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बारह लाख की आबादी के लिए सरकारी अस्पतालों में मात्र दो रेडियोग्राफर, परेशान हो रहे मरीज
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:36 AM IST
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बारह लाख की आबादी के लिए सरकारी अस्पतालों में मात्र दो रेडियोग्राफर, परेशान हो रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जिले की बारह लाख की आबादी के लिए सिर्फ दो रेडियोग्राफर हैं। जिले में सिर्फ अंबाला सिटी और कैंट के सिविल अस्पताल में ही एक्सरे की सुविधा है। अन्य सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे मशीन तो हैं लेकिन रेडियोग्राफर नहीं हैं। शहजादपुर, नारायणगढ़, साहा, मुलाना, बराड़ा और नग्गल एरिया से यदि मरीज को एक्सरे के लिए कहा जाए, तो मजबूरी में उसे प्राइवेट अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटरों पर आना जाना पड़ता है। हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने उच्च अधिकारियों को रिमांडर तक भेज दिया है, जबकि अभी तक राहत नहीं मिल पाई है।
अंबाला में यदि मरीज सरकारी अस्पताल में जाता है और उसे डॉक्टर एक्सरे के लिए कहता है तो मरीज और उसके तीमारदारों की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अंबाला कैंट और सिटी सिविल अस्पताल में तो सुविधा है, लेकिन अन्य पीएचसी में एक्सरे मशीन होने बावजूद वहां एक्स-रे नहीं हो रहे। इसका कारण इन एक्सरे मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। नारायणगढ़, शहजादपुर, बराड़ा, मुलाना, चौड़मस्तपुर में एक्सरे मशीनें होने के बाद भी मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही।
निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भटकते हैं मरीज
निजी अस्पतालों अथवा डायग्नोस्टिक सेंटरों में सिविल अस्पताल में आने वाले मरीज एक्सरे के लिए भटकते हैं। ऐसे में मरीजों को तीन सौ रुपये से पांच सौ रुपये तक अदा करने पड़ते हैं। यदि मरीज सिविल अस्पताल में ही एक्सरे करवाना चाहता है, तो उसे अंबाला सिटी या फिर अंबाला कैंट तक आना-जाना पड़ता है। यह सुविधा सीएचसी और पीएचसी स्तर पर न होने के कारण मरीजों के लिए परेशानियां बढ़ रही हैं। मरीज भी आने-जाने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। वहां उन्हें अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं।
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दस गुना अधिक तक देने पड़ते हैं रुपये
अंबाला कैंट और सिटी में रोजाना मरीजों के करीब सौ-सौ एक्सरे किए जाते हैं। इसी तरह नारायणगढ़ सिविल अस्पताल में करीब 40 मरीजों के एक्सरे होते है। अस्पताल में प्रति एक्सरे फीस 50 रुपये है, जबकि प्राइवेट में यह फीस दो सौ से 500 रुपये तक वसूली जाती है। सिविल अस्पतालों में बीपीएल कार्ड धारकों से फीस नहीं ली जाती।
स्वास्थ्य विभाग यदि डाक्टरों आदि की कमी पूरी कर ले, तो मरीजों को राहत मिल सकती है। सुविधा देने से पहले सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं दी जानी चाहिए। प्राइवेट में तो मरीज पर आर्थिक बोझ पड़ता ही है।
- आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी अंबाला कैंट
सिविल अस्पताल में एक्सरे के लिए भटकना पड़ता है। यदि एक्सरे के लिए डॉक्टर नहीं है, तो इसके लिए कम से कम अस्थायी व्यवस्था तो की जाए, ताकि मरीजों पर निजी अस्पतालों में होने वाले खर्च का बोझ न पडे़।
- कर्मजीत सिंह, नारायणगढ़
कम से कम वैकल्पिक व्यवस्था तो देनी चाहिए, ताकि मरीज परेशान न हों। यही कारण है कि एक्सरे सुविधा न होने के कारण मजबूरी में मरीजों को प्राइवेट में चार से आठ गुणा तक फीस देकर एक्सरे करवाने पड़ते हैं।
- राम सिंह, गांव बिचपड़ी
रेडियोग्राफर की अंबाला में तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को लेटर भेजा है। इसके साथ ही रिमांडर भी दिया गया है। कैंट सिटी में एक्सरे हो रहे हैं। नारायणगढ़ में रेडियोग्राफर के रिटायर होने के बाद से परेशानी है। कोशिश की जा रही है कि कोई व्यवस्था बनाई जाए, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जिले की बारह लाख की आबादी के लिए सिर्फ दो रेडियोग्राफर हैं। जिले में सिर्फ अंबाला सिटी और कैंट के सिविल अस्पताल में ही एक्सरे की सुविधा है। अन्य सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे मशीन तो हैं लेकिन रेडियोग्राफर नहीं हैं। शहजादपुर, नारायणगढ़, साहा, मुलाना, बराड़ा और नग्गल एरिया से यदि मरीज को एक्सरे के लिए कहा जाए, तो मजबूरी में उसे प्राइवेट अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटरों पर आना जाना पड़ता है। हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने उच्च अधिकारियों को रिमांडर तक भेज दिया है, जबकि अभी तक राहत नहीं मिल पाई है।
अंबाला में यदि मरीज सरकारी अस्पताल में जाता है और उसे डॉक्टर एक्सरे के लिए कहता है तो मरीज और उसके तीमारदारों की परेशानियां शुरू हो जाती हैं। अंबाला कैंट और सिटी सिविल अस्पताल में तो सुविधा है, लेकिन अन्य पीएचसी में एक्सरे मशीन होने बावजूद वहां एक्स-रे नहीं हो रहे। इसका कारण इन एक्सरे मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। नारायणगढ़, शहजादपुर, बराड़ा, मुलाना, चौड़मस्तपुर में एक्सरे मशीनें होने के बाद भी मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही।
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निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर भटकते हैं मरीज
निजी अस्पतालों अथवा डायग्नोस्टिक सेंटरों में सिविल अस्पताल में आने वाले मरीज एक्सरे के लिए भटकते हैं। ऐसे में मरीजों को तीन सौ रुपये से पांच सौ रुपये तक अदा करने पड़ते हैं। यदि मरीज सिविल अस्पताल में ही एक्सरे करवाना चाहता है, तो उसे अंबाला सिटी या फिर अंबाला कैंट तक आना-जाना पड़ता है। यह सुविधा सीएचसी और पीएचसी स्तर पर न होने के कारण मरीजों के लिए परेशानियां बढ़ रही हैं। मरीज भी आने-जाने में होने वाली परेशानियों को देखते हुए निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। वहां उन्हें अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं।
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दस गुना अधिक तक देने पड़ते हैं रुपये
अंबाला कैंट और सिटी में रोजाना मरीजों के करीब सौ-सौ एक्सरे किए जाते हैं। इसी तरह नारायणगढ़ सिविल अस्पताल में करीब 40 मरीजों के एक्सरे होते है। अस्पताल में प्रति एक्सरे फीस 50 रुपये है, जबकि प्राइवेट में यह फीस दो सौ से 500 रुपये तक वसूली जाती है। सिविल अस्पतालों में बीपीएल कार्ड धारकों से फीस नहीं ली जाती।
स्वास्थ्य विभाग यदि डाक्टरों आदि की कमी पूरी कर ले, तो मरीजों को राहत मिल सकती है। सुविधा देने से पहले सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं दी जानी चाहिए। प्राइवेट में तो मरीज पर आर्थिक बोझ पड़ता ही है।
- आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी अंबाला कैंट
सिविल अस्पताल में एक्सरे के लिए भटकना पड़ता है। यदि एक्सरे के लिए डॉक्टर नहीं है, तो इसके लिए कम से कम अस्थायी व्यवस्था तो की जाए, ताकि मरीजों पर निजी अस्पतालों में होने वाले खर्च का बोझ न पडे़।
- कर्मजीत सिंह, नारायणगढ़
कम से कम वैकल्पिक व्यवस्था तो देनी चाहिए, ताकि मरीज परेशान न हों। यही कारण है कि एक्सरे सुविधा न होने के कारण मजबूरी में मरीजों को प्राइवेट में चार से आठ गुणा तक फीस देकर एक्सरे करवाने पड़ते हैं।
- राम सिंह, गांव बिचपड़ी
रेडियोग्राफर की अंबाला में तैनाती के लिए उच्च अधिकारियों को लेटर भेजा है। इसके साथ ही रिमांडर भी दिया गया है। कैंट सिटी में एक्सरे हो रहे हैं। नारायणगढ़ में रेडियोग्राफर के रिटायर होने के बाद से परेशानी है। कोशिश की जा रही है कि कोई व्यवस्था बनाई जाए, ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला