{"_id":"5bd4bf33bdec2204de7406b4","slug":"201540669235-ambala-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेना ने राज्य सरकार से मांगी 261 एकड़ जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेना ने राज्य सरकार से मांगी 261 एकड़ जमीन
Updated Sun, 28 Oct 2018 01:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोट : (24 अगस्त के लीड समाचार का ईपीएस भी इसमें लगा लें)
फोटो नंबर : 49
सेना ने राज्य सरकार से मांगी 261 एकड़ जमीन
मामला दुधला मंडी, माली परेड व अन्य क्षेत्रों में लीज की जमीन का
वेस्टर्न कमांड ने जिला प्रशासन को भेजा प्रपोजल
शनिवार को डीसी ने अधिकारियों के साथ किया लीज भूमि का दौरा
मंत्री विज ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से लगाई थी गुहार
जमीन हस्तांतरित हुई तो हजारों परिवार को होगा फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। रक्षा मंत्रालय द्वारा अंबाला सैन्य क्षेत्र में लीज भूमि को लेकर अब राज्य सरकार से जमीन की मांग की गई है। कुल 261 एकड़ जमीन राज्य सरकार यदि रक्षा मंत्रालय को उपलब्ध करा देती है तो लीज भूमि पर दशकों से बसे सैकड़ों परविारों के घर बच सकेंगे। शनिवार को इसी मामले को लेकर डीसी शरणदीप कौर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सैन्य क्षेत्र में लीज भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान बोर्ड के पार्षद भी मौजूद रहे। जमीन हस्तांतरण को लेेकर क्षेत्र के लोग उत्साहित हैं।
बता दें कि मंत्री अनिल विज ने रक्षा मंत्री के समक्ष यहां बसें परिवारों को उजड़ने से बचाने की मांग को उठाया था जिस पर अब कार्रवाई की जा रही है। सोमवार को वेस्टर्न कमांड मुख्यालय में इस मामले को लेकर बैठक भी है जिसमें जमीन के मुद्दे पर सेना एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच चर्चा होगी। प्रशासन को अब 261 एकड़ जमीन ढूंढनी होगी जोकि उन्हें रक्षा मंत्रालय को देनी होगी। उधर, बोर्ड उपाध्यक्ष अजय बवेजा ने कहा कि मंत्री विज के प्रयासों से यह संभव हो सका है और राज्य सरकार को जमीन सेना को उपलब्ध कराकर लोगों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।
कहां कितनी जमीन
रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सर्वे नंबर 65 में 198 एकड़ भूमि है। तोपखाना परेड व माली परेड में स्थित इस भूमि पर ब्रिटिश हुकूमत के समय से लोग यहां सब्जियों की खेती कर रहे हैं। 1941 में जमीन लीज पर दी गई थी जिसके बाद डीईओ अंबाला द्वारा मई 1975 के बाद लीज को एक्सटेंड नहीं किया गया। लीज एक्सटेंड नहीं होने के बावजूद लोग यहां बसे थे।
विज्ञापन
- इसी तरह सर्वे नंबर 417 में दुधला मंडी, गुलाब मंडी, हिम्मतपुरा आदि क्षेत्र शामिल है। करीब 84 एकड़ जमीन सीधी सेना के नियंत्रण में है जोकि डिफेंस ए-वन लैंड है। यहां पांच हजार से भी अधिक लोग रहते हैं। सेना यहां बसे लोगों को अवैध तरीके से रहने की बात कहकर उन्हें हमेशा हटाने का प्रयास करती है।
जमीन हस्तांतरित हुई तो यह होगा फायदा
रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच यदि सौदा होता है तो यहां बसे हजारों परिवारों को फायदा होगा। इन क्षेत्रों में तोपखाना परेड के अलावा, दुधला मंडी, गुलाब मंडी, रिसाला बाजार, शहजादा मंडी आदि शामिल है। यहां पर कुल 5300 से ज्यादा वोट हैं और अकेले तोपखाना परेड में 3200 से अधिक वोट हैं। जमीन राज्य सरकार के अधीन आने पर लोग अपने मकान बना सकेंगे, साथ ही मरम्मत आदि कार्य भी कर पाएंगे।
अभी यह दिक्कत लोगों को
- इन क्षेत्रों में दशकों से रह रहे लोगों को आज तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है।
- सीवरेज एवं पीने के पानी की पाइप लाइन तक नहीं डली है।
- मकान आदि गिर जाने पर दोबारा बनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
- अब तक कई परिवारों को यहां से सेना द्वारा जबरन उजाड़ा जा चुका है।
- खेती करने वाले लोग अपने बूते पर काम करते हैं जबकि सेना या कैंटोनमेंट बोर्ड से किसी प्रकार भी उन्हें मदद नहीं मिली।
डीसी व अन्य अधिकारियों ने किया दौरा
शनिवार को डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने एसडीएम सुभाष सिहाग, कैप्टन विनोद डीआरओ अंबाला, सत्येंद्र सिवाच सहआयुक्त नगर निगम, अजय बवेजा उपाध्यक्ष कैंटोनमेंट बोर्ड व अन्य के साथ क्षेत्रों का दौरा किया। बवेजा ने बताया कि यह क्षेत्र सेना के तहत आने के कारण यहां के निवासियों को किसी भी समय उजड़ने का भय सताता रहता था। सेना के भय से परेशान होकर उपरोक्त निवासी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी मिले थे और उनसे गुहार लगाई कि उन्हें सेना द्वारा बार बार परेशान किया जाता है उनकी लीज भी बंद कर दी गई है। इसलिए सदर एरिया की तर्ज पर इस क्षेत्र की जमीन का भी वर्गीकरण करके फ्री होल्ड किया जाए। बवेजा ने बताया कि स्थानीय लोगों की समस्या को समझते हुए अनिल विज ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को इस संबंध मे पत्र लिखा जिसके परिणामस्वरूप फैसला लेते हुए रक्षा मंत्री ने प्रशासनिक स्टे लगा दिया। अब मंत्री विज के प्रयासों से ही जमीन हस्तांतरित के कार्य को बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
फोटो नंबर : 49
सेना ने राज्य सरकार से मांगी 261 एकड़ जमीन
मामला दुधला मंडी, माली परेड व अन्य क्षेत्रों में लीज की जमीन का
वेस्टर्न कमांड ने जिला प्रशासन को भेजा प्रपोजल
शनिवार को डीसी ने अधिकारियों के साथ किया लीज भूमि का दौरा
मंत्री विज ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से लगाई थी गुहार
जमीन हस्तांतरित हुई तो हजारों परिवार को होगा फायदा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। रक्षा मंत्रालय द्वारा अंबाला सैन्य क्षेत्र में लीज भूमि को लेकर अब राज्य सरकार से जमीन की मांग की गई है। कुल 261 एकड़ जमीन राज्य सरकार यदि रक्षा मंत्रालय को उपलब्ध करा देती है तो लीज भूमि पर दशकों से बसे सैकड़ों परविारों के घर बच सकेंगे। शनिवार को इसी मामले को लेकर डीसी शरणदीप कौर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सैन्य क्षेत्र में लीज भूमि का निरीक्षण किया। इस दौरान बोर्ड के पार्षद भी मौजूद रहे। जमीन हस्तांतरण को लेेकर क्षेत्र के लोग उत्साहित हैं।
बता दें कि मंत्री अनिल विज ने रक्षा मंत्री के समक्ष यहां बसें परिवारों को उजड़ने से बचाने की मांग को उठाया था जिस पर अब कार्रवाई की जा रही है। सोमवार को वेस्टर्न कमांड मुख्यालय में इस मामले को लेकर बैठक भी है जिसमें जमीन के मुद्दे पर सेना एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच चर्चा होगी। प्रशासन को अब 261 एकड़ जमीन ढूंढनी होगी जोकि उन्हें रक्षा मंत्रालय को देनी होगी। उधर, बोर्ड उपाध्यक्ष अजय बवेजा ने कहा कि मंत्री विज के प्रयासों से यह संभव हो सका है और राज्य सरकार को जमीन सेना को उपलब्ध कराकर लोगों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
कहां कितनी जमीन
रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले सर्वे नंबर 65 में 198 एकड़ भूमि है। तोपखाना परेड व माली परेड में स्थित इस भूमि पर ब्रिटिश हुकूमत के समय से लोग यहां सब्जियों की खेती कर रहे हैं। 1941 में जमीन लीज पर दी गई थी जिसके बाद डीईओ अंबाला द्वारा मई 1975 के बाद लीज को एक्सटेंड नहीं किया गया। लीज एक्सटेंड नहीं होने के बावजूद लोग यहां बसे थे।
विज्ञापन
- इसी तरह सर्वे नंबर 417 में दुधला मंडी, गुलाब मंडी, हिम्मतपुरा आदि क्षेत्र शामिल है। करीब 84 एकड़ जमीन सीधी सेना के नियंत्रण में है जोकि डिफेंस ए-वन लैंड है। यहां पांच हजार से भी अधिक लोग रहते हैं। सेना यहां बसे लोगों को अवैध तरीके से रहने की बात कहकर उन्हें हमेशा हटाने का प्रयास करती है।
जमीन हस्तांतरित हुई तो यह होगा फायदा
रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच यदि सौदा होता है तो यहां बसे हजारों परिवारों को फायदा होगा। इन क्षेत्रों में तोपखाना परेड के अलावा, दुधला मंडी, गुलाब मंडी, रिसाला बाजार, शहजादा मंडी आदि शामिल है। यहां पर कुल 5300 से ज्यादा वोट हैं और अकेले तोपखाना परेड में 3200 से अधिक वोट हैं। जमीन राज्य सरकार के अधीन आने पर लोग अपने मकान बना सकेंगे, साथ ही मरम्मत आदि कार्य भी कर पाएंगे।
अभी यह दिक्कत लोगों को
- इन क्षेत्रों में दशकों से रह रहे लोगों को आज तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है।
- सीवरेज एवं पीने के पानी की पाइप लाइन तक नहीं डली है।
- मकान आदि गिर जाने पर दोबारा बनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
- अब तक कई परिवारों को यहां से सेना द्वारा जबरन उजाड़ा जा चुका है।
- खेती करने वाले लोग अपने बूते पर काम करते हैं जबकि सेना या कैंटोनमेंट बोर्ड से किसी प्रकार भी उन्हें मदद नहीं मिली।
डीसी व अन्य अधिकारियों ने किया दौरा
शनिवार को डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने एसडीएम सुभाष सिहाग, कैप्टन विनोद डीआरओ अंबाला, सत्येंद्र सिवाच सहआयुक्त नगर निगम, अजय बवेजा उपाध्यक्ष कैंटोनमेंट बोर्ड व अन्य के साथ क्षेत्रों का दौरा किया। बवेजा ने बताया कि यह क्षेत्र सेना के तहत आने के कारण यहां के निवासियों को किसी भी समय उजड़ने का भय सताता रहता था। सेना के भय से परेशान होकर उपरोक्त निवासी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी मिले थे और उनसे गुहार लगाई कि उन्हें सेना द्वारा बार बार परेशान किया जाता है उनकी लीज भी बंद कर दी गई है। इसलिए सदर एरिया की तर्ज पर इस क्षेत्र की जमीन का भी वर्गीकरण करके फ्री होल्ड किया जाए। बवेजा ने बताया कि स्थानीय लोगों की समस्या को समझते हुए अनिल विज ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को इस संबंध मे पत्र लिखा जिसके परिणामस्वरूप फैसला लेते हुए रक्षा मंत्री ने प्रशासनिक स्टे लगा दिया। अब मंत्री विज के प्रयासों से ही जमीन हस्तांतरित के कार्य को बढ़ाया जा रहा है।