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- परिवार नियोजन हेतू महिलाओं की नलबंदी आप्रेशन में सामने आई बड़ी लापरवाही
Updated Mon, 19 Jun 2017 12:06 AM IST
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अस्पताल में स्ट्रेचर की जगह मिलती है दरी और चादर
अंबाला कैंट। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के शहर में उपचार देने के नाम पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। परिवार नियोजन के तहत ऑपरेशन के लिए आईं महिलाओं को फर्श पर लिटा दिया गया। मजबूरन महिलाएं बेहोशी ही हालत में अपनी बारी आने तक फर्श पर बिछी दरी पर ही लेती रही। जब उनका नंबर आया तो उनका ऑपरेशन किया गया।
अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में स्ट्रेचर की जबरदस्त किल्लत है। परिवार नियोजन के लिए नलबंदी ऑपरेशन के लिए महिलाओं को एनेस्थीसिया देकर ऑपरेशन थिएटर में ही दरी व चादर बिछाकर लिटा दिया गया। काफी समय तक ये महिलाएं बेसुध हालत में लेटी रहती हैं। इस दौरान न तो महिलाओं को स्ट्रेचर दिया जाता है और न ही उनकी सुध ली जाती है। जब इन महिलाओं की बारी आती है तो उनका ऑपरेशन किया जाता है।
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मरीजों की संख्या नहीं संभाल पा रहा स्वास्थ्य विभाग
सिविल अस्पतालों व सीएचसी या पीएचसी में परिवार नियोजन ऑपरेशनों के लिए दिन तय किए गए हैं। इन दिनों में काफी संख्या में महिला मरीज सामने आ जाती हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के हाथ पांव फूल जाते हैं। सिविल अस्पताल में तो स्थिति और भी खराब है। बताया जाता है कि ज्यादा संख्या में मरीजों के आने के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है। अंबाला कैंट व सिटी अस्पताल में तो रोजाना भी ऑपरेशन होते हैं और एक स्पेशल कैंप का दिन भी निर्धारित किया गया है। अंबाला कैंट में स्पेशल कैंप हर शनिवार, नारायणगढ़ में मंगलवार, मुलाना में गुरुवार, अंबाला सिटी में सोमवार को होते हैं।
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ये है सरकार की योजना
दरअसल, सरकारी योजना के तहत महिलाओं के परिवार नियोजन के लिए नलबंदी की जाती है। इसके तहत विभिन्न गांवों और इलाकों में आशावर्करों के माध्यम से महिलाओं व पुरुषों को जागरूक किया जाता है। इच्छुक महिला व पुरुष सरकारी अस्पताल में पहुंचकर संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करवाते हैं। पूरी जांच पड़ताल के बाद ही अस्पताल में नलबंदी के लेप्रोस्कॉपी से ऑपरेशन किए जाते हैं।
अस्पतालों में परिवार नियोजन के कैंप के तहत महिला व पुरुषों के ऑपरेशन लेप्रोस्कॉपी से होते हैं। डॉक्टरों का मकसद मरीजों को संसाधनों के अनुसार बेहतर उपचार देना है। ऑपरेशन थिएटर में जगह की कमी होती है तो वहां पर स्ट्रेचर ज्यादा नहीं रखे जा सकते हैं। इन्हीं कारणों के कारण मरीजों को दरियों पर लिटाया जाता है ताकि किसी भी मरीजों को बिना उपचार के वापस न भेजा जाए।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ, अंबाला