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मजदूर विरोधी नीति से रेलकर्मियों की बदतर हो रही हालत : बाजवा

Tue, 04 Dec 2018 12:51 AM IST
Updated Tue, 04 Dec 2018 12:51 AM IST
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मजदूर विरोधी नीति से रेलकर्मियों की बदतर हो रही हालत : बाजवा
रेल ट्रैक हो रहे आउटडेट, सिग्नल प्रणाली का आधुनिकीकरण जरूरी : बाजवा
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फोटो नंबर : 20 व 21
एनआरएमयू के पदाधिकारियों ने कैंट रेलवे स्टेशन पर किया प्रदर्शन, रेल मंडल अधिकारियों पर लगाए आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। आल इंडिया रेलवे मैन्स फेडरेशन एवं नॉर्दर्न रेलवे मैन्स यूनियन के आह्वान पर सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एनआरएमयू की तीनों शाखाओं ने कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन किया। इसमें पदाधिकारियों व सदस्यों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने की। मंडल सचिव सीएस बाजवा ने यूनियन सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण रेलवे कर्मियों की हालत खराब हो रही है। रनिंग कर्मचारियों के भत्तों, ट्रैक मेंटेनरों को लाभ, न्यूनतम वेतन बढ़ाना व अन्य कई कमियां हैं जिन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रेल ट्रैक आउटडेट हो रहे हैं जबकि सिग्नल प्रणाली का आधुनिकीकरण जरूरी है। कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम से वंचित कर उनका भविष्य अंधकारमय बनाया जा रहा है। रेलवे में ढाई लाख पद रिक्त हैं। चालकों से समय से ज्यादा ड्यूटी ली जा रही है और उन्हें ओवरटाइम व अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रनिंग कर्मचारियों सहित अन्य रेल कर्मचारियों के भत्तों में वृद्धि करने की मांग को उठाया गया। इस दौरान यूनियन के शाखा अध्यक्ष विनोद कुमार राय, रघुनंदन, सुखविंद्र सिंह, श्याम सुंदर, रविंद्र कुमार, एसके गुज्जर मौजूद रहे।
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रेल मंडल में चालकों की कमी : बाजवा
पत्रकारों से बातचीत करते हुए यूनियन के मंडल सचिव सीएस बाजवा ने कहा कि रेल मंडल में चालकों की कमी है जिस वजह से रेल सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने बताया कि गुड्स गार्ड्स को मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में झोंका जा रहा है। हर ट्रेन के रेक की मेंटेनेंस के लिए छह घंटे का समय चाहिए होता है, मगर यहां तीन से चार घंटे के बीच ही रेक को फिट करने का दबाव बनाया जाता है और ट्रेन को तुरंत चला दिया जाता है। बाजवा ने रेल टेंडरों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा रेलवे अब तक दस वर्षों में करोड़ों रुपये कैंट रेलवे स्टेशन की हालत सुधारने में लगा चुकी है जबकि हकीकत है कि इतनी राशि में ऐसे ही तीन नए स्टेशन बनाए जा सकते हैं।
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