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Ambala News: बाला सुंदरी मेले में छाई 100 साल पुरानी खजला मिठाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 02:17 AM IST
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100-year-old Khajala sweets are popular at the Bala Sundari fair.
मुलाना मे सजी खजला मिठाई की दुकानें। संवाद - फोटो : संगठन
- मेले में 50 साल से दुकान लगा रहे संचालक, यूपी से आई पारंपरिक स्वाद की पहचान
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संवाद न्यूज एजेंसी

मुलाना। 100 साल पुराना इतिहास समेटे प्रसिद्ध मिठाई खजला नवरात्र मेले में लोग जमकर खरीद रहे है, हालांकि खजला यूपी की प्रसिद्ध मिठाई है लेकिन हरियाणा सहित अन्य राज्यों में भी इसे खूब पसंद किया जाता है। खजला की खासियत है कि यह एक महीने तक रखने पर भी खराब नहीं होती। खजला बनाने के लिए मैदा, चीनी, घी, रिफाइंड, दूध व खोया का इस्तेमाल किया जाता है।
यूपी के अलीगढ़ से आए वेदप्रकाश ने बताया कि उतर प्रदेश के खुर्जा के रहने वाले उनके दादा पन्ना लाल ने बाबा लेखराज उस्ताद से सबसे पहले मीठा खजला बनाना सीखा था। शुरुआती दिनों में पन्ना लाल ने इसे झोली में टांगकर भी बेचा। लोगों को पसंद आया तो इसे व्यवसाय बना लिया। इससे अब अच्छी आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि अब इस व्यवसाय को उनके पिता सुभाष चंद गुप्ता संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुलाना में आयोजित नवरात्र मेले में वो पिछले 50 सालों से खजला मिठाई की दुकान लगा रहे हैं।
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खोये वाला खजला बिकता है खूब
वेदप्रकाश ने बताया कि यह व्यंजन हर प्रकार के स्वाद मीठा, फीका ,खोया व नमकीन में उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि फीका व नमकीन खजला तलने के बाद लगभग 150 ग्राम का होता हैं, वहीं खोया वाला खजला तलने के बाद लगभग 500 ग्राम का हो जाता हैं । उन्होंने बताया कि खोया वाला खजला महंगा होने के बावजूद सबसे अधिक बिक रहा है।
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खुर्जा गांव से मिला खजला नाम
वेदप्रकाश ने बताया कि यह खजला केवल यूपी के प्रशिक्षित हलवाई ही बनाते हैं। मेले में भी यूपी से हलवाइयों ने खजले की दुकानें लगाई हुई हैं जोकि करीब 20-25 साल से केवल खजला बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस व्यंजन को खजला नाम खुर्जा गांव से ही मिला हैं। देखने में यह भटूरे जैसा लगता हैं, परंतु खाने में कहीं ज्यादा स्वादिष्ट है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में वो इसे लाडवा, शाहबाद, पेहोवा व मुलाना के मेले में ही बेचने जाते हैं। इसके अलावा उतर प्रदेश, उत्तराखंड व राजस्थान में भी खजला की खू बिक्री होती है।
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