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किशोरी के पिता का दर्द: 'मेरी बिटिया 1 घंटे तक ताल में डूबती रही, कोई बचाने नहीं आया' पत्नी से लिपटकर रोते रहे
Sat, 13 Jun 2026 10:47 AM IST
Rohit Singh
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:47 AM IST
सार
पिता बताते हैं कि चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया। वीडियो में तालाब से निकाले गए शव की तस्वीर थी। बेटी का चेहरा देखते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह फफक पड़े। आंखों से आंसू बहने लगे और जुबान से सिर्फ एक ही शब्द निकला... ये मेरी बिटिया है...।
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विस्तार
रामगढ़ताल में कूदकर जान देने वाली किशोरी की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस चौकी से देर रात घर पहुंचे पिता का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा था। बेटी को याद करते हुए वह कभी पत्नी से लिपटकर रो पड़ते तो कभी बिलखते हुए कहते कि उन्होंने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उनकी बिटिया की जान ले ली गई।
पिता ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह और उनकी पत्नी रोज की तरह काम पर निकल गए थे। दोपहर में छोटी बेटी ने मां को फोन कर बताया कि दीदी सुबह करीब 10 बजे घर से निकली थी और अभी तक वापस नहीं लौटी है। वह नीचे फल बेचने वाले के बच्चे को खिलाने के लिए घर से निकली थी।
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पिता ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह और उनकी पत्नी रोज की तरह काम पर निकल गए थे। दोपहर में छोटी बेटी ने मां को फोन कर बताया कि दीदी सुबह करीब 10 बजे घर से निकली थी और अभी तक वापस नहीं लौटी है। वह नीचे फल बेचने वाले के बच्चे को खिलाने के लिए घर से निकली थी।
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यह सूचना मिलते ही माता-पिता परेशान हो गए और करीब दो बजे घर पहुंच गए। आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश करने के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पड़ोसी के साथ पैडलेगंज चौकी पहुंचे।
पिता बताते हैं कि चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया।
वीडियो में तालाब से निकाले गए शव की तस्वीर थी। बेटी का चेहरा देखते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह फफक पड़े। आंखों से आंसू बहने लगे और जुबान से सिर्फ एक ही शब्द निकला... ये मेरी बिटिया है...।
पिता बताते हैं कि चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया।
वीडियो में तालाब से निकाले गए शव की तस्वीर थी। बेटी का चेहरा देखते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह फफक पड़े। आंखों से आंसू बहने लगे और जुबान से सिर्फ एक ही शब्द निकला... ये मेरी बिटिया है...।
बेटी की मौत को लेकर पिता का दर्द आरोप में भी बदल गया। उन्होंने कहा, लोग बता रहे हैं कि उनकी बेटी काफी देर तक पानी में संघर्ष करती रही। अगर समय रहते कोई मदद कर देता तो शायद वह बच जाती। उनकी बेटी एक घंटे तक ताल में डूबती रही लेकिन कोई उसे बचाने नहीं आया।
उन्होंने बताया कि उनकी बेटी बेहद सीधी और घर-परिवार तक सीमित रहने वाली बच्ची थी। वह सिर्फ स्कूल जाती और फिर घर लौट आती थी। कभी-कभी खाने-पीने के लिए 10 या 20 रुपये मांग लेती थी। उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। अस्पताल परिसर में पत्नी को देखते ही पिता खुद को संभाल नहीं सके।
उन्होंने बताया कि उनकी बेटी बेहद सीधी और घर-परिवार तक सीमित रहने वाली बच्ची थी। वह सिर्फ स्कूल जाती और फिर घर लौट आती थी। कभी-कभी खाने-पीने के लिए 10 या 20 रुपये मांग लेती थी। उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। अस्पताल परिसर में पत्नी को देखते ही पिता खुद को संभाल नहीं सके।
दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे। उनकी चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। जिस बेटी को पढ़ा-लिखाकर बड़ा बनाने के सपने माता-पिता देख रहे थे, उसी की अर्थी उठने की कल्पना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।
छोटे भाई-बहनों की ‘दीदी’ अब कभी नहीं लौटेगी
रामगढ़ताल में छलांग लगाकर जान देने वाली 14 वर्षीय किशोरी की मौत ने एक गरीब परिवार की दुनिया उजाड़ दी है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी किशोरी घर की जिम्मेदारियों को समझने लगी थी और छोटे भाई-बहनों की देखभाल में मां का हाथ बंटाती थी। शनिवार को उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
छोटे भाई-बहनों की ‘दीदी’ अब कभी नहीं लौटेगी
रामगढ़ताल में छलांग लगाकर जान देने वाली 14 वर्षीय किशोरी की मौत ने एक गरीब परिवार की दुनिया उजाड़ दी है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी किशोरी घर की जिम्मेदारियों को समझने लगी थी और छोटे भाई-बहनों की देखभाल में मां का हाथ बंटाती थी। शनिवार को उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
किशोरी पास के ही एक निजी स्कूल में कक्षा सात की छात्रा थी। पिता एक रेस्टोरेंट में काम करते हैं, जबकि मां लोगों के घरों में चौका-बर्तन कर परिवार का खर्च चलाती हैं। सीमित आय के बावजूद दोनों अपने बच्चों को पढ़ाकर बेहतर भविष्य देने का सपना देख रहे थे।
संकरी गली में बने एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार रहता है। हालात ऐसे हैं कि उनके घर तक बाइक भी नहीं पहुंच सकती। इसी छोटे से आशियाने में माता-पिता अपने तीनों बच्चों के सपनों को संजो रहे थे।
संकरी गली में बने एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार रहता है। हालात ऐसे हैं कि उनके घर तक बाइक भी नहीं पहुंच सकती। इसी छोटे से आशियाने में माता-पिता अपने तीनों बच्चों के सपनों को संजो रहे थे।
किसी अनजान से करती थी फोन पर बात
रिश्ते में लगने वाले एक भाई ने बताया कि किशोरी के पास खुद का मोबाइल फोन नहीं था। वह अक्सर अपनी मां के मोबाइल से किसी से बातचीत करती थी। आशंका जताई जा रही है कि उसी व्यक्ति के बुलावे पर वह घर से बिना बताए निकली थी। चर्चा है कि मुलाकात के दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मां के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
पुलिस घटना की तह तक पहुंचने के लिए किशोरी की मां के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किशाेरी किससे बात करती थी और आखिर वह कौन-सी वजह थी जिसने उसे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
रिश्ते में लगने वाले एक भाई ने बताया कि किशोरी के पास खुद का मोबाइल फोन नहीं था। वह अक्सर अपनी मां के मोबाइल से किसी से बातचीत करती थी। आशंका जताई जा रही है कि उसी व्यक्ति के बुलावे पर वह घर से बिना बताए निकली थी। चर्चा है कि मुलाकात के दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मां के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
पुलिस घटना की तह तक पहुंचने के लिए किशोरी की मां के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किशाेरी किससे बात करती थी और आखिर वह कौन-सी वजह थी जिसने उसे इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।