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17 साल बाद 70 फीसदी से अधिक मतदान
अमर उजाला, अंबाला
Updated Fri, 11 Apr 2014 12:36 AM IST
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अंबाला सिटी। अंबाला में आखिरकार वोटरों ने जागरूकता का परिचय दिया। मतदाता जागे और उन्होंने 17 साल पुराने रिकॉर्ड को फिर छुआ। लोगों की इस जागरूकता में ‘अमर उजाला’ फाउंडेशन मुहिम के तहत चलाया गया अभियान ‘समझदार की पहचान वोट का निशान’ भी रंग लाया। वहीं अफसरों ने भी अंबाला के मतदान को अपेक्षाकृत पहले से बेहतर बताया। इस बार चुनाव में मतदाताओं की संख्या में भी लाखों का इजाफा आने के बावजूद मतदान प्रतिशत पहले की अपेक्षाकृत बढ़ा।
उल्लेखनीय है कि 1991 के लोकसभा चुनाव में मतदान 71.63 प्रतिशत था। वर्ष 1996 के चुनावों में ये मतदान प्रतिशता बढ़ा और 75.02 प्रतिशत पहुंच गया। उसके बाद 1998 में ये मतदान एकदम लुढ़ककर 68.50 प्रतिशत रह गया। जबकि वर्ष 1999 के चुनाव में मतदान 64.01 प्रतिशत व वर्ष 2004 में मतदान 65.8 प्रतिशत रहा। वर्ष 2009 में मतदान प्रतिशत 68.9 रहा और इस बार 17 साल बाद फिर से मतदान का आंकड़ा 70 फीसदी के पार हो गया। वर्ष 1996 के बाद इस बार वर्ष 2014 में मतदान 71 प्रतिशत रहा।
‘अमर उजाला’ ने किया जागरूक
अमर उजाला फाउंडेश की मुहिम ‘समझदार की पहचान वोट का निशान’ के तहत डेढ़ माह से अभियान चलाया गया। इसमें काफी संख्या में लोगों ने मिलकर मतदान का संकल्प लिया। ‘अमर उजाला’ की इस मुहिम में शामिल होते हुए अंबाला के डीसी डॉ. साकेत कुमार, मिस्टर एंड मिसेज फिल्म के सितारे, मैरिज द गैरिज फिल्म के सितारों ने भी मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक किया। इसी का नतीजा यह रहा कि 17 साल बाद अंबाला में 70 फीसद के पार मतदान हुआ।
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ये कभी नहीं चूके
इसे मतदाताओं की जागरूकता ही कहा जाएगा कि बहुत से बुजुर्ग ऐसे रहे, जिन्होंने आजादी के बाद मतदान से कभी बेरुखी नहीं दिखाई। उन्होंने हर बार जैसा भी चुनाव हुआ, लोकतंत्र के इस महापर्व को जोश और उत्साह के साथ मनाया। सिटी के 93 साल एएस सेठ और उनकी पत्नी सूरज बंस हो या फिर बलदेव नगर की गुरबचन कौर और सूरज प्रकाश, इन लोगों ने आजादी के बाद से आज तक हर तरह के चुनाव में वोट दी है। इनमें से कुछ लोगों का साथ शरीर ने नहीं दिया। उनके हाथों को अब बैसाखियाें का सहारा है। इसके बावजूद मतदान की जिम्मेदारियों से इन लोगों ने कभी मुंह नहीं मोड़ा। इन लोगों का कहना है कि मतदान देश के प्रति बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए सभी लोगों को इससे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।
अफसरों ने नहीं उठाए फोन, भटके लोग
प्रशासन ने चुनावों को लेकर अपनी तैयारियों और मतदाताओं की परेशानियों के निदान संबंधी ढेरों दावे किए थे। मगर ये तमाम दावे वीरवार को चुनाव के दौरान पूरी तरह ठप हो गए। वजह बने जिला के प्रशासनिक अफसर। राम सिंह चनालिया, बिट्टू शर्मा, सीमा कौशल व कुसुम लता के अनुसार उन्हें अपने-अपने बूथों पर अव्यवस्थाओं को लेकर खासी परेशानी थी। इसलिए उन्होंने प्रशासन के जारी नंबरों पर खूब फोन किए। लेकिन जब वहां से रिस्पांस नहीं मिला, तो डीसी अंबाला के मोबाइल पर भी फोन किए। हैरत की बात है कि किसी भी अफसर ने फोन ही नहीं उठाया। जबकि कई अफसरों ने तो प्राइवेट फोन ही बंद कर दिए। इससे लोग ज्यादा परेशान हुए।
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उल्लेखनीय है कि 1991 के लोकसभा चुनाव में मतदान 71.63 प्रतिशत था। वर्ष 1996 के चुनावों में ये मतदान प्रतिशता बढ़ा और 75.02 प्रतिशत पहुंच गया। उसके बाद 1998 में ये मतदान एकदम लुढ़ककर 68.50 प्रतिशत रह गया। जबकि वर्ष 1999 के चुनाव में मतदान 64.01 प्रतिशत व वर्ष 2004 में मतदान 65.8 प्रतिशत रहा। वर्ष 2009 में मतदान प्रतिशत 68.9 रहा और इस बार 17 साल बाद फिर से मतदान का आंकड़ा 70 फीसदी के पार हो गया। वर्ष 1996 के बाद इस बार वर्ष 2014 में मतदान 71 प्रतिशत रहा।
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‘अमर उजाला’ ने किया जागरूक
अमर उजाला फाउंडेश की मुहिम ‘समझदार की पहचान वोट का निशान’ के तहत डेढ़ माह से अभियान चलाया गया। इसमें काफी संख्या में लोगों ने मिलकर मतदान का संकल्प लिया। ‘अमर उजाला’ की इस मुहिम में शामिल होते हुए अंबाला के डीसी डॉ. साकेत कुमार, मिस्टर एंड मिसेज फिल्म के सितारे, मैरिज द गैरिज फिल्म के सितारों ने भी मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक किया। इसी का नतीजा यह रहा कि 17 साल बाद अंबाला में 70 फीसद के पार मतदान हुआ।
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ये कभी नहीं चूके
इसे मतदाताओं की जागरूकता ही कहा जाएगा कि बहुत से बुजुर्ग ऐसे रहे, जिन्होंने आजादी के बाद मतदान से कभी बेरुखी नहीं दिखाई। उन्होंने हर बार जैसा भी चुनाव हुआ, लोकतंत्र के इस महापर्व को जोश और उत्साह के साथ मनाया। सिटी के 93 साल एएस सेठ और उनकी पत्नी सूरज बंस हो या फिर बलदेव नगर की गुरबचन कौर और सूरज प्रकाश, इन लोगों ने आजादी के बाद से आज तक हर तरह के चुनाव में वोट दी है। इनमें से कुछ लोगों का साथ शरीर ने नहीं दिया। उनके हाथों को अब बैसाखियाें का सहारा है। इसके बावजूद मतदान की जिम्मेदारियों से इन लोगों ने कभी मुंह नहीं मोड़ा। इन लोगों का कहना है कि मतदान देश के प्रति बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए सभी लोगों को इससे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।
अफसरों ने नहीं उठाए फोन, भटके लोग
प्रशासन ने चुनावों को लेकर अपनी तैयारियों और मतदाताओं की परेशानियों के निदान संबंधी ढेरों दावे किए थे। मगर ये तमाम दावे वीरवार को चुनाव के दौरान पूरी तरह ठप हो गए। वजह बने जिला के प्रशासनिक अफसर। राम सिंह चनालिया, बिट्टू शर्मा, सीमा कौशल व कुसुम लता के अनुसार उन्हें अपने-अपने बूथों पर अव्यवस्थाओं को लेकर खासी परेशानी थी। इसलिए उन्होंने प्रशासन के जारी नंबरों पर खूब फोन किए। लेकिन जब वहां से रिस्पांस नहीं मिला, तो डीसी अंबाला के मोबाइल पर भी फोन किए। हैरत की बात है कि किसी भी अफसर ने फोन ही नहीं उठाया। जबकि कई अफसरों ने तो प्राइवेट फोन ही बंद कर दिए। इससे लोग ज्यादा परेशान हुए।