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तैयार हुआ 100 फीट दशानन का पुतला, रिमोट से होगा दहन
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100 feet effigy of Dashanan ready, combustion will be done remotely
- फोटो : Ambala
(अंबाला) बराड़ा। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद श्री रामलीला क्लब द्वारा दशानन के पुतले का निर्माण किया जा रहा है। इसका दहन 15 अक्तूबर को दशहरा पर्व पर दशहरा मैदान में किया जाएगा। इस बार समय व जगह की कमी के कारण दशानन के पुतले की ऊंचाई 100 फुट होगी। इसे बड़े ही आकर्षक ढंग से बनाया गया है। कस्बा व दूर दराज के लोग इसे देखने के लिए खुश नजर आ रहे हैं। पुतले का निर्माण कार्य करीब पूरा हो चुका है। समय की कमी के कारण ही दशहरा महोत्सव भी एक दिन का ही आयोजित किया जाएगा जो पहले करीब पांच दिन तक होता था।
श्री रामलीला क्लब के संस्थापक तेजिंदर चौहान ने बताया कि विश्व के सबसे ऊंचे दशानन के पुतले दहन के कारण ही कस्बे का नाम विश्व विख्यात हुआ, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के कारण करीब तीन साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला व दो साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। इसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में कई बार प्रशासन से भी गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं और जगह की व्यवस्था हो सकी। इस कारण ही 2017 के बाद कस्बा में दशानन के पुतले का दहन नहीं हो सका। 2018 में पंचकूला में व 2019 में चंडीगढ़ में दशानन के पुतले का दहन हुआ। 2020 में कोरोना महामारी के चलते दशानन के पुतले का दहन नहीं हो सका था। उन्होंने बताया कि इस बार भी अनुमति उनके व क्लब के सदस्यों के काफी प्रयास के बाद 13 अक्तूबर को मिली। इस कारण समय कम मिला। इसी कारण से दशहरा महोत्सव भी केवल एक दिन का ही मनाया जाएगा।
रिमोट कंट्रोल से होगा दहन
तेजिंदर चौहान बताते हैं कि प्रशासन की ओर से देरी से पुतले के दहन की अनुमति मिलने के कारण ही इस बार दशानन के पुतले की ऊंचाई केवल 100 फुट ही करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि पहले 210 फुट का पुतला बनाने पर करीब 250 फुट का एरिया इसके आसपास लिया जाता था। इसे बनाने में 6 महीने का समय लगता था। इस बार अनुमति समय पर न मिलने के कारण ही पुतले की ऊंचाई कम रखी गई है। उन्होंने बताया कि 100 फुट के पुतले को 20 कारीगरों ने एक महीने में बनाया है। इसके लिए 120 फुट का एरिया इसके चारों तरफ से लिया गया है। सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं। चौहान ने बताया कि पुतला बनाने पर करीब 10 लाख रुपये खर्चा आएगा। इसमें दशहरा महोत्सव पर की जाने वाली 1 लाख रुपये की आतिशबाजी भी शामिल है। उन्होंने बताया कि इसमें इको फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग किया गया है। पुतले का दहन रिमोट कंट्रोल से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर अनुमति मिल जाती तो पुतले की ऊंचाई भी अधिक हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन से यह मांग की है कि दशानन के पुतले की परंपरा को जीवंत रखने के लिए अनुमति की जो प्रक्रिया है उसे सरल किया जाए ताकि यह परंपरा हर वर्ष दशहरा के पर्व पर बनी रहे।
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दशानन के पुतले की संरचना
मुकुट से छतर तक की ऊंचाई 30 फुट, पुतले का चेहरा कंधे से माथे तक 15 फुट, पुतले का धड़ 40 फुट, जूती से घुटने तक 15 फुट तैयार किया गया है। इसमें सामग्री के तौर पर लोहे के पाइप, बांस, कपड़ा, रस्सी, चेहरा बनाने में फाइबर ग्लास का प्रयोग किया गया है। पुतले का वजन करीब 15 क्विंटल तक होगा।
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श्री रामलीला क्लब के संस्थापक तेजिंदर चौहान ने बताया कि विश्व के सबसे ऊंचे दशानन के पुतले दहन के कारण ही कस्बे का नाम विश्व विख्यात हुआ, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के कारण करीब तीन साल पहले रावण के पुतले का दहन पंचकूला व दो साल पहले चंडीगढ़ में करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में अब आबादी बसने लगी है। इसके चलते जगह की कमी होने लगी है। इस बारे में कई बार प्रशासन से भी गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते न तो दशहरा मैदान में व्यवस्था बन पाई और न ही कहीं और जगह की व्यवस्था हो सकी। इस कारण ही 2017 के बाद कस्बा में दशानन के पुतले का दहन नहीं हो सका। 2018 में पंचकूला में व 2019 में चंडीगढ़ में दशानन के पुतले का दहन हुआ। 2020 में कोरोना महामारी के चलते दशानन के पुतले का दहन नहीं हो सका था। उन्होंने बताया कि इस बार भी अनुमति उनके व क्लब के सदस्यों के काफी प्रयास के बाद 13 अक्तूबर को मिली। इस कारण समय कम मिला। इसी कारण से दशहरा महोत्सव भी केवल एक दिन का ही मनाया जाएगा।
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रिमोट कंट्रोल से होगा दहन
तेजिंदर चौहान बताते हैं कि प्रशासन की ओर से देरी से पुतले के दहन की अनुमति मिलने के कारण ही इस बार दशानन के पुतले की ऊंचाई केवल 100 फुट ही करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि पहले 210 फुट का पुतला बनाने पर करीब 250 फुट का एरिया इसके आसपास लिया जाता था। इसे बनाने में 6 महीने का समय लगता था। इस बार अनुमति समय पर न मिलने के कारण ही पुतले की ऊंचाई कम रखी गई है। उन्होंने बताया कि 100 फुट के पुतले को 20 कारीगरों ने एक महीने में बनाया है। इसके लिए 120 फुट का एरिया इसके चारों तरफ से लिया गया है। सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं। चौहान ने बताया कि पुतला बनाने पर करीब 10 लाख रुपये खर्चा आएगा। इसमें दशहरा महोत्सव पर की जाने वाली 1 लाख रुपये की आतिशबाजी भी शामिल है। उन्होंने बताया कि इसमें इको फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग किया गया है। पुतले का दहन रिमोट कंट्रोल से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर अनुमति मिल जाती तो पुतले की ऊंचाई भी अधिक हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन से यह मांग की है कि दशानन के पुतले की परंपरा को जीवंत रखने के लिए अनुमति की जो प्रक्रिया है उसे सरल किया जाए ताकि यह परंपरा हर वर्ष दशहरा के पर्व पर बनी रहे।
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दशानन के पुतले की संरचना
मुकुट से छतर तक की ऊंचाई 30 फुट, पुतले का चेहरा कंधे से माथे तक 15 फुट, पुतले का धड़ 40 फुट, जूती से घुटने तक 15 फुट तैयार किया गया है। इसमें सामग्री के तौर पर लोहे के पाइप, बांस, कपड़ा, रस्सी, चेहरा बनाने में फाइबर ग्लास का प्रयोग किया गया है। पुतले का वजन करीब 15 क्विंटल तक होगा।

100 feet effigy of Dashanan ready, combustion will be done remotely- फोटो : Ambala