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- राकेट की मोटर टेस्टिंग यूनिट में लगा है अंबाला में तैयार हुआ डिजिटल प्रोविंग रिंग
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:57 PM IST
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अंतरिक्ष में लॉन्च हुए कारटोसेट-2 में अंबाला के सांइस उद्योग का योगदान
अजय गोस्वामी
अंबाला कैंट। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने इतिहास रचते हुए 100वां सेटेलाइट लॉन्च कर दिया। पीएसएलवी श्रृंखला के सेटेलाइट कारटोसेट-2 है और इस सेटेलाइट को लॉन्च करने के इस ऐतिहासिक यज्ञ में अंबाला के साइंस जगत ने भी अपनी भागीदारी देकर अपनी पहचान बनाई है।
रॉकेट में लगा है अंबाला में तैयार किया गया डिजीटल प्रोविंग रिंग :
खास बात यह है कि राकेट लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की मोटर का परीक्षण करने वाला डिजिटल प्रोविंग रिंग अंबाला की साइंटिफिक इंडस्ट्री विशेषिका इलेक्ट्रोन डिवाइसिस के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। विशेषिका के एमडी डा. अनिल जैन ने बताया कि यह अंबाला के लिए गर्व और गौरव की बात है कि यहां के कारोबारियों को अपनी वस्तुओं द्वारा देश की सेवा का मौका मिल रहा है। डा. अनिल जैन ने बताया कि डिजीटल प्रोविंग रिंग का काम लांचिंग में बड़ा ही अहम होता है। यह लगभग पांच टन वजनी रिंग राकेट की मोटर के परीक्षण में लगाया जाता है जिससे पता लगता है कि यह मोटर रॉकेट को प्रक्षेपित करने के लिए कारगर है भी या नहीं। इसमें आई जरा सी खामी पूरे के पूरे रॉकेट के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है और मिशन खतरे में पड़ सकता है। इस बारीकी को साधने का गौरव अंबाला को प्राप्त हुआ है। अंबाला स्थित साइंस इंडस्ट्री में इसे बारीकी से तैयार कर आगे भेजा गया था जिसके बाद इसके कारगर परिणाम अब सामने आए हैं।
अंतरिक्ष से लेकर सेना के मिशनों में भी है भागीदारी :
विशेषिका इलेक्ट्रोन डिवाइसिस के एमडी डा. अनिल जैन बताते हैं उन्हें इससे पहले चंद्रयान, मिसाइल अग्नि-3 और अग्नि-5 के लिए उपकरण बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। अंतरिक्ष और सेना की बढ़ती ताकत देखकर काफी सुकून और खुशी का एहसास होता है जिसे शायद शब्दों में बयान भी न किया जा सके।
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शुक्रवार लॉन्च हुआ था उपग्रह
बता दें कि कारटोसेट-2 विशेष तौर पर एक मौसम उपग्रह है। यह 30 अन्य उपग्रहों के साथ शुक्रवार सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ। 44.4 मीटर लंबे राकेट पीएसएसवी-40 से लांच होने वाले इन उपग्रहों में कारटोसेट-2, भारत का एक नैनो सैटेलाइट, एक माइक्रो सैटेलाइट और 28 विदेशी उपग्रह शामिल हैं। विदेशी उपग्रहों में कनाडा, फिनलैंड, कोरिया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के 25 नैनो और तीन माइक्रो सेटेलाइट शामिल हैं।
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अजय गोस्वामी
अंबाला कैंट। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने इतिहास रचते हुए 100वां सेटेलाइट लॉन्च कर दिया। पीएसएलवी श्रृंखला के सेटेलाइट कारटोसेट-2 है और इस सेटेलाइट को लॉन्च करने के इस ऐतिहासिक यज्ञ में अंबाला के साइंस जगत ने भी अपनी भागीदारी देकर अपनी पहचान बनाई है।
रॉकेट में लगा है अंबाला में तैयार किया गया डिजीटल प्रोविंग रिंग :
खास बात यह है कि राकेट लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की मोटर का परीक्षण करने वाला डिजिटल प्रोविंग रिंग अंबाला की साइंटिफिक इंडस्ट्री विशेषिका इलेक्ट्रोन डिवाइसिस के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। विशेषिका के एमडी डा. अनिल जैन ने बताया कि यह अंबाला के लिए गर्व और गौरव की बात है कि यहां के कारोबारियों को अपनी वस्तुओं द्वारा देश की सेवा का मौका मिल रहा है। डा. अनिल जैन ने बताया कि डिजीटल प्रोविंग रिंग का काम लांचिंग में बड़ा ही अहम होता है। यह लगभग पांच टन वजनी रिंग राकेट की मोटर के परीक्षण में लगाया जाता है जिससे पता लगता है कि यह मोटर रॉकेट को प्रक्षेपित करने के लिए कारगर है भी या नहीं। इसमें आई जरा सी खामी पूरे के पूरे रॉकेट के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है और मिशन खतरे में पड़ सकता है। इस बारीकी को साधने का गौरव अंबाला को प्राप्त हुआ है। अंबाला स्थित साइंस इंडस्ट्री में इसे बारीकी से तैयार कर आगे भेजा गया था जिसके बाद इसके कारगर परिणाम अब सामने आए हैं।
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अंतरिक्ष से लेकर सेना के मिशनों में भी है भागीदारी :
विशेषिका इलेक्ट्रोन डिवाइसिस के एमडी डा. अनिल जैन बताते हैं उन्हें इससे पहले चंद्रयान, मिसाइल अग्नि-3 और अग्नि-5 के लिए उपकरण बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। अंतरिक्ष और सेना की बढ़ती ताकत देखकर काफी सुकून और खुशी का एहसास होता है जिसे शायद शब्दों में बयान भी न किया जा सके।
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शुक्रवार लॉन्च हुआ था उपग्रह
बता दें कि कारटोसेट-2 विशेष तौर पर एक मौसम उपग्रह है। यह 30 अन्य उपग्रहों के साथ शुक्रवार सुबह नौ बजकर 28 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ। 44.4 मीटर लंबे राकेट पीएसएसवी-40 से लांच होने वाले इन उपग्रहों में कारटोसेट-2, भारत का एक नैनो सैटेलाइट, एक माइक्रो सैटेलाइट और 28 विदेशी उपग्रह शामिल हैं। विदेशी उपग्रहों में कनाडा, फिनलैंड, कोरिया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के 25 नैनो और तीन माइक्रो सेटेलाइट शामिल हैं।