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- मामला जगाधरी रोड पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा ध्वस्त किए गए अवैध निर्माण का

Wed, 29 Nov 2017 01:10 AM IST
Updated Wed, 29 Nov 2017 01:10 AM IST
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- मामला जगाधरी रोड पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा ध्वस्त किए गए अवैध निर्माण का
हाईवे अथॉरिटी आज प्रस्तुत करेगी स्टेटस रिपोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
जगाधरी रोड पर महेश नगर में अवैध निर्माण ध्वस्त करने के मामले की हाईवे अथॉरिटी द्वारा बुधवार को हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। 21 नवंबर को अथॉरिटी द्वारा कई दुकानों के आगे से अतिक्रमण हटाया गया था। 63 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे जिनमें से 13 पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर अथॉरिटी की कार्रवाई से कई दुकानदार संतुष्ट नहीं है और इस मामले की जानकारी वह बुधवार को सुनवाई के दौरान अपना वकील खड़ा कर हाईकोर्ट को दे सकते हैं। अब तक जिन 13 भवन मालिकों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है, उनका फैसला अब बुधवार को हाईकोर्ट में होगा।

हाईकोर्ट में विचाराधीन स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम केडी शर्मा चल रहे इस केस पर कोर्ट सुनवाई के दौरान क्या रुख अपनाता है। इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हाईवे अथॉरिटी द्वारा अब तक जो कार्रवाई महेश नगर क्षेत्र में की गई है उससे कई दुकानदार एवं भवन मालिक संतुष्ट नहीं है। महेश नगर स्थित भवन मालिक तिलक राज तनेजा एवं अन्य का कहना है कि हाईवे अथॉरिटी की कार्रवाई पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण रही है। यह अदालती आदेशों की पूरी तरह से अवहेलना हैं। ब्रह्मकुमारी चौक के पास अब भी कई दुकानों को ध्वस्त ही नहीं किया गया जबकि यह डिमार्केशन में चिन्हित हैं। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान भेदभाव पूर्ण नीति अपनाई है। कई फुट कब्जे हैं और महज इन्हें कुछ फुट ही ध्वस्त किया गया है। कोर्ट को अपने वकील के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाएगी।
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2012 की डिमार्केशन रिपोर्ट अनुसार कार्रवाई के दिए थे आदेश
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 27 जुलाई को इस मामले की सुनवाई के दौरान 26 फरवरी 2012 की डिमार्केशन रिपोर्ट के अनुसार सभी अवैध निर्माण गिराकर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए थे। इससे पहले सिंगल बेंच के समक्ष पांच साल केस चला और इस दौरान सिंगल बेंच ने 2012 में डिमार्केशन पूरी कराई थी। इसके बाद बेंच ने प्रशासन के आदेशों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की तो सिंगल बेंच के आदेशों को चुनौती देते हुए डबल बैंच में याचिका दाखिल की गई थी। डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के आदेशों को बरकरार रखते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे।
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