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- शहर के युवाओं के जज्बे को समर्पित युवा दिवस
Updated Fri, 12 Jan 2018 01:09 AM IST
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युवा जिनके संघर्ष ने बदल दिया जीवन का रंग
‘भगत है आज भी जिंदा वतन के इन युवाओं में... महक शेखर की भी फैली हुई है इन फिजाओं में... अंधेरे को मिटाना काम है क्या सिर्फ सूरज का... जल रहा है दिया कोई आज भी इन हवाओं में.......अनामिका वालिया (युवा कवि)’
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
कहते हैं कि युवा किसी भी देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का दम रखते हैं। युवा चाहे तो अपने जोश और जज्बे से बड़ी से बड़ी चुनौती का भी सामना कर सकते हैं। ऐसा ही ऊर्जावान अंबाला का युवा वर्ग हैं जिन्होंने भले की छोटी सी शुरूआत की हो, लेकिन इरादा बड़ा रहा है। कम उम्र में बड़ी बुलंदियां छूने वाले युवा वर्ग के संघर्ष की कहानी को आज युवा दिवस पर अमर उजाला अपने पाठकों के सामने लाया है। अंबाला में ऐसे कई युवा है जो अपने मेहनत व लगन से समाज को सकारात्मकता का संदेश देते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
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कला : यू टयूब चैनल पर लघु फिल्में बनाकर सामाजिक कुरीतियों पर कर रहे प्रहार
युवाओं के ग्रुप को वीआईपी प्रोडक्शंस का नाम दिया है जो सामाजिक सरोकारों से लोगों को जोड़कर उन्हें जागरुक करने का काम कर रहे हैं। ग्रुप के युवा सदस्य बिल्कुल साधारण परिवारों से हैं। इस ग्रुप में विंशुल छात्र हैं और वीआईपी प्रोडक्शन के फाउंडर भी। इनके अलावा ग्रुप में नील माधव शर्मा हैं जो पेशे से वेडिंग फोटोग्राफर हैं और ग्रुप में एडिटिंग की जिम्मेदारी इनके पास हैं। अपूर्व अरोड़ा इस ग्रुप के एकमात्र एनआरआई सदस्य हैं जो अमेरिका के न्यूयार्क में फिल्म प्रोडक्शन की पढ़ाई करने के साथ साथ एडवाइजर और मार्गदर्शक की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। यू ट्यूब पर अपलोड की जाने वाली लघु फिल्म का थीम क्या होगा इस बात को ग्रुप की राइटर और एक मात्र महिला सदस्य साक्षी अनेजा तय करती हैं। इसके अलावा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा जयविन अजमानी प्रोडक्शन इंचार्ज हैं तो 12वीं में पढ़ने वाला मनहर जोशी इस पूरी पटकथा का कांसेप्ट एडिटर है। ग्रुप सोशल मीडिया और इंटरनेट को हथियार बनाकर सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हैं। पिछले साल 14 नवंबर चिल्ड्रंस डे पर द शू वोन्ट फिट नाम से एक फिल्म बनाकर यू ट्यूब पर डाली गई थी जिसमें उन युवाओं की मानसिकता को दिखाया गया है जो अपना कैरियर बनाना तो किसी और फील्ड में चाहते हैं परंतु मजबूरन उन्हें अपने परिवार और समाज के दबाव में कोई और काम करना पड़ रहा है। एक छोटा सा प्रयास इस फिल्म के जरिए किया गया तो काफी हिट रहा। प्वाइंट 5 के नाम से एक फिल्म बनाई है जिसमें दिखाया गया है कि कम ससाधनों में रहकर भी प्रतिभावान युवा अच्छे खासे और साधन संपन्न लोगों को कैसे मात दे सकते हैं।
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साहित्य : स्कूल में अंग्रेजी की टीचर, मगर जुनून कविताओं का
बलदेव नगर स्थित राजकीय स्कूल में अंग्रेजी की टीचर अनामिका वालिया को कविताओं का जुनून है। देशभक्ति, बेटियां, सैनिकों व अन्य विषयों पर वह कविता पाठ करती हैं। अब तक उनका एक काव्य संग्रह ‘एक और इंकलाब’ प्रकाशित हो चुका है जबकि दूसरा भी आने वाला है। वह कई टीवी चैनल शो में कविता पाठ कर चुकी है जबकि विभिन्न राज्यों में बड़े कवि सम्मेलनों में वह सक्रिय रूप से हिस्सा ले चुकी है। युवा कवित्री अनामिका के नाना स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्हीं से उसे देशभक्ति पर आधारित कविताएं लिखने की प्रेरणा मिली। वर्ष 2012 में उसने अपना यह सफर आरंभ किया था, रात्रि सपना आया कि वह तिरंगे पर कविता लिख रही है, बस यहीं से उनका सफर मंजिल की ओर आगे बढ़ गया जोकि आज भी जारी है। अनामिका समय-समय पर महिला अत्याचारों पर होने वाली दुखद घटनाओं पर भी कविता के माध्यम से कटाक्ष करती है जबकि सैनिकों को समर्पित अब तक वह कई कविताएं लिख चुकी हैं।
तकनीक : वाटरमैन के बेटे ने बनाया रेल हादसे रोकने वाला सिस्टम
अंबाला के साहा खंड के गांव पसियाला के रहने वाले बलराम सिंह सैनी आर्ट्स संकाय से ग्रेजुएवेट हैं और इंजीनियरिंग से दूर दूर तक उनका कोई सरोकार नहीं रहा। परंतु अब वह अपने अविष्कारों से बड़े बड़े शोधकर्ताओं को हैरानी में डाल रहे हैं। बलराम ने लगभग 6 महीने पहले रेलवे के लिए ऐसा सिस्टम तैयार किया जो रेल पटरियों के साथ छेडख़ानी होते ही अलार्म बजाकर रेलवे के अधिकारियों के मोबाइल पर अलर्ट एसएमएस भेज देगा। इस बारे में बलराम रेल अधिकारियों से मुलाकात भी कर चुका है। इसके अलावा उसने कई अन्य साइंस मॉडल तैयार कर अपना तकनीकी क्षमता का बखूबी प्रदर्शन किया है। बलराम सैनी बताते हैं उनके पिता रेलवे में वाटरमैन थे इसलिए हमेशा से ही रेलवे से लगाव रहा। ग्रेज्युेशन भले ही आर्टस से की हो परंतु तकनीक में शुरू से रूचि रही। कई अविष्कार किए जो रेलवे के काम आ सकते हैं। उनकी साहा में छोटी सी वर्कशाप है जिसमें तीन लोग काम करते हैं। बलराम सैनी बताते हैं 2005 से लेकर 2010 तक वह अपने गांव के सरपंच भी रहे परंतु राजनीति में रहते हुए लोगों के लिए कुछ ज्यादा नहीं कर सके। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि राजनीति में जाकर समय खराब कर दिया। यदि यहां पर शोध पर और वक्त दिया जाता तो काफी कुछ और किया जा सकता था।
फैशन : ढाई हजार में करती थी काऊंसलर की नौकरी आज चलाती हैं अपना फैशन इंस्टीट्यूट
अंबाला में जब भी नए ट्रैंड और फैशन की बात होती है तो अंबाला की फैशन आईकान वंदना सहगल कोछर का चेहरा जहन में आता है। साधारण परिवार से निकली वंदना कोछर ने अपनी मेहनत और लग्न से देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है। युवा महिला फैशन डिजाइनर वंदना की कामयाबी की चकाचौंध के पीछे उनका कड़ा संघर्ष रहा है। वंदना के पिता सेना में थे। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वंदना ने दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और अंबाला आ गईं। दिल्ली जैसे बड़े शहर में अच्छी सैलरी के आफर ठुकराकर अंबाला आईं वंदना ने एनआईएफडी इंस्टीट्यूट ज्वाइन कर लिया। वंदना बताती हैं कि उनकी ज्वाइनिंग मात्र ढाई हजार रुपये की सैलरी पर हुई। खूब मेहनत की, नौकरी के साथ साथ पार्ट टाइम बूटीक्स के लिए काम भी करती थी। मगर बाद में मेहनत व लग्न से आगे बढ़ते हुए उन्होंने आईएनआईएफडी की स्वयं की फ्रेंचाइजी ली। मात्र 15 बच्चों के साथ सेंटर शुरू किया और एक ही साल में इन विद्यार्थियों की संख्या 65 की हो गई। आज यह आंकड़ा सैंकड़ों छू गया है। फैशन डिजाइनिंग सेंटर चलाने के साथ साथ वंदना सामाजिक सरोकारों में भी खूब बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
समाजसेवा : मानसेवा के लिए दिन रात तत्पर रहते हैं युवा :
मानवता की सेवा के लिए अंबाला में युवाओं का दल मनुखता दी सेवा सोसाइटी के नाम से काम कर रहा है। सोसाइटी का मुख्य मकसद बेघर और बेसहारा बुजुर्गों की सेवा करने का है। मनुखता दी सेवा सोसाइटी के सदस्यों ने बस अड्डों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक पर अपने नंबर दर्ज करवाए हुए हैं साथ ही अन्य लोगों के साथ भी इनका नेटवर्क है जो इन्हें सूचना देता है। सोसाइटी के सदस्य मंदीप सिंह कोड़वा बताते हैं कि अंबाला में लगभग 15 युवाओं का दल इस सोसाइटी के साथ जुड़ा है जिसनें सैकड़ों बुजुर्गों को इलाज और छत मुहैया करवाकर सोसाइटी के बनवाए गए शेल्टर हाउस में भेजते हैं। इसके अलावा इन लोगों के परिवारों का पता लगाकर उनके पास इन्हें भेजने के पर्याप्त इंतजाम भी करवाए जाते हैं। वीरवार को भी अंबाला कैंट के पुराने बस स्टैंड के पास से एक बुजुर्ग को सोसाइटी के सदस्यों ने सेवा मुहैया करवाई है। इसके अलावा घायल गाय और नंदी आदि की सेवा करने में भी सोसाइटी पीछे नहीं रहती।
खेल : दीपक सैनी, इंटरनेशनल पैरा शूटर (शूटिंग गेम्स)
घर की दीवार पर टारगेट लगाकर एक गन से निशाना लगाने से हुई शुरुआत आज इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच चुकी है। अंबाला के शाहपुर के रहने वाले दीपक सैनी ने कभी हार नहीं मानी और तमाम मुश्किलों के बावजूद एक छोटे से घर से निकलकर अपनी शूटिंग का ऐसा लोहा मनवाया कि इंटरनेशनल लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व किया। इस मुकाम तक पहुंचने में दीपक को करीब आठ साल लगे हैं। वह एयर राइफल, पिस्टल, प्रोन (लेटकर निशाना लगाना) में चैंपियन हैं। साल 2011 से लेकर 2017 तक वे नेशनल लेवल पर चैंपियन रहे। साल 2017 में बैंकाक में हुई वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीता। अब साल 2018 में वे यूएई में मार्च माह में होने वाले वर्ल्ड कप शूटिंग चैपियनशिप, एक से बारह मई तक साउथ कोरिया में होने वाली शूटिंग चैपियनशिप में भारत के प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने बताया कि साल 2011 के बाद से कईं मुकाम ऐसे आए कि एक बार तो इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में जाने के लिए टिकट के खर्च का बंदोबस्त ही नहीं हो रहा था। लेकिन अचानक सारे रास्ते खुले और वे इंटरनेशनल प्रतियोगिता में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उनका टारगेट पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है, जिसके लिए पैक्टिस जारी है। उन्होंने इसी बीच अंबाला कैंट में अपनी शूटिंग रेंज भी तैयार की है, जहां पर प्रदेश भर से शूटिंग गेम के खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।
तरुण कौशल (राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित)
गांव हरियोली के तरुण कौशल ने अपन जीवन समाजसेवा में ही लगा रखा है। मकसद सिर्फ युवाओं को एकजुट कर समाज सेवा के लिए प्रेरित करना है। एसडी कालेज से शुरू किया गया सफर आज भी जारी है। इन्हीं सेवाओं के लिए तरुण कौशल को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार के साथ सम्मानित भी किया गया। नेहरू युवा केंद्र, जिला युवा विकास संगठन, संकल्प उठाओ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़कर उन्होंने युवाओं का ऐसा ग्रुप तैयार किया है, जो हमेशा ही सामाजिक कार्यों के लिए तत्पर है। यह ग्रुप पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान शिविर, बेटियों के प्रति जागरुकता सहित अन्य सामाजिक मुद्दों पर युवाओं को साथ लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कालेज में एनएसएस के सामाजिक कार्यों ने इतना प्रभावित किया कि सोच लिया सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए जीवन में कुछ करना है। समाज के प्रति काम करने की लगन ही रही कि वे करीब 48 बार रक्तदान भी कर चुके हैं। जिला अंबाला में पहली बार गांव हरियोली में सामूहिक लोहड़ी मनाने का प्रयास किया और आज यह सिलसिला काफी बढ़ चुका है और लोग इस त्योहार को बेटियों के लिए समर्पित कर चुके हैं। उनको राष्ट्रीय युवा पुरस्कार, पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन अवार्ड, हरियाणा प्राइड अवार्ड, राजीव गांधी समरसता अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से भी सम्मानित किया गया है।
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‘भगत है आज भी जिंदा वतन के इन युवाओं में... महक शेखर की भी फैली हुई है इन फिजाओं में... अंधेरे को मिटाना काम है क्या सिर्फ सूरज का... जल रहा है दिया कोई आज भी इन हवाओं में.......अनामिका वालिया (युवा कवि)’
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
कहते हैं कि युवा किसी भी देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का दम रखते हैं। युवा चाहे तो अपने जोश और जज्बे से बड़ी से बड़ी चुनौती का भी सामना कर सकते हैं। ऐसा ही ऊर्जावान अंबाला का युवा वर्ग हैं जिन्होंने भले की छोटी सी शुरूआत की हो, लेकिन इरादा बड़ा रहा है। कम उम्र में बड़ी बुलंदियां छूने वाले युवा वर्ग के संघर्ष की कहानी को आज युवा दिवस पर अमर उजाला अपने पाठकों के सामने लाया है। अंबाला में ऐसे कई युवा है जो अपने मेहनत व लगन से समाज को सकारात्मकता का संदेश देते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
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कला : यू टयूब चैनल पर लघु फिल्में बनाकर सामाजिक कुरीतियों पर कर रहे प्रहार
युवाओं के ग्रुप को वीआईपी प्रोडक्शंस का नाम दिया है जो सामाजिक सरोकारों से लोगों को जोड़कर उन्हें जागरुक करने का काम कर रहे हैं। ग्रुप के युवा सदस्य बिल्कुल साधारण परिवारों से हैं। इस ग्रुप में विंशुल छात्र हैं और वीआईपी प्रोडक्शन के फाउंडर भी। इनके अलावा ग्रुप में नील माधव शर्मा हैं जो पेशे से वेडिंग फोटोग्राफर हैं और ग्रुप में एडिटिंग की जिम्मेदारी इनके पास हैं। अपूर्व अरोड़ा इस ग्रुप के एकमात्र एनआरआई सदस्य हैं जो अमेरिका के न्यूयार्क में फिल्म प्रोडक्शन की पढ़ाई करने के साथ साथ एडवाइजर और मार्गदर्शक की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। यू ट्यूब पर अपलोड की जाने वाली लघु फिल्म का थीम क्या होगा इस बात को ग्रुप की राइटर और एक मात्र महिला सदस्य साक्षी अनेजा तय करती हैं। इसके अलावा 11वीं कक्षा में पढ़ रहा जयविन अजमानी प्रोडक्शन इंचार्ज हैं तो 12वीं में पढ़ने वाला मनहर जोशी इस पूरी पटकथा का कांसेप्ट एडिटर है। ग्रुप सोशल मीडिया और इंटरनेट को हथियार बनाकर सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हैं। पिछले साल 14 नवंबर चिल्ड्रंस डे पर द शू वोन्ट फिट नाम से एक फिल्म बनाकर यू ट्यूब पर डाली गई थी जिसमें उन युवाओं की मानसिकता को दिखाया गया है जो अपना कैरियर बनाना तो किसी और फील्ड में चाहते हैं परंतु मजबूरन उन्हें अपने परिवार और समाज के दबाव में कोई और काम करना पड़ रहा है। एक छोटा सा प्रयास इस फिल्म के जरिए किया गया तो काफी हिट रहा। प्वाइंट 5 के नाम से एक फिल्म बनाई है जिसमें दिखाया गया है कि कम ससाधनों में रहकर भी प्रतिभावान युवा अच्छे खासे और साधन संपन्न लोगों को कैसे मात दे सकते हैं।
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साहित्य : स्कूल में अंग्रेजी की टीचर, मगर जुनून कविताओं का
बलदेव नगर स्थित राजकीय स्कूल में अंग्रेजी की टीचर अनामिका वालिया को कविताओं का जुनून है। देशभक्ति, बेटियां, सैनिकों व अन्य विषयों पर वह कविता पाठ करती हैं। अब तक उनका एक काव्य संग्रह ‘एक और इंकलाब’ प्रकाशित हो चुका है जबकि दूसरा भी आने वाला है। वह कई टीवी चैनल शो में कविता पाठ कर चुकी है जबकि विभिन्न राज्यों में बड़े कवि सम्मेलनों में वह सक्रिय रूप से हिस्सा ले चुकी है। युवा कवित्री अनामिका के नाना स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्हीं से उसे देशभक्ति पर आधारित कविताएं लिखने की प्रेरणा मिली। वर्ष 2012 में उसने अपना यह सफर आरंभ किया था, रात्रि सपना आया कि वह तिरंगे पर कविता लिख रही है, बस यहीं से उनका सफर मंजिल की ओर आगे बढ़ गया जोकि आज भी जारी है। अनामिका समय-समय पर महिला अत्याचारों पर होने वाली दुखद घटनाओं पर भी कविता के माध्यम से कटाक्ष करती है जबकि सैनिकों को समर्पित अब तक वह कई कविताएं लिख चुकी हैं।
तकनीक : वाटरमैन के बेटे ने बनाया रेल हादसे रोकने वाला सिस्टम
अंबाला के साहा खंड के गांव पसियाला के रहने वाले बलराम सिंह सैनी आर्ट्स संकाय से ग्रेजुएवेट हैं और इंजीनियरिंग से दूर दूर तक उनका कोई सरोकार नहीं रहा। परंतु अब वह अपने अविष्कारों से बड़े बड़े शोधकर्ताओं को हैरानी में डाल रहे हैं। बलराम ने लगभग 6 महीने पहले रेलवे के लिए ऐसा सिस्टम तैयार किया जो रेल पटरियों के साथ छेडख़ानी होते ही अलार्म बजाकर रेलवे के अधिकारियों के मोबाइल पर अलर्ट एसएमएस भेज देगा। इस बारे में बलराम रेल अधिकारियों से मुलाकात भी कर चुका है। इसके अलावा उसने कई अन्य साइंस मॉडल तैयार कर अपना तकनीकी क्षमता का बखूबी प्रदर्शन किया है। बलराम सैनी बताते हैं उनके पिता रेलवे में वाटरमैन थे इसलिए हमेशा से ही रेलवे से लगाव रहा। ग्रेज्युेशन भले ही आर्टस से की हो परंतु तकनीक में शुरू से रूचि रही। कई अविष्कार किए जो रेलवे के काम आ सकते हैं। उनकी साहा में छोटी सी वर्कशाप है जिसमें तीन लोग काम करते हैं। बलराम सैनी बताते हैं 2005 से लेकर 2010 तक वह अपने गांव के सरपंच भी रहे परंतु राजनीति में रहते हुए लोगों के लिए कुछ ज्यादा नहीं कर सके। कभी कभी तो ऐसा लगता है कि राजनीति में जाकर समय खराब कर दिया। यदि यहां पर शोध पर और वक्त दिया जाता तो काफी कुछ और किया जा सकता था।
फैशन : ढाई हजार में करती थी काऊंसलर की नौकरी आज चलाती हैं अपना फैशन इंस्टीट्यूट
अंबाला में जब भी नए ट्रैंड और फैशन की बात होती है तो अंबाला की फैशन आईकान वंदना सहगल कोछर का चेहरा जहन में आता है। साधारण परिवार से निकली वंदना कोछर ने अपनी मेहनत और लग्न से देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है। युवा महिला फैशन डिजाइनर वंदना की कामयाबी की चकाचौंध के पीछे उनका कड़ा संघर्ष रहा है। वंदना के पिता सेना में थे। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वंदना ने दिल्ली से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और अंबाला आ गईं। दिल्ली जैसे बड़े शहर में अच्छी सैलरी के आफर ठुकराकर अंबाला आईं वंदना ने एनआईएफडी इंस्टीट्यूट ज्वाइन कर लिया। वंदना बताती हैं कि उनकी ज्वाइनिंग मात्र ढाई हजार रुपये की सैलरी पर हुई। खूब मेहनत की, नौकरी के साथ साथ पार्ट टाइम बूटीक्स के लिए काम भी करती थी। मगर बाद में मेहनत व लग्न से आगे बढ़ते हुए उन्होंने आईएनआईएफडी की स्वयं की फ्रेंचाइजी ली। मात्र 15 बच्चों के साथ सेंटर शुरू किया और एक ही साल में इन विद्यार्थियों की संख्या 65 की हो गई। आज यह आंकड़ा सैंकड़ों छू गया है। फैशन डिजाइनिंग सेंटर चलाने के साथ साथ वंदना सामाजिक सरोकारों में भी खूब बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
समाजसेवा : मानसेवा के लिए दिन रात तत्पर रहते हैं युवा :
मानवता की सेवा के लिए अंबाला में युवाओं का दल मनुखता दी सेवा सोसाइटी के नाम से काम कर रहा है। सोसाइटी का मुख्य मकसद बेघर और बेसहारा बुजुर्गों की सेवा करने का है। मनुखता दी सेवा सोसाइटी के सदस्यों ने बस अड्डों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक पर अपने नंबर दर्ज करवाए हुए हैं साथ ही अन्य लोगों के साथ भी इनका नेटवर्क है जो इन्हें सूचना देता है। सोसाइटी के सदस्य मंदीप सिंह कोड़वा बताते हैं कि अंबाला में लगभग 15 युवाओं का दल इस सोसाइटी के साथ जुड़ा है जिसनें सैकड़ों बुजुर्गों को इलाज और छत मुहैया करवाकर सोसाइटी के बनवाए गए शेल्टर हाउस में भेजते हैं। इसके अलावा इन लोगों के परिवारों का पता लगाकर उनके पास इन्हें भेजने के पर्याप्त इंतजाम भी करवाए जाते हैं। वीरवार को भी अंबाला कैंट के पुराने बस स्टैंड के पास से एक बुजुर्ग को सोसाइटी के सदस्यों ने सेवा मुहैया करवाई है। इसके अलावा घायल गाय और नंदी आदि की सेवा करने में भी सोसाइटी पीछे नहीं रहती।
खेल : दीपक सैनी, इंटरनेशनल पैरा शूटर (शूटिंग गेम्स)
घर की दीवार पर टारगेट लगाकर एक गन से निशाना लगाने से हुई शुरुआत आज इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच चुकी है। अंबाला के शाहपुर के रहने वाले दीपक सैनी ने कभी हार नहीं मानी और तमाम मुश्किलों के बावजूद एक छोटे से घर से निकलकर अपनी शूटिंग का ऐसा लोहा मनवाया कि इंटरनेशनल लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व किया। इस मुकाम तक पहुंचने में दीपक को करीब आठ साल लगे हैं। वह एयर राइफल, पिस्टल, प्रोन (लेटकर निशाना लगाना) में चैंपियन हैं। साल 2011 से लेकर 2017 तक वे नेशनल लेवल पर चैंपियन रहे। साल 2017 में बैंकाक में हुई वर्ल्ड कप शूटिंग प्रतियोगिता में उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीता। अब साल 2018 में वे यूएई में मार्च माह में होने वाले वर्ल्ड कप शूटिंग चैपियनशिप, एक से बारह मई तक साउथ कोरिया में होने वाली शूटिंग चैपियनशिप में भारत के प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने बताया कि साल 2011 के बाद से कईं मुकाम ऐसे आए कि एक बार तो इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में जाने के लिए टिकट के खर्च का बंदोबस्त ही नहीं हो रहा था। लेकिन अचानक सारे रास्ते खुले और वे इंटरनेशनल प्रतियोगिता में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उनका टारगेट पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है, जिसके लिए पैक्टिस जारी है। उन्होंने इसी बीच अंबाला कैंट में अपनी शूटिंग रेंज भी तैयार की है, जहां पर प्रदेश भर से शूटिंग गेम के खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं।
तरुण कौशल (राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित)
गांव हरियोली के तरुण कौशल ने अपन जीवन समाजसेवा में ही लगा रखा है। मकसद सिर्फ युवाओं को एकजुट कर समाज सेवा के लिए प्रेरित करना है। एसडी कालेज से शुरू किया गया सफर आज भी जारी है। इन्हीं सेवाओं के लिए तरुण कौशल को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार के साथ सम्मानित भी किया गया। नेहरू युवा केंद्र, जिला युवा विकास संगठन, संकल्प उठाओ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जुड़कर उन्होंने युवाओं का ऐसा ग्रुप तैयार किया है, जो हमेशा ही सामाजिक कार्यों के लिए तत्पर है। यह ग्रुप पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान शिविर, बेटियों के प्रति जागरुकता सहित अन्य सामाजिक मुद्दों पर युवाओं को साथ लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कालेज में एनएसएस के सामाजिक कार्यों ने इतना प्रभावित किया कि सोच लिया सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए जीवन में कुछ करना है। समाज के प्रति काम करने की लगन ही रही कि वे करीब 48 बार रक्तदान भी कर चुके हैं। जिला अंबाला में पहली बार गांव हरियोली में सामूहिक लोहड़ी मनाने का प्रयास किया और आज यह सिलसिला काफी बढ़ चुका है और लोग इस त्योहार को बेटियों के लिए समर्पित कर चुके हैं। उनको राष्ट्रीय युवा पुरस्कार, पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन अवार्ड, हरियाणा प्राइड अवार्ड, राजीव गांधी समरसता अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से भी सम्मानित किया गया है।