फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   परिषद बना तो ईओ के जिम्मे होगी शहर की व्यवस्था

परिषद बना तो ईओ के जिम्मे होगी शहर की व्यवस्था

Fri, 19 Jan 2018 01:09 AM IST
Updated Fri, 19 Jan 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
परिषद बना तो ईओ के जिम्मे होगी शहर की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

अंबाला कैंट।
सरकार द्वारा अंबाला नगर निगम को भंग करने का निर्णय कभी भी लिया जा सकता है। यदि नगर निगम भंग होता है तो नगर पषिद में शहर की व्यवस्था एक बार फिर से ईओ के हाथों में होगी। निगम भंग करने पर सरकार की मुहर लगभग लग चुकी है। ऐसे में अंबाला नगर निगम कार्यालय में तैनात अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों को अपने भविष्य की चिंता भी सता रही है।
यही वजह है कि अब ज्यादातर कार्यों को तेजी से निपटाने में कोई दिलचस्पी भी नहीं दिखाई जा रही है। नगर परिषद का गठन हुआ तो अंबाला में फिर से 60 से अधिक वार्ड होने तय हैं। इसका पूरा खाका प्रशासन द्वारा नगर निगम भंग होता है तो अंबाला में फिर से पुरानी व्यवस्था लौटेगी। इसको लेकर प्रशासन द्वारा खाका तैयार कर लिया गया है। पूरी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा चुकी है।
विज्ञापन

सूत्र की मानें तो अंबाला सिटी और कैंट में 63 वार्ड हो सकते हैं। हालांकि खाका तैयार है, मगर अधिकारी कुछ भी स्पष्ट नहीं बोल रहे हैं। निगम भंग हुआ तो सबसे अधिक लाभ उन 26 गांव के लोगों को होगा जोकि निगम में शामिल होकर खुश नहीं थे और पंचायती व्यवस्था के ही पक्षधर हैं। बता दें कि इससे पहले वर्ष 2016 में भी अंबाला-पंचकूला पुलिस कमिश्नर को सरकार द्वारा भंग किया जा चुका हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


1966 से 2010 तक रहा थी नगर परिषद
कैंटोनमेंट बोर्ड से अलग होने के बाद साल 1966 में अंबाला नगर परिषद अस्तित्व में आई थी। सिटी व कैंट में अलग-अलग नगर परिषद बनाई गई थी। ट्विन सिटी में कुल 62 वार्ड थे। मगर पूर्व सरकार द्वारा 2010 में नगर निगम गठन की घोषणा की गई, इसके बाद 2013 में पहली बार निगम के चुनाव हुए थे। मगर अब गठन के आठ वर्ष बाद नगर निगम फिर से भंग होने के कागार पर है।

गठन का प्रारूप तैयार
बता दें कि मंडल आयुक्त की निगरानी में जिला प्रशासन द्वारा रिपोर्ट तैयार की गई थी जिसके बाद इसे मुख्यालय को भेजा गया था। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि नगर परिषद का गठन किया गया तो इसका प्रारूप क्या-क्या होना चाहिए। रिपोर्ट निगम अधिकारियों के नेतृत्व में तैयार की गई थी।

ये प्रोजेक्ट हो सकते हैं प्रभावित
- नगर द्वारा इस समय अंबाला में कई बड़े प्रोजेक्ट क्रियांवित किए जा रहे हैं और यदि निगम भंग होता है तो इन प्रोजेक्ट पर इनका खासा असर पड़ सकता है।
- कैंट के सुभाष पार्क के नजदीक चार करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर का बैडमिंटन हाल का निर्माण अंतिम चरण में है।
- अंबाला को क्लीन बनाने के लिए कूड़े से बिजली बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जिस पर काम किया जा रहा है।
- पटवी प्लांट में स्थापित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत कचरे से बिजली बनेगी। पहले यहां पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट वर्ष 2010 में स्थापित हुआ था, मगर वह अब बंद है। अब 2018 में सरकार इस प्लांट पर नया दांव लगाने जा रही है।
- अंबाला को साफ सुथरा बनाने के लिए मिशन ओए शुरू किया गया, जिस में 90 दिनों में स्वच्छता का लक्ष्य हासिल करना था। इस मिशन पर एक करोड़ रुपया लगाया गया। यदि निगम भंग हुआ तो यह पूरा प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है और स्वच्छता सर्वेक्षण आगामी दिनों में होने वाला है, जिस पर असर पड़ने की संभावना है।
- इसके अलावा 18 करोड़ रुपये की लागत से सुभाष पार्क के सौंदर्यकरण की योजना है। यहां झील निर्माण के साथ-साथ लोगों को वाकिंग, झूले व्यायाम, बोटिंग व अन्य सुविधा मिलेगी। सिटी में भी महावीर पार्क का कायाकल्प किया जा रहा है।


वर्जन
नगर निगम भंग होने के संबंध में अभी सरकार द्वारा निर्णय लिया जाना है। नगर परिषद का प्रारूप क्या होगा। इस पर अभी कुछ तय नहीं है। सरकार यदि कोई निर्णय लेगी तो इसके उपरांत ही कुछ तय किया जाएगा।
- सत्येंद्र दुहन, कमिश्नर, नगर निगम, अंबाला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed