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गन्ना उत्पादक किसानों पर गलत दर्ज हुए मुकद्दमें : गुज्जर
Updated Sun, 10 Dec 2017 01:02 AM IST
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किसानों पर केस दर्ज होना गलत : गुज्जर
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़।
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव राम किशन गुज्जर ने स्थानीय किसानों पर दर्ज मुकदमे को गैर जरूरी और गलत करार देते हुए इसे किसानों के साथ ज्यादती करार दिया। गुज्जर शनिवार को गांव खानपुर राजपूताना में एक समारोह के बाद पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के लिए तभी अंगड़ाई लेता है जब उसके सामने गंभीर समस्या खड़ी हो। स्थानीय किसानों को शुगर मिल से पर्ची नहीं मिल रही जिसके चलते वह धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए। मिल प्रबंधन, प्रशासन व सरकार को किसान को प्रताड़ित करने की बजाए समस्या का निदान करना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि पूर्व में भी इनेलो-भाजपा सरकार ने 2002 में इसी तरह शुगर मिल से जुड़े किसानों पर मुकदमे व लाठीचार्ज कर तानाशाही का परिचय दिया था जिसका परिणाम तत्कालीन सरकार को भुगतना पड़ा था। आज मौजूदा भाजपा सरकार फिर उसी राह पर अग्रसर है और समस्या को खत्म करने की बजाए किसान की आवाज को दबाया जा रहा है। इस अवसर पर उनके साथ गुरविंद्र बेरखेड़ी, राम कुमार, पूर्व सरपंच मदन लाल शर्मा, कुलबीर डैहर, रतन सिंह, सुखदेव सैनी, जयपाल सिंह, करनैल सिंह, अशोक कुमार, मलखान सिंह हुसैनी, नेत राम आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़।
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव राम किशन गुज्जर ने स्थानीय किसानों पर दर्ज मुकदमे को गैर जरूरी और गलत करार देते हुए इसे किसानों के साथ ज्यादती करार दिया। गुज्जर शनिवार को गांव खानपुर राजपूताना में एक समारोह के बाद पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के लिए तभी अंगड़ाई लेता है जब उसके सामने गंभीर समस्या खड़ी हो। स्थानीय किसानों को शुगर मिल से पर्ची नहीं मिल रही जिसके चलते वह धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए। मिल प्रबंधन, प्रशासन व सरकार को किसान को प्रताड़ित करने की बजाए समस्या का निदान करना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि पूर्व में भी इनेलो-भाजपा सरकार ने 2002 में इसी तरह शुगर मिल से जुड़े किसानों पर मुकदमे व लाठीचार्ज कर तानाशाही का परिचय दिया था जिसका परिणाम तत्कालीन सरकार को भुगतना पड़ा था। आज मौजूदा भाजपा सरकार फिर उसी राह पर अग्रसर है और समस्या को खत्म करने की बजाए किसान की आवाज को दबाया जा रहा है। इस अवसर पर उनके साथ गुरविंद्र बेरखेड़ी, राम कुमार, पूर्व सरपंच मदन लाल शर्मा, कुलबीर डैहर, रतन सिंह, सुखदेव सैनी, जयपाल सिंह, करनैल सिंह, अशोक कुमार, मलखान सिंह हुसैनी, नेत राम आदि मौजूद थे।
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