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गोरखपुर: तीन साल से लापता युवक की बरामदगी की आस में भटक रहा था परिवार, अब इस हाल में मिला
Fri, 22 Oct 2021 12:05 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:05 PM IST
सार
मंजीत 2018 में लापता हो गया था। कैंट थाने ने मंजीत के अपहरण केस में 2020 में फाइल रिपोर्ट लगा दी थी। परिजनों की गुहार पर एसएसपी ने फिर से जांच शुरू कराई तो 20 दिन में ही लापता मंजीत बरामद हो गया।
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गुजरात के पिज्जा हट में मिला मंजीत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के कैंट थाने में दर्ज अपहरण केस की फाइल तीन साल बाद एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के आदेश पर फिर खोली गई तो कथित अपहृत युवक मंजीत को पुलिस ने गुजरात के पिज्जा हट से बरामद कर लिया है। तीन साल से मंजीत के घरवाले उसकी बरामदगी की आस में दर-बदर अफसरों के पास गुहार लगा रहे थे, मगर पुलिस ने पूरे मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी थी। अफसर भी इस पर खास पहल नहीं कर रहे थे, पर 29 सितंबर को एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के आदेश पर कैंट पुलिस ने जांच शुरू की तो 20 दिन में ही सर्विलांस की मदद से मंजीत को खोज लिया गया। पुलिस ने इसकी जानकारी घरवालों को दी तो सबने राहत की सांस ली है।
जानकारी के मुताबिक, पिपराइच थाना क्षेत्र के हेमधापुर निवासी संदीप कुमार कन्नौजिया ने 29 सितंबर को एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी। संदीप ने बताया था कि उसका भाई मंजीत 2018 में लापता हो गया था। कैंट पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को हत्या की नीयत से अपहरण करने की धारा में केस दर्ज कर लिया था। जांच में उस समय पुलिस को कुछ खास हासिल नहीं हो पाया था। लिहाजा, पुलिस ने 20 अप्रैल 2020 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी थी। इसी बीच भाई ने एक बार फिर एसएसपी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। उसने बताया कि उसके खाते से लेनदेन भी हुआ है। पीड़ित की फरियाद पर एसएसपी ने कैंट पुलिस को जांच का आदेश दे दिया। जांच के दौरान पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लग गए। कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की टीम ने गुजरात के राजकोट के बिग बाजार के पास स्थित पिज्जा हट से मंजीत को बरामद कर लिया है। उसकी फोटो घरवालों को भेजकर पुलिस ने पुष्टि भी कर ली है कि यह वही मंजीत है।
टेलीग्राम और सर्विलांस की मदद से खोजा
पुलिस टेलीग्राम और सर्विलांस की मदद से मंजीत की तलाश में जुटी थी। मंजीत लगातार टेलीग्राम पर एक्टिव था और फिर सर्विलांस मददगार साबित हो गई। पुलिस ने टेलीग्राम पर सर्विलांस की मदद से मंजीत को खोजकर तीन साल बाद उसके घरवालों से मिलवा दिया है। इस दौरान मंजीत ने एक बार भी अपने घरवालों से संपर्क नहीं किया था।
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जानकारी के मुताबिक, पिपराइच थाना क्षेत्र के हेमधापुर निवासी संदीप कुमार कन्नौजिया ने 29 सितंबर को एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी। संदीप ने बताया था कि उसका भाई मंजीत 2018 में लापता हो गया था। कैंट पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को हत्या की नीयत से अपहरण करने की धारा में केस दर्ज कर लिया था। जांच में उस समय पुलिस को कुछ खास हासिल नहीं हो पाया था। लिहाजा, पुलिस ने 20 अप्रैल 2020 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी थी। इसी बीच भाई ने एक बार फिर एसएसपी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। उसने बताया कि उसके खाते से लेनदेन भी हुआ है। पीड़ित की फरियाद पर एसएसपी ने कैंट पुलिस को जांच का आदेश दे दिया। जांच के दौरान पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लग गए। कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की टीम ने गुजरात के राजकोट के बिग बाजार के पास स्थित पिज्जा हट से मंजीत को बरामद कर लिया है। उसकी फोटो घरवालों को भेजकर पुलिस ने पुष्टि भी कर ली है कि यह वही मंजीत है।
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टेलीग्राम और सर्विलांस की मदद से खोजा
पुलिस टेलीग्राम और सर्विलांस की मदद से मंजीत की तलाश में जुटी थी। मंजीत लगातार टेलीग्राम पर एक्टिव था और फिर सर्विलांस मददगार साबित हो गई। पुलिस ने टेलीग्राम पर सर्विलांस की मदद से मंजीत को खोजकर तीन साल बाद उसके घरवालों से मिलवा दिया है। इस दौरान मंजीत ने एक बार भी अपने घरवालों से संपर्क नहीं किया था।
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बीटेक का पेपर खराब होने पर भाग गया था मंजीत
पुलिस की पूछताछ में मंजीत ने बताया कि उसका बीटेक का पेपर खराब हो गया था। इस वजह से डर गया था कि घरवाले नाराज हो जाएंगे। इस कारण वह कानपुर गया और फिर वहां से गुजरात चला गया था। वहां जाकर वह आठ हजार रुपये महीने पर नौकरी करने लगा था।
तो क्या लापरवाह जांच अधिकारी पर भी होगी कार्रवाई?
हत्या की नीयत से अपहरण के मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर 16 महीने तक जांच की थी पर जांच अधिकारी को कुछ हासिल नहीं हो सका और अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने पहल की तो महज बीस दिन में ही इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की टीम ने कथित अपहृत युवक मंजीत को बरामद कर लिया। अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में केस दर्ज करने के बाद जांच की गई थी? अगर वर्तमान इंस्पेक्टर बीस दिन में मंजीत को गुजरात से खोज सकते थे तो पहले के जांच अधिकारी ने ऐसा क्यों नहीं किया? गैर जिम्मेदराना रवैये की वजह से एक परिवार को तीन साल तक अपने बच्चे के बारे में यह तक जानकारी नहीं मिल पाई थी कि उनका बेटा जिंदा भी है या नहीं? सवाल यह भी है कि क्या लापरवाह जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी? अभी हाल में ही बेलीपार इलाके में इसी तरह का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के दखल देने के बाद दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में ही किशोरी को बरामद कर लिया था। बेलीपार पुलिस की लापरवाही मानते हुए दरोगा पर भी कार्रवाई की गई थी। फिर इस मामले में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है? हालांकि पुलिस का दावा है कि जांच जारी थी जिस क्रम में आधार कार्ड से लिए गए सिम कार्ड को सर्विलांस पर लगाया गया और फिर पुलिस मंजीत तक पहुंच सकी है।
2018 में दर्ज हुआ था केस
मामले में पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को केस दर्ज किया था। जांच के नाम पर पर्चे काटकर 20 अप्रैल 2020 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि तीन साल पहले दर्ज केस में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। पीड़ित भाई के प्रार्थना पत्र पर कैंट पुलिस को जांच का आदेश दिया गया था। पुलिस ने गुजरात से युवक को खोज निकाला है। परिजन तीन साल से परेशान थे।
तो क्या लापरवाह जांच अधिकारी पर भी होगी कार्रवाई?
हत्या की नीयत से अपहरण के मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर 16 महीने तक जांच की थी पर जांच अधिकारी को कुछ हासिल नहीं हो सका और अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने पहल की तो महज बीस दिन में ही इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की टीम ने कथित अपहृत युवक मंजीत को बरामद कर लिया। अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में केस दर्ज करने के बाद जांच की गई थी? अगर वर्तमान इंस्पेक्टर बीस दिन में मंजीत को गुजरात से खोज सकते थे तो पहले के जांच अधिकारी ने ऐसा क्यों नहीं किया? गैर जिम्मेदराना रवैये की वजह से एक परिवार को तीन साल तक अपने बच्चे के बारे में यह तक जानकारी नहीं मिल पाई थी कि उनका बेटा जिंदा भी है या नहीं? सवाल यह भी है कि क्या लापरवाह जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी? अभी हाल में ही बेलीपार इलाके में इसी तरह का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के दखल देने के बाद दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में ही किशोरी को बरामद कर लिया था। बेलीपार पुलिस की लापरवाही मानते हुए दरोगा पर भी कार्रवाई की गई थी। फिर इस मामले में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है? हालांकि पुलिस का दावा है कि जांच जारी थी जिस क्रम में आधार कार्ड से लिए गए सिम कार्ड को सर्विलांस पर लगाया गया और फिर पुलिस मंजीत तक पहुंच सकी है।
2018 में दर्ज हुआ था केस
मामले में पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को केस दर्ज किया था। जांच के नाम पर पर्चे काटकर 20 अप्रैल 2020 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि तीन साल पहले दर्ज केस में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। पीड़ित भाई के प्रार्थना पत्र पर कैंट पुलिस को जांच का आदेश दिया गया था। पुलिस ने गुजरात से युवक को खोज निकाला है। परिजन तीन साल से परेशान थे।