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महिलाओं की बजाय पुरूषों के बीच संवेदनशील अभियान चलाने की ज्यादा जरूरत : स्वामी अग्रिवेश
Updated Thu, 08 Mar 2018 01:28 AM IST
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महिलाओं की बजाय पुरुषों के बीच संवेदनशील अभियान चलाने की ज्यादा जरूरत : स्वामी अग्रिवेश
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर वुमन सेल की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार मेें सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने महिलाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण और उनके निवारण पर विचार रखे।
उन्होंने रेप को घृणित अपराध मानते हुए कहा कि इसके लिए पुरुषों की सोच जिम्मेवार है न की महिलाओं का पहनावा। बच्चियों से रेप के अधिकतर मामलों में दोषी कोई रिश्तेदार या फिर परिचित होता है। महिलाओं की बजाय पुरुषों के बीच संवेदनशील अभियान चलाने की ज्यादा जरूरत है। स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की मुक्ति और उनके उत्थान का संकल्प दिवस है। वर्तमान में दहेज प्रथा और कन्या भ्रूणहत्या दो बड़े मुद्दे हैं जो महिलाओं के अस्तित्व को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा के कारण लोग कन्याओं को बोझ समझते हैं और इसी कारण वे बच्चियों को गर्भ में ही मरवा देते है ताकि उन्हें शादी के समय दहेज न देना पड़े। उन्होंने कहा कि जब दहेज लेना व देना बंद हो जाएगा तो कन्या भ्रूण हत्या अपने आप खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही प्रेम विवाह, अंतरजातीय विवाह, दहेज प्रथा, सती प्रथा पर भी विचार रखे। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य प्रो. पूनम वत्स, वुमन सेल प्रभारी डॉ. अंजू जगपाल, डॉ. अतुल यादव आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर वुमन सेल की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार मेें सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा और बंधुआ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने महिलाओं से जुड़ी समस्याओं के कारण और उनके निवारण पर विचार रखे।
उन्होंने रेप को घृणित अपराध मानते हुए कहा कि इसके लिए पुरुषों की सोच जिम्मेवार है न की महिलाओं का पहनावा। बच्चियों से रेप के अधिकतर मामलों में दोषी कोई रिश्तेदार या फिर परिचित होता है। महिलाओं की बजाय पुरुषों के बीच संवेदनशील अभियान चलाने की ज्यादा जरूरत है। स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की मुक्ति और उनके उत्थान का संकल्प दिवस है। वर्तमान में दहेज प्रथा और कन्या भ्रूणहत्या दो बड़े मुद्दे हैं जो महिलाओं के अस्तित्व को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा के कारण लोग कन्याओं को बोझ समझते हैं और इसी कारण वे बच्चियों को गर्भ में ही मरवा देते है ताकि उन्हें शादी के समय दहेज न देना पड़े। उन्होंने कहा कि जब दहेज लेना व देना बंद हो जाएगा तो कन्या भ्रूण हत्या अपने आप खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही प्रेम विवाह, अंतरजातीय विवाह, दहेज प्रथा, सती प्रथा पर भी विचार रखे। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य प्रो. पूनम वत्स, वुमन सेल प्रभारी डॉ. अंजू जगपाल, डॉ. अतुल यादव आदि मौजूद रहे।
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