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कस्बा को खुले शौच मुक्त करने का दावा, लेकिन टूटे पड़े हैं शौचालय
Updated Thu, 06 Dec 2018 12:59 AM IST
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कबाड़ हुए शौचालय, किसी पर दरवाजा नहीं तो कहीं पर पानी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। एक ओर जहां सरकार देश को खुले में शौच मुक्त करने का सपना देख रही है और शौचालय बनवा रही है, वहीं इस यहां बने शौचालय कबाड़ हो चुके हैं। बराड़ा कस्बे में नगर पालिका द्वारा व ग्रामीण अंचल में पंचायती राज में बनाए गए शौचालय खस्ताहालत में हैं। शौचालय टूटे पड़े हैं तो कहीं पर पानी की टंकियां ही नहीं हैं। इस कारण इनमें शौच के लिए नहीं जाया जा सकता। यही हाल गांव में बने शौचालयों का है। कहीं पर शौचालयों के दरवाजे नहीं तो कहीं पर पानी की टंकी नहीं है, कहीं पर दरवाजे ही नहीं हैं। कई गांवों में तो इनको बनाया ही नहीं गया। केवल सरकार से पैसा लेकर शौचालय की सीट बना कर दिखा दी।
स्थानीय निवासियों में पवन कुमार, शोभा, ललिता, विजया, चीकू, रविंदर कुमार ने बताया कि बराड़ा मार्केट कमेटी द्वारा शौचालय बनाए गए थे, वे बराड़ा अनाज मंडी, डेहा बस्ती व बराड़ा गांव में रखे गए लेकिन ये इतने हल्के थे कि जल्द ही टूट गए। अगर कहीं पर व्यस्थित हैं तो वहां पानी की टंकी ही नहीं है। ऐसे में सरकार की यह योजना फेल साबित होकर रह गई। इससे लाखों रुपये कबाड़े में चले गए। ऐसे में प्रदेश खुले में शौच मुक्त कैसे हो सकता है। लोग मजबूरीवश खुले में शौच जा रहे हैं। दरअसल आज भी हरियाणा प्रदेश में ऐसे बहुत से परिवार हैं जो घर में शौचालय नहीं बना सकते, जिस कारण बाहर खुले में शौच जाना पड़ रहा है।
कोट
शरारती तत्वों ने इनको तोड़ दिया है। जहां-जहां पर इनको तोड़ा गया है, उनकी रिपेयर करवाई जाएगी, जबकि इसको लगातार चेक भी किया जाएगा।
- अजय वालिया, सचिव नगरपालिका बराड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। एक ओर जहां सरकार देश को खुले में शौच मुक्त करने का सपना देख रही है और शौचालय बनवा रही है, वहीं इस यहां बने शौचालय कबाड़ हो चुके हैं। बराड़ा कस्बे में नगर पालिका द्वारा व ग्रामीण अंचल में पंचायती राज में बनाए गए शौचालय खस्ताहालत में हैं। शौचालय टूटे पड़े हैं तो कहीं पर पानी की टंकियां ही नहीं हैं। इस कारण इनमें शौच के लिए नहीं जाया जा सकता। यही हाल गांव में बने शौचालयों का है। कहीं पर शौचालयों के दरवाजे नहीं तो कहीं पर पानी की टंकी नहीं है, कहीं पर दरवाजे ही नहीं हैं। कई गांवों में तो इनको बनाया ही नहीं गया। केवल सरकार से पैसा लेकर शौचालय की सीट बना कर दिखा दी।
स्थानीय निवासियों में पवन कुमार, शोभा, ललिता, विजया, चीकू, रविंदर कुमार ने बताया कि बराड़ा मार्केट कमेटी द्वारा शौचालय बनाए गए थे, वे बराड़ा अनाज मंडी, डेहा बस्ती व बराड़ा गांव में रखे गए लेकिन ये इतने हल्के थे कि जल्द ही टूट गए। अगर कहीं पर व्यस्थित हैं तो वहां पानी की टंकी ही नहीं है। ऐसे में सरकार की यह योजना फेल साबित होकर रह गई। इससे लाखों रुपये कबाड़े में चले गए। ऐसे में प्रदेश खुले में शौच मुक्त कैसे हो सकता है। लोग मजबूरीवश खुले में शौच जा रहे हैं। दरअसल आज भी हरियाणा प्रदेश में ऐसे बहुत से परिवार हैं जो घर में शौचालय नहीं बना सकते, जिस कारण बाहर खुले में शौच जाना पड़ रहा है।
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कोट
शरारती तत्वों ने इनको तोड़ दिया है। जहां-जहां पर इनको तोड़ा गया है, उनकी रिपेयर करवाई जाएगी, जबकि इसको लगातार चेक भी किया जाएगा।
- अजय वालिया, सचिव नगरपालिका बराड़ा