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बदलते मौसम से फसलों में बढ़ सकती हैं बीमारी आने की संभावना, किसान पेरशान
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बारिश से फसल में झड़ेगा तेला और स्प्रे का भी बचेगा खर्च: कृषि विशेषज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। कभी धूप तो कभी बादल और बारिश। ऐसे मौसमी बदलाव के कारण फसलीय चक्र प्रभावित होता नजर आ रहा है। बुधवार को दिनभर पर बादल छाए रहे और हलकी बूंदाबांदी भी हुई। इसको लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। दिन का अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री रहा। वहीं चंडीगढ़ मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जिले में आगामी दिनों में भी बादल छाए रहने की संभावना है।
वही इस संबंध में किसान जरनैल सिंह, नैब सिंह, अमरजीत, गुरमीत, मस्तान सिंह, गुरविंद्र सिंह, सूरजभान आदि का कहना है कि इस प्रकार के मौसम से उन्हें डर है कि कहीं उनकी गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसल में कोई बीमारी न आ जाए। जब भी इस प्रकार का मौसम हुआ है तो गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसलों को विभिन्न प्रकार की बीमारियां को अपने चंगुल में फंसाया है। पछेती किस्म की गेहूं की फसल में पीला रतुआ और बलास्ट आदि रोगों को आना स्वाभाविक बन जाता है। किसानों को फसलीय समस्याओं के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
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यह बोले कृषि अधिकारी
इस संबंध में कृषि विकास अधिकारी रोशन लाल ने बताया कि कभी-कभी ऐसा मौसम किसानों की फसलों के लिए फायदेमंद साबित होता है। अबकी बार भी गेहूं की फसल बंपर होने के आसार हैं। क्योंकि अभी तक उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया कि जहां फसल में पीला रतुआ या अन्य कोई बीमारी आई हो। रही बात बारिश की, बारिश से तो गेहूं की फसल को तो लाभ है, क्योंकि उसकी बालियों पर आने वाले तेला बारिश के कारण झड़ जाता है और किसानों को तेले का स्प्रे नहीं करना पड़ेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। कभी धूप तो कभी बादल और बारिश। ऐसे मौसमी बदलाव के कारण फसलीय चक्र प्रभावित होता नजर आ रहा है। बुधवार को दिनभर पर बादल छाए रहे और हलकी बूंदाबांदी भी हुई। इसको लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। दिन का अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री रहा। वहीं चंडीगढ़ मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जिले में आगामी दिनों में भी बादल छाए रहने की संभावना है।
वही इस संबंध में किसान जरनैल सिंह, नैब सिंह, अमरजीत, गुरमीत, मस्तान सिंह, गुरविंद्र सिंह, सूरजभान आदि का कहना है कि इस प्रकार के मौसम से उन्हें डर है कि कहीं उनकी गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसल में कोई बीमारी न आ जाए। जब भी इस प्रकार का मौसम हुआ है तो गेहूं, सरसों, प्याज आदि की फसलों को विभिन्न प्रकार की बीमारियां को अपने चंगुल में फंसाया है। पछेती किस्म की गेहूं की फसल में पीला रतुआ और बलास्ट आदि रोगों को आना स्वाभाविक बन जाता है। किसानों को फसलीय समस्याओं के चलते काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
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यह बोले कृषि अधिकारी
इस संबंध में कृषि विकास अधिकारी रोशन लाल ने बताया कि कभी-कभी ऐसा मौसम किसानों की फसलों के लिए फायदेमंद साबित होता है। अबकी बार भी गेहूं की फसल बंपर होने के आसार हैं। क्योंकि अभी तक उनकी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं आया कि जहां फसल में पीला रतुआ या अन्य कोई बीमारी आई हो। रही बात बारिश की, बारिश से तो गेहूं की फसल को तो लाभ है, क्योंकि उसकी बालियों पर आने वाले तेला बारिश के कारण झड़ जाता है और किसानों को तेले का स्प्रे नहीं करना पड़ेगा।
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