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- अभिभावक बोले, मिड डे मील को लेकर खानापूर्ति की गई
Updated Fri, 09 Mar 2018 01:00 AM IST
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मिड डे मील वर्कर्स हड़ताल पर, बच्चों को बांटे बिस्कुट
अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा।
मिड डे मील वर्कर्स के हड़ताल पर जाने के चलते वीरवार को बराड़ा में स्टाफ को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। हालांकि सरकार ने इस हड़ताल के मद्देनजर स्कूलों को निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद यह व्यवस्था की गई। वीरवार को मिड डे मील वर्कर्स हड़ताल पर रहीं। दरअसल सरकार की ओर से मिड डे मिल वर्कर्स की हड़ताल को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किया था कि स्कूलों में हर हाल में मिड डे मिल बनना चाहिए। मिड डे मील वितरण में बच्चों को कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस कारण बच्चों को मिड डे मिल वितरण के लिए स्कूलों में मिड डे मिल में बिस्कुट के पैकेट बांट कर काम चलाया गया।
उधर, अभिभावक प्रीतम सिंह, दिनेश कुमार, संतोष व राजरानी आदि का कहना है कि सरकार द्वारा जो मिड डे मिल दिया जाता है, वह पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। मिड डे मिल में दिए जाने वाला खिचड़ी, दाल व हरी सब्जी इत्यादि से बच्चों का पेट भरता है। हड़ताल के कारण बच्चों को खाना नहीं मिला, जबकि बिस्कुट तो केवल बच्चों के लिए खानापूर्ति ही है। बिस्कुट पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर सकते। इस बारे में राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल तंदवाल के प्रिंसिपल रविंदर सिंह ने कहा कि मिड डे मिल वर्कर्स के हड़ताल पर जाने के कारण समस्या तो आई है। हमने मिड डे मील बनाने के लिए एक महिला को बुलाया था, जो बाद में मना कर गई। इस कारण बच्चों को बिस्कुट के पैकेट दिए गए, ताकि बच्चे भूखे न रहें।
इसी मामले में बीईओ बराड़ा वीना सिंघानिया ने कहा कि सरकार की ओर से पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि स्कूलों में मिड डे मिल हर हाल में मिलेगा। इसलिए बच्चों को मिड डे मिल संबंधित कोई परेशानी नहीं हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा।
मिड डे मील वर्कर्स के हड़ताल पर जाने के चलते वीरवार को बराड़ा में स्टाफ को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। हालांकि सरकार ने इस हड़ताल के मद्देनजर स्कूलों को निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद यह व्यवस्था की गई। वीरवार को मिड डे मील वर्कर्स हड़ताल पर रहीं। दरअसल सरकार की ओर से मिड डे मिल वर्कर्स की हड़ताल को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किया था कि स्कूलों में हर हाल में मिड डे मिल बनना चाहिए। मिड डे मील वितरण में बच्चों को कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस कारण बच्चों को मिड डे मिल वितरण के लिए स्कूलों में मिड डे मिल में बिस्कुट के पैकेट बांट कर काम चलाया गया।
उधर, अभिभावक प्रीतम सिंह, दिनेश कुमार, संतोष व राजरानी आदि का कहना है कि सरकार द्वारा जो मिड डे मिल दिया जाता है, वह पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। मिड डे मिल में दिए जाने वाला खिचड़ी, दाल व हरी सब्जी इत्यादि से बच्चों का पेट भरता है। हड़ताल के कारण बच्चों को खाना नहीं मिला, जबकि बिस्कुट तो केवल बच्चों के लिए खानापूर्ति ही है। बिस्कुट पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर सकते। इस बारे में राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल तंदवाल के प्रिंसिपल रविंदर सिंह ने कहा कि मिड डे मिल वर्कर्स के हड़ताल पर जाने के कारण समस्या तो आई है। हमने मिड डे मील बनाने के लिए एक महिला को बुलाया था, जो बाद में मना कर गई। इस कारण बच्चों को बिस्कुट के पैकेट दिए गए, ताकि बच्चे भूखे न रहें।
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इसी मामले में बीईओ बराड़ा वीना सिंघानिया ने कहा कि सरकार की ओर से पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि स्कूलों में मिड डे मिल हर हाल में मिलेगा। इसलिए बच्चों को मिड डे मिल संबंधित कोई परेशानी नहीं हुई है।
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