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कैसे खेलेंगे खिलाड़ी, मैदान ही हैं खस्ताहाल, दूर हो रहे खिलाड़ी
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:54 AM IST
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खेलों से दूर हो रहे खिलाड़ी, कैंट के दो बड़े मैदानों की हालत खस्ता
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। मैदान जहां कभी खेलने के लिए युवा जुटते थे, अब खस्ताहाल हो चुके हैं। इन मैदानों की हालत ऐसी है कि खेलना तो दूर मैदान में चलना भी मुश्किल है। हालात यह हैं कि कैंट के गांधी मैदान में हॉकी खिलाड़ियों के लिए की गई ग्राउंड की वैकल्पिक व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी है। दूसरी ओर स्कूल व कालेजों के पास अपने मैदान हैं, लेकिन इनमें अन्य को एंट्री नहीं है। कई स्कूल तो ऐसे हैं, जिनके पास अपना खेल का मैदान तक नहीं है।
यह है स्थिति
जिन खेल मैदानों में कभी गेम्स के लिए युवाओं की भीड़ जुटती थी, वह मैदान अब बदतर हालत में पहुंच चुके हैं। अंबाला कैंट का गांधी मैदान कई सालों से खस्ताहाल में पड़ा है, जबकि यहां अब युवा गेम्स के लिए जुटते ही नहीं हैं। मैदान में अब कीचड़ और गंदगी के अलावा कुछ नहीं बचा। दूसरा मंडे मार्केट को यह जगह देने के बाद यहां गंदगी का आलम काफी अधिक है। इसी मैदान में हॉकी के लिए वैकल्पिक तौर पर ग्राउंड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि हॉकी की प्रेक्टिस बंद हो चुकी है। इसके अलावा कैंट के रामबाग रोड स्थित दशहरा मैदान भी खस्ताहाल में है। दूसरी ओर गांवों में बने खंड स्तरीय स्टेडियम भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि डीसी ने इसके रखरखाव आदि को लेकर रिपोर्ट मांगी है, जबकि काफी लंबे समय से इनमें भी खेल गतिविधियां न के बराबर हैं।
यह कहते हैं लोग
इंडोर गेम्स की तो अंबाला में व्यवस्था है, लेकिन मैदान अब नहीं मिलते। जो भी मैदान हैं, वह खस्ताहालत में हैं। कभी कैंट के गांधी मैदान में खेलने के लिए दोस्तों के साथ जाते थे, लेकिन अब तो इस मैदान की हालत ही खराब हो चुकी है।
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-लक्ष्यवीर, बैडमिंटन प्लेयर।
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कई स्कूल ऐसे हैं, जिनमें खेल का मैदान नहीं है। ऐसे स्कूलों के बच्चे अन्य स्कूल में जाते हैं या फिर मैदान तलाशते हैं। अब पता नहीं कैंट का सबसे बड़ा गांधी मैदान की ओर प्रशासन क्यों ध्यान नहीं देता, जबकि इसी मैदान में कभी अच्छी खेल प्रतियोगिताएं भी हुई हैं।
-सोहन लाल, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता।
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कैंट हो या फिर अंबाला सिटी दोनों ही जगहों पर मैदानों की कमी है। सिटी में दो जगह तो हैं, लेकिन कैंट में सिर्फ वार हीरोज स्टेडियम है, जो फिलहाल अपग्रेडेशन में है। सिर्फ एसडी कालेज के सामने सेना का मैदान है, जहां पर गेम खेलने युवा आते हैं, जबकि ब्लाक लेवल स्टेडियम की तो हालत किसी से छिपी नहीं है।
-अमित गोयल, युवा।
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किशोरावस्था या फिर युवा अवस्था में फिजिकल फिटनेस जरूरी है। अब तो मैदान हैं नहीं या फिर इनका रखरखाव नहीं है। इसी कारण से युवा व किशोर मैदानी खेलों से दूर हो रहे हैं, जो काफी गंभीर है।
-डा. डीएस गोयल, एमडी मेडिसन।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। मैदान जहां कभी खेलने के लिए युवा जुटते थे, अब खस्ताहाल हो चुके हैं। इन मैदानों की हालत ऐसी है कि खेलना तो दूर मैदान में चलना भी मुश्किल है। हालात यह हैं कि कैंट के गांधी मैदान में हॉकी खिलाड़ियों के लिए की गई ग्राउंड की वैकल्पिक व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी है। दूसरी ओर स्कूल व कालेजों के पास अपने मैदान हैं, लेकिन इनमें अन्य को एंट्री नहीं है। कई स्कूल तो ऐसे हैं, जिनके पास अपना खेल का मैदान तक नहीं है।
यह है स्थिति
जिन खेल मैदानों में कभी गेम्स के लिए युवाओं की भीड़ जुटती थी, वह मैदान अब बदतर हालत में पहुंच चुके हैं। अंबाला कैंट का गांधी मैदान कई सालों से खस्ताहाल में पड़ा है, जबकि यहां अब युवा गेम्स के लिए जुटते ही नहीं हैं। मैदान में अब कीचड़ और गंदगी के अलावा कुछ नहीं बचा। दूसरा मंडे मार्केट को यह जगह देने के बाद यहां गंदगी का आलम काफी अधिक है। इसी मैदान में हॉकी के लिए वैकल्पिक तौर पर ग्राउंड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि हॉकी की प्रेक्टिस बंद हो चुकी है। इसके अलावा कैंट के रामबाग रोड स्थित दशहरा मैदान भी खस्ताहाल में है। दूसरी ओर गांवों में बने खंड स्तरीय स्टेडियम भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि डीसी ने इसके रखरखाव आदि को लेकर रिपोर्ट मांगी है, जबकि काफी लंबे समय से इनमें भी खेल गतिविधियां न के बराबर हैं।
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यह कहते हैं लोग
इंडोर गेम्स की तो अंबाला में व्यवस्था है, लेकिन मैदान अब नहीं मिलते। जो भी मैदान हैं, वह खस्ताहालत में हैं। कभी कैंट के गांधी मैदान में खेलने के लिए दोस्तों के साथ जाते थे, लेकिन अब तो इस मैदान की हालत ही खराब हो चुकी है।
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-लक्ष्यवीर, बैडमिंटन प्लेयर।
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कई स्कूल ऐसे हैं, जिनमें खेल का मैदान नहीं है। ऐसे स्कूलों के बच्चे अन्य स्कूल में जाते हैं या फिर मैदान तलाशते हैं। अब पता नहीं कैंट का सबसे बड़ा गांधी मैदान की ओर प्रशासन क्यों ध्यान नहीं देता, जबकि इसी मैदान में कभी अच्छी खेल प्रतियोगिताएं भी हुई हैं।
-सोहन लाल, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता।
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कैंट हो या फिर अंबाला सिटी दोनों ही जगहों पर मैदानों की कमी है। सिटी में दो जगह तो हैं, लेकिन कैंट में सिर्फ वार हीरोज स्टेडियम है, जो फिलहाल अपग्रेडेशन में है। सिर्फ एसडी कालेज के सामने सेना का मैदान है, जहां पर गेम खेलने युवा आते हैं, जबकि ब्लाक लेवल स्टेडियम की तो हालत किसी से छिपी नहीं है।
-अमित गोयल, युवा।
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किशोरावस्था या फिर युवा अवस्था में फिजिकल फिटनेस जरूरी है। अब तो मैदान हैं नहीं या फिर इनका रखरखाव नहीं है। इसी कारण से युवा व किशोर मैदानी खेलों से दूर हो रहे हैं, जो काफी गंभीर है।
-डा. डीएस गोयल, एमडी मेडिसन।