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ताईवान रेलवे टीम ने निरीक्षण किया कालका-शिमला रेलमार्ग का
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:07 AM IST
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टूरिज्म को बढ़ावा देने एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण कार्य को जाना रेलवे टीम ने
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। ताईवान से आई आठ सदस्यीय रेलवे टीम ने ऐतिहासिक धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग का वीरवार को निरीक्षण किया। 96.6 किलोमीटर नैरोगेज के इस रेलमार्ग पर ताईवान की टीम ने निरीक्षण करते हुए कई पहलुओं पर अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों के साथ चर्चा की। टीम के इस रेलमार्ग पर निरीक्षण का मकसद आपसी टूरिज्म को बढ़ावा देना और ऐतिहासिक धरोहर में शामिल रेलमार्ग का संरक्षण भारतीय रेलवे कैसे करती है, इसको जानना था। टीम ने रेलमार्ग पर कालका के अलावा बड़ौग और शिमला स्टेशन का भी जायजा लिया।
ताईवान की आठ सदस्यीय टीम में रेलवे के पुरुष और महिला अधिकारी शामिल थे, उनके साथ अंबाला रेल मंडल के एडीआरएम कुलदीप सिंह व विभिन्न ब्रांच अधिकारी मौजूद रहे। रेल मंडल अधिकारियों ने टीम को रेलमार्ग के संबंध में पूरी जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि रेलमार्ग किन परिस्थितियों में और कब बना था। इसके अलावा नैरोगेज रेलमार्ग पर रेल परिचालन इस प्रकार से किया जाता है। यहां विभिन्न स्टेशनों पर आज भी पुरानी वस्तुओं को दर्शाया गया है जिस कारण पर्यटक इस ओर खासे आकर्षित होते हैं। रेलमार्ग पर स्थित विभिन्न ब्रिज की भी जानकारी दी गई जोकि बिना किसी लोहे के बीम से बनाए गए हैं। यात्रियों एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए चलाई जाने वाली ट्रेनों के बारे भी इस दौरान जानकारी दी गई। ताईवान टीम को समय-समय पर रेलमार्ग पर किए गए अपग्रेडेशन कार्य की भी जानकारी दी गई। बता दें कि भारतीय रेलवे एवं ताईवान रेलवे के मध्य करार हुआ है और इसी के तहत दोनों देशों के रेल अधिकारी रेलवे की कार्य प्रणाली को जानने के लिए भ्रमण कर रहे हैं।
यह खासियत है कालका-शिमला रेलमार्ग की
कालका-शिमला रेलमार्ग का निर्माण 1898 से आरंभ हुआ था और यह 1903 में बनकर तैयार हुआ था। करीब 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 919 घुमाव हैं। अधिकतम 30 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर ट्रेन यहां चल सकती है। रेलमार्ग पर कुल 102 सुरंग हैं जिनमें सबसे बड़ी सुरंग करीब एक किमी लंबी है जबकि रेलमार्ग पर 33 ब्रिज हैं। रेलमार्ग पर कुल 18 स्टेशन हैं। कालका से शिमला का सफर सवा चार घंटे से लेकर अधिक साढ़े पांच घंटे विभिन्न ट्रेनों में है। बीच मार्ग में पहाड़ों की कई सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं। रेलवे द्वारा सामान्य ट्रेन से लेकर शिवालिक एक्सप्रेस, रेल मोटर कार व अन्य ट्रेनों का संचालक इस ट्रैक पर किया जाता है।
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कोट्स
ताईवान रेलवे की आठ सदस्यीय टीम ने वीरवार को कालका-शिमला रेलमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण में रेलमार्ग के ऐतिहासिक महत्व एवं संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई। दोनों देशों में आपसी टूरिज्म को बढ़ावा देने व रेलवे की कार्यप्रणाली की जानकारी को लेकर यह निरीक्षण किया गया।
-कुलदीप सिंह, एडीआरएम, अंबाला रेल मंडल।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। ताईवान से आई आठ सदस्यीय रेलवे टीम ने ऐतिहासिक धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग का वीरवार को निरीक्षण किया। 96.6 किलोमीटर नैरोगेज के इस रेलमार्ग पर ताईवान की टीम ने निरीक्षण करते हुए कई पहलुओं पर अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों के साथ चर्चा की। टीम के इस रेलमार्ग पर निरीक्षण का मकसद आपसी टूरिज्म को बढ़ावा देना और ऐतिहासिक धरोहर में शामिल रेलमार्ग का संरक्षण भारतीय रेलवे कैसे करती है, इसको जानना था। टीम ने रेलमार्ग पर कालका के अलावा बड़ौग और शिमला स्टेशन का भी जायजा लिया।
ताईवान की आठ सदस्यीय टीम में रेलवे के पुरुष और महिला अधिकारी शामिल थे, उनके साथ अंबाला रेल मंडल के एडीआरएम कुलदीप सिंह व विभिन्न ब्रांच अधिकारी मौजूद रहे। रेल मंडल अधिकारियों ने टीम को रेलमार्ग के संबंध में पूरी जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि रेलमार्ग किन परिस्थितियों में और कब बना था। इसके अलावा नैरोगेज रेलमार्ग पर रेल परिचालन इस प्रकार से किया जाता है। यहां विभिन्न स्टेशनों पर आज भी पुरानी वस्तुओं को दर्शाया गया है जिस कारण पर्यटक इस ओर खासे आकर्षित होते हैं। रेलमार्ग पर स्थित विभिन्न ब्रिज की भी जानकारी दी गई जोकि बिना किसी लोहे के बीम से बनाए गए हैं। यात्रियों एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए चलाई जाने वाली ट्रेनों के बारे भी इस दौरान जानकारी दी गई। ताईवान टीम को समय-समय पर रेलमार्ग पर किए गए अपग्रेडेशन कार्य की भी जानकारी दी गई। बता दें कि भारतीय रेलवे एवं ताईवान रेलवे के मध्य करार हुआ है और इसी के तहत दोनों देशों के रेल अधिकारी रेलवे की कार्य प्रणाली को जानने के लिए भ्रमण कर रहे हैं।
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यह खासियत है कालका-शिमला रेलमार्ग की
कालका-शिमला रेलमार्ग का निर्माण 1898 से आरंभ हुआ था और यह 1903 में बनकर तैयार हुआ था। करीब 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 919 घुमाव हैं। अधिकतम 30 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर ट्रेन यहां चल सकती है। रेलमार्ग पर कुल 102 सुरंग हैं जिनमें सबसे बड़ी सुरंग करीब एक किमी लंबी है जबकि रेलमार्ग पर 33 ब्रिज हैं। रेलमार्ग पर कुल 18 स्टेशन हैं। कालका से शिमला का सफर सवा चार घंटे से लेकर अधिक साढ़े पांच घंटे विभिन्न ट्रेनों में है। बीच मार्ग में पहाड़ों की कई सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं। रेलवे द्वारा सामान्य ट्रेन से लेकर शिवालिक एक्सप्रेस, रेल मोटर कार व अन्य ट्रेनों का संचालक इस ट्रैक पर किया जाता है।
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ताईवान रेलवे की आठ सदस्यीय टीम ने वीरवार को कालका-शिमला रेलमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण में रेलमार्ग के ऐतिहासिक महत्व एवं संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई। दोनों देशों में आपसी टूरिज्म को बढ़ावा देने व रेलवे की कार्यप्रणाली की जानकारी को लेकर यह निरीक्षण किया गया।
-कुलदीप सिंह, एडीआरएम, अंबाला रेल मंडल।