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लघु सचिवालय के निर्माण पर अब वकीलों की आपत्ति
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अंबाला सिटी। लघु सचिवालय के निर्माण का मामला एक बार ठंडे बस्ते में जा सकता है। जिला बार एसोसिएशन ने ओल्ड सेशन कोर्ट परिसर पर बनने वाले लघु सचिवालय का विरोध जताया है। तर्क दिया गया है कि ओल्ड सेशन कोर्ट की इमारत एवं ढांचा ब्रिटिशकालीन है, जिसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया जाए और इसे नहीं गिराया जाए। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित लघु सचिवालय का निर्माण विश्वकर्मा चौक के पास डीसी ऑफिस में की किया जाए। वकीलों ने इस मामले को लेकर सोमवार जिला सत्र न्यायाधीश के अलावा एडीसी को भी ज्ञापन सौंपा। इतना ही नहीं मामले की रिपोर्ट हाईकोर्ट भी भेजी गई है। उनकी मांग है कि ओल्ड सेशन कोर्ट बिल्डिंग को हेरिटेज इमारत घोषित कर इसका संग्रह एवं रखरखाव किया जाए।
प्रशासन ने करीब 79 करोड़ रुपये की लागत से ओल्ड सेशन कोर्ट बिल्डिंग को ध्वस्त कर यहां चार मंजिला लघु सचिवालय का नया भवन खड़ा करने की योजना बनाई है। बीते वर्ष 24 दिसंबर को सीएम मनोहर लाल इसका शिलान्यास भी कर चुके हैं।
इन वकीलों ने सौंपा ज्ञापन
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान रोहित जैन, उप प्रधान संदीप कुमार चौहान, सचिव रोहित गर्ग, सह-सचिव दीपक कुमार माकन, खजांची हर्ष वोहरा एवं कार्यकारिणी सदस्य अनीता रानी, दीपक मंगवाना, गुलाब सिंह एवं आशुतोष गौड़ ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम अग्रवाल व अतिरिक्त उपयुक्त कैप्टन शक्ति सिंह को ज्ञापन देकर प्रस्तावित मिनी सचिवालय के निर्माण पर जताया एतराज।
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निर्माण तोड़ बनाया जाना है नया भवन
ओल्ड सेशन कोर्ट के निर्माण कार्य का शिलान्यास बीते वर्ष 24 दिसंबर को सीएम मनोहर लाल ने किया था। योजना के अनुसार चार मंजिला भवन में डीसी, एडीसी, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कृषि विभाग, पशु पालन विभाग, डीआईपीआरओ, तहसील कार्यालय के अलावा अन्य कई विभागों के दफ्तर एक छत के नीचे बनाए जाने हैं। आगामी दिनों में ओल्ड सेशन कोर्ट के भवन को तोड़ नया भवन बनाने का काम शुरू किया जाना है, मगर अब वकीलों ने इसपर आपत्ति जताई है।
अब तक तीन बार रद्द हो चुका प्रस्ताव
मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर पहले ओल्ड सेशन कोर्ट भूमि का चयन किया गया था। यह स्थान पब्लिक एपरोच पर था। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज चाहते थे कि सेशन कोर्ट भूमि पर मिनी सचिवालय बने ताकि जनता आसानी से यहां पहुंच सके। मगर किन्हीं कारणों से इस प्लान को रद्द कर दिया गया। फिर जिला मुख्यालय के पिछली तरफ खाली जमीन पर निर्माण का प्रपोजल बना, यहां तालाबनुमा स्थान था, जिसे मिट्टी से भरकर यहां मिनी सचिवालय बनाना तय हुआ था। मगर इस प्रपोज्जल को भी रद्द कर दिया गया। फिर वकीलों के पार्किंग अलॉट की जगह को फाइनल किया गया है, जिस पर वकीलों ने आपत्ति जताई थी। वकीलों का तर्क था कि जिस भूमि को लघु सचिवालय के लिए प्रस्तावित किया गया है उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद ओल्ड सेशन कोर्ट के स्थान पर लघु सचिवालय बनना तय हुआ था।
इसलिए जरूरी है मिनी सचिवालय का निर्माण
मिनी सचिवालय का निर्माण इस समय प्रशासन के लिए जरूरी बन गया है। इस समय विभिन्न प्रशासनिक कार्यालय दशकों पुरानी इमारतों में चल रहे हैं, जिनमें से अधिकतर की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा यह कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर है जिससे जनता को भी आने-जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनके रखरखाव पर ही प्रशासन को लाखों रुपय तक बहाने पड़ रहे हैं।
वकीलों ने ओल्ड सेशन कोर्ट निर्माण को लेकर ज्ञापन सौंपा है। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा क्योंकि मामले में उच्च अधिकारी ही कार्रवाई कर सकते हैं।
- कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, अंबाला।
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प्रशासन ने करीब 79 करोड़ रुपये की लागत से ओल्ड सेशन कोर्ट बिल्डिंग को ध्वस्त कर यहां चार मंजिला लघु सचिवालय का नया भवन खड़ा करने की योजना बनाई है। बीते वर्ष 24 दिसंबर को सीएम मनोहर लाल इसका शिलान्यास भी कर चुके हैं।
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इन वकीलों ने सौंपा ज्ञापन
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान रोहित जैन, उप प्रधान संदीप कुमार चौहान, सचिव रोहित गर्ग, सह-सचिव दीपक कुमार माकन, खजांची हर्ष वोहरा एवं कार्यकारिणी सदस्य अनीता रानी, दीपक मंगवाना, गुलाब सिंह एवं आशुतोष गौड़ ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम अग्रवाल व अतिरिक्त उपयुक्त कैप्टन शक्ति सिंह को ज्ञापन देकर प्रस्तावित मिनी सचिवालय के निर्माण पर जताया एतराज।
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निर्माण तोड़ बनाया जाना है नया भवन
ओल्ड सेशन कोर्ट के निर्माण कार्य का शिलान्यास बीते वर्ष 24 दिसंबर को सीएम मनोहर लाल ने किया था। योजना के अनुसार चार मंजिला भवन में डीसी, एडीसी, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कृषि विभाग, पशु पालन विभाग, डीआईपीआरओ, तहसील कार्यालय के अलावा अन्य कई विभागों के दफ्तर एक छत के नीचे बनाए जाने हैं। आगामी दिनों में ओल्ड सेशन कोर्ट के भवन को तोड़ नया भवन बनाने का काम शुरू किया जाना है, मगर अब वकीलों ने इसपर आपत्ति जताई है।
अब तक तीन बार रद्द हो चुका प्रस्ताव
मिनी सचिवालय के निर्माण को लेकर पहले ओल्ड सेशन कोर्ट भूमि का चयन किया गया था। यह स्थान पब्लिक एपरोच पर था। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज चाहते थे कि सेशन कोर्ट भूमि पर मिनी सचिवालय बने ताकि जनता आसानी से यहां पहुंच सके। मगर किन्हीं कारणों से इस प्लान को रद्द कर दिया गया। फिर जिला मुख्यालय के पिछली तरफ खाली जमीन पर निर्माण का प्रपोजल बना, यहां तालाबनुमा स्थान था, जिसे मिट्टी से भरकर यहां मिनी सचिवालय बनाना तय हुआ था। मगर इस प्रपोज्जल को भी रद्द कर दिया गया। फिर वकीलों के पार्किंग अलॉट की जगह को फाइनल किया गया है, जिस पर वकीलों ने आपत्ति जताई थी। वकीलों का तर्क था कि जिस भूमि को लघु सचिवालय के लिए प्रस्तावित किया गया है उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद ओल्ड सेशन कोर्ट के स्थान पर लघु सचिवालय बनना तय हुआ था।
इसलिए जरूरी है मिनी सचिवालय का निर्माण
मिनी सचिवालय का निर्माण इस समय प्रशासन के लिए जरूरी बन गया है। इस समय विभिन्न प्रशासनिक कार्यालय दशकों पुरानी इमारतों में चल रहे हैं, जिनमें से अधिकतर की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। इसके अलावा यह कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर है जिससे जनता को भी आने-जाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनके रखरखाव पर ही प्रशासन को लाखों रुपय तक बहाने पड़ रहे हैं।
वकीलों ने ओल्ड सेशन कोर्ट निर्माण को लेकर ज्ञापन सौंपा है। मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा क्योंकि मामले में उच्च अधिकारी ही कार्रवाई कर सकते हैं।
- कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, अंबाला।