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UP: शादी के बाद 26 साल के पति का पता चला ऐसा सच, साथ छोड़ मायके चली गई पत्नी, जानिए क्या है पूरा मामला

Fri, 29 May 2026 12:30 PM IST
Akash Dubey निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर
निखिल तिवारी, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: Akash Dubey Updated Fri, 29 May 2026 12:30 PM IST
सार

एम्स में युवक में क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का दुर्लभ मामला मिला। एक्सएक्सवाई क्रोमोसोम से टेस्टोस्टेरोन की कमी के कारण महिलाओं जैसे लक्षण दिखे, जिससे दांपत्य जीवन प्रभावित हुआ।

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Young man started developing like woman his wife left for her parents home
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Generated

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक दुर्लभ बीमारी का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय युवक में किशोरावस्था से ही सामान्य पुरुषों की तुलना में अलग शारीरिक बदलाव दिखाई दे रहे थे। समय पर जांच न होने से बीमारी का पता नहीं चल सका। शादी के बाद दांपत्य जीवन में परेशानियां बढ़ीं, जिससे पत्नी नाराज होकर मायके चली गई।

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एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देव आदित्य दास ने बताया कि शुरुआती जांच में युवक के शरीर में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की कमी के संकेत मिले। इसके बाद कराई गई जेनेटिक जांच में सामान्य पुरुषों में पाए जाने वाले एक्सवाई क्रोमोसोम की जगह एक्सएक्सवाई (डबल एक्स वाई) क्रोमोसोम मिले।

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इसी कारण युवक में पुरुषों की तुलना में महिलाओं जैसे कुछ शारीरिक लक्षण विकसित होने लगे थे। उसके स्तनों का आकार बढ़ रहा था, दाढ़ी-मूंछ कम थीं और जननांग भी सामान्य से छोटे पाए गए।

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आनुवांशिक विकार की पुष्टि
डॉक्टर देव के अनुसार, यह बीमारी क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहलाती है। यह एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है, जिसमें पुरुषों में एक अतिरिक्त एक्स क्रोमोसोम मौजूद होता है। सामान्यतः पुरुषों में एक्सवाई और महिलाओं में एक्सएक्स क्रोमोसोम पाए जाते हैं लेकिन इस सिंड्रोम से प्रभावित पुरुषों का क्रोमोसोम पैटर्न एक्सएक्सवाई हो जाता है। इसके कारण शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता, जिससे शारीरिक विकास, प्रजनन क्षमता और अन्य शारीरिक विशेषताओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

सिंड्रोम के दुष्प्रभाव, कुछ मामलों में इलाज संभव
डॉ. देव का कहना है कि इस बीमारी के बाद मरीजों में बांझपन, शरीर पर कम बाल, स्तनों का बढ़ना, कमजोरी और आत्मविश्वास में कमी जैसीं समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कई मामलों में मरीज लंबे समय तक बीमारी को समझ ही नहीं पाते और मानसिक तनाव का सामना करते रहते हैं। युवक को टेस्टोस्टेरोन हार्मोन थेरेपी दी जा रही है ताकि उसके शरीर में पुरुषों वाले लक्षण बेहतर तरीके से विकसित हो सकें। हालांकि, ऐसे मरीजों में प्राकृतिक रूप से पिता बनने की संभावना काफी कम हो सकती है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कुछ मामलों में इलाज संभव होता है।

अलर्ट: ये लक्षण दिखें तो चिकित्सकीय परामर्श लें
डॉ. देव का कहना है कि लोगों को हमेशा जागरूक रहना चाहिए। यदि किसी किशोर या युवक में सामान्य पुरुषों जैसे शारीरिक बदलाव न दिखें, स्तनों का आकार बढ़ने लगे, आवाज पतली रहे या शादी के बाद संतान न हो रही हो, तो बिना झिझक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।

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