इच्छा शक्ति का अभाव रहा हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश बैंस ने कहा कि अधिकांश राज्य जन सूचना अधिकारियों को बिना ट्रेनिंग दिए ही यह जिम्मेवारी दे दी जाती है और इसी कारण ही वे सूचनाएं समय पर नहीं देते और एक्ट की उल्लंघना करते हैं। इस दौरान सेवानिवृत्त कर्नल जितेंद्र आहलूवालिया और सेवानिवृत्त आईएएस आरआर फूलिया ने भी विचार रखे।
इस मौके पर डॉ. रमेश मदान, संजीव यादव, राजपाल भुल्लर, मनोज कड़वासरा, सुरेंद्र भानोट, महेंद्र चावला, राजबीर भारद्वाज, अजय मलिक, सुनील कपूर, भूपेंद्र शर्मा, सतपाल पंवार, अजय गुप्ता, दिनेश कुंडू आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
जन अभियान मंच की ओर से प्रदेश के प्रमुख आरटीआई और सोशल एक्टिविस्टों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया गया। यादव धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आरटीआई एक्ट को स्कूली पाठ्यक्रम मेें शामिल करने, लोकायुक्त को सशक्त करने, आरटीआई एक्ट के सेक्शन चार को लागू करने, सूचना न देने के दोषी सूचना अधिकारियों को दंडित करने और आरटीआई एक्टिविस्टों को सुरक्षा दिलाने की मांग की गई।
जन अभियान मंच के अध्यक्ष पीपी कपूर ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ होते हैं, लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और पारदर्शिता और जवाबदेही ही आरटीआई एक्ट की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि आरटीआई और सोशल एक्टिविस्ट जान जोखिम में डाल ही सरकार द्वारा किए जा रहे ‘कारनामों’ को जनता तक पहुंचा रहे हैं और इसी कारण आए दिन हमले भी होते रहते हैं। गुरुग्राम से आए आरटीआई एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा ने कहा कि सरकार की ओर से जीरो टोलरेंस का दावा किया गया है। लेकिन आरटीआई के माध्यम से बेनकाब हुए कुल 40 हजार करोड़ रुपये के घोटालों यह बताते हैं कि इस सरकार की ओर से घोटालेबाजों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता पवन आर्य ने कहा कि आरटीआई को लागू करने में सरकारों में इच्छा शक्ति का अभाव रहा हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश बैंस ने कहा कि अधिकांश राज्य जन सूचना अधिकारियों को बिना ट्रेनिंग दिए ही यह जिम्मेवारी दे दी जाती है और इसी कारण ही वे सूचनाएं समय पर नहीं देते और एक्ट की उल्लंघना करते हैं। इस दौरान सेवानिवृत्त कर्नल जितेंद्र आहलूवालिया और सेवानिवृत्त आईएएस आरआर फूलिया ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
इस मौके पर डॉ. रमेश मदान, संजीव यादव, राजपाल भुल्लर, मनोज कड़वासरा, सुरेंद्र भानोट, महेंद्र चावला, राजबीर भारद्वाज, अजय मलिक, सुनील कपूर, भूपेंद्र शर्मा, सतपाल पंवार, अजय गुप्ता, दिनेश कुंडू आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन