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Ambala News: अंबाला डिपो के 700 कर्मचारियों को 18 माह से भत्तों का इंतजार
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कर्मचारी बोले- दो साल से खुद के खर्च पर वर्दी और जूते खरीद रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला डिपो में कार्यरत 700 रोडवेज कर्मचारी उपेक्षा और आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं। ये कर्मचारी बस संचालन से लेकर मरम्मत तक का जिम्मा संभालते हैं। कर्मचारियों को लंबे समय से भत्तों का भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों को रात की ड्यूटी का भत्ता नहीं मिला है। दो साल से कर्मचारी अपनी जेब से वर्दी और जूते खरीद रहे हैं, क्योंकि विभाग ने इसका भत्ता जारी नहीं किया है। वर्दी भत्ता चार महीने पहले तक यह वेतन के साथ मिलता था, लेकिन अब इसे अचानक बंद कर दिया गया है। पिछले 11 सालों से कर्मचारियों को दिवाली बोनस के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया गया है। बच्चों को मिलने वाला शिक्षा भत्ता भी कम दिया जा रहा है, और वर्ष 2025 के मार्च-अप्रैल के भत्ते भी अभी तक लंबित हैं।
तकनीकी कारणों का दिया जाता है हवाला
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के राज्य महासचिव जयबीर घनघस ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर डिपो महाप्रबंधक से लेकर महानिदेशक, एसीएस और यहां तक कि परिवहन मंत्री तक से मिल चुके हैं। अधिकारियों की ओर से बजट की कमी या तकनीकी कारणों का हवाला दिया जाता है, जबकि कर्मचारी दिन-रात बसों के सुचारू संचालन में जुटे हैं।
धरना-प्रदर्शन भी किए
डिपो प्रधान रमेश श्योकंद ने बताया कि मांगों को लेकर कई बार नोटिस दिए गए। धरना-प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। अधिकारियों से लेकर मंत्री तक कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन परिणाम कुछ नहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला डिपो में कार्यरत 700 रोडवेज कर्मचारी उपेक्षा और आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं। ये कर्मचारी बस संचालन से लेकर मरम्मत तक का जिम्मा संभालते हैं। कर्मचारियों को लंबे समय से भत्तों का भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों को रात की ड्यूटी का भत्ता नहीं मिला है। दो साल से कर्मचारी अपनी जेब से वर्दी और जूते खरीद रहे हैं, क्योंकि विभाग ने इसका भत्ता जारी नहीं किया है। वर्दी भत्ता चार महीने पहले तक यह वेतन के साथ मिलता था, लेकिन अब इसे अचानक बंद कर दिया गया है। पिछले 11 सालों से कर्मचारियों को दिवाली बोनस के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया गया है। बच्चों को मिलने वाला शिक्षा भत्ता भी कम दिया जा रहा है, और वर्ष 2025 के मार्च-अप्रैल के भत्ते भी अभी तक लंबित हैं।
तकनीकी कारणों का दिया जाता है हवाला
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के राज्य महासचिव जयबीर घनघस ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर डिपो महाप्रबंधक से लेकर महानिदेशक, एसीएस और यहां तक कि परिवहन मंत्री तक से मिल चुके हैं। अधिकारियों की ओर से बजट की कमी या तकनीकी कारणों का हवाला दिया जाता है, जबकि कर्मचारी दिन-रात बसों के सुचारू संचालन में जुटे हैं।
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धरना-प्रदर्शन भी किए
डिपो प्रधान रमेश श्योकंद ने बताया कि मांगों को लेकर कई बार नोटिस दिए गए। धरना-प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। अधिकारियों से लेकर मंत्री तक कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन परिणाम कुछ नहीं।
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