गलत संगत में भटके रास्ता: इश्क तो कहीं दौलत के नशे में जीवन तबाह कर रहे ये रंगबाज, प्यार में बन गए कातिल
एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने कहा कि अपराध होने पर पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ती है। 3 मार्च 20 इसमें कई बार ऐसे लोग भी सामने भेजा। मां-ब आते हैं, जो पहली बार अपराध किए कर रहा था हैं या फिर अच्छे परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस अपनी कार्रवाई अपराध के हिसाब से करती है।
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ऐसे कई रंगबाज बीते दिनों पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। इनमें गलत ढंग से पैसा कमाने तो कोई अवैध संबंधों के चक्कर में फंसकर हत्यारा बना और कई शराब की लत में लुटेरे बन गए।
ऐसे युवा जब पकड़े जाते हैं, तब पछताने के सिवा उनके सामने कोई चारा नहीं बचता। कुछ मां-बाप तो लोकलाज के चक्कर में साथ तक छोड़ देते हैं। कई पकड़े जाने के बाद पुलिस के पास तरह-तरह से सिफारिश लेकर पहुंचते है।
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दरअसल, गलत रास्ते को चुनते समय युवाओं को इस बात का अहसास नहीं होता है कि पकड़े गए तो कॅरिअर तो बरबाद होगा ही, परिवार भी तबाह हो जाएगा। फंसने के बाद काम धंधे से ही नहीं, नौकरी से भी हाथ धो बैठते हैं। जानिए कुछ ऐसे ही युवाओं का बुरा हश्र...
केस 1
दोस्तों के बीच हनक के चक्कर में इंजीनियर लूट में गया जेल
शाहपुर आवास विकास कॉलोनी फ्तार निवासी कमल किशोर त्रिपाठी अपने बेटे मयंक की पढ़ा- लिखाकर इंजीनियर बनाना चाहते रास्ता थे। बेटे ने भी मन लगाकर पढ़ाई की और बीटेक की पढ़ाई पूरी कर, मुड़े ली। इसी बीच उसकी संगत गलत नामी लोगों से हो गई कि रंगबाजी का चस्का लग गया। दोस्तों के बीच अपनी हनक कायम रखने के लिए वह राह से भटक कर लूट की वारदातें करने लगा। 22 जून को पुलिस ने मयंक को पकड़कर जेल भेज दिया और पिता का सपना - चकनाचूर हो गया। यह एक उदाहरण है, जिससे यह समझा जा सकता है कि युवावस्था में एक गलत कदम कैसे जिंदगी को तबाह कर देती है।
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केस 2
सीएमओ के ड्राइवर से बन गया लुटेरा
21 जनवरी 2023: कैंट पुलिस ने चिलुआताल इलाके के पीयूष पांडे और उसके साथी राजवीर को रंगबाजी और लूट के आरोप में जेल भेजा। पता चला कि पकड़े गए अपराधियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह सिर्फ अपने शौक पूरा करने और तीन लाख कीमत की जावा रेसर बाइक की किस्त भरने के लिए लूटपाट करते थे। दोनों ही थाना चिलुआताल क्षेत्र के रहने वाले हैं। बाइक पीयूष पांडेय ने खरीदी थी, जो पहले सीएमओ गोरखपुर की गाड़ी चलाता था। पीयूष पढ़ाई में होनहार तो बहुत नहीं था, लेकिन मां बाप ने सामान्य जीवन जीने का तरीका सिखाया और वह सीएमओ की गाड़ी का चालक बन गया। इसी बीच महंगी बाइक का शौक हुआ और ऐसा भटका कि जेल पहुंच गया।
केस 3
रुपये का लालच ... डॉक्टर से बन गया हत्या अभियुक्त
3 मार्च 2023: गुलरिहा पुलिस ने आजमगढ़ के डॉ. सुनील सरोज को जेल भेजा। मां-बाप के अरमानों को पूरा करने के लिए सुनील एमबीबीएस की पढ़ कर रहा था। एमबीबीएस बनने के बाद एमडी करने लगा, लेकिन रुपयों के 'लालच में आ गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 30 हजार केस 3 रुपये महीने के लालच में उसने अपनी डिग्री का इस्तेमाल गुलरिहा इलाके में सत्यम नर्सिंग होम खोलने के लिए कर दिया। एक महिला की मौत के बाद उसके तीमारदार शिकायत लेकर थाने प और फिर पुलिस ने केस दर्ज किया तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया पलिस ने गैर इरादतन हत्या का आरोपी बनाकर डॉ सरोज को ही जेल भेज दिया। तब से जेल काट रहा है।
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एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने कहा कि अपराध होने पर पुलिस जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ती है। 3 मार्च 20 इसमें कई बार ऐसे लोग भी सामने भेजा। मां-ब आते हैं, जो पहली बार अपराध किए कर रहा था हैं या फिर अच्छे परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस अपनी कार्रवाई अपराध के हिसाब से करती है। अगर समाज के दृष्टिकोण से देखा जाए तो हाल के दिनों में इस तरह की घटनाएं चौंकाने वाली है।
बचपन का दुलार, ठीक, लेकिन काउंसिलिंग भी जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. आकृति ने कहा कि दिमाग से निकलने वाले हारमोंस से शरीर संचालित होता है। हर उम्र में एक ऐसा केमिकल काम करता है, जिसका असर हमारे व्यवहार पर पड़ता है। बचपन में हम बच्चों को दुलार ज्यादा करते हैं। उनकी हर डिमांड को पूरा करते हैं। लेकिन बड़े होने पर यही आदतें उन्हें गलत रास्ते पर ले जाती हैं। युवावस्था में डोपामाइन नाम का हार्मोन रिलीज होता है। इससे बच्चों के मन में जो आ गया है, उसे वह हासिल करना चाहते हैं। ऐसे में लोगों का ध्यान खुद की ओर आकर्षित करने की चाहत बढ़ जाती है। इस वजह से अगर अभिभावक ने ध्यान नहीं. दिया तो गलत रास्ते का भी चुनाव कर लेते हैं। यह समय ऐसा होता है, जब अभिभावक को बच्चों के साथ बैठकर बातचीत कर उनकी काउंसिलिंग करना चाहिए, ताकि वह गलत रास्ते पर ना जाए।
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बच्चों से संवाद कायम रखना जरूरी
गोरखपुर विश्वविद्यालय समाजशास्त्र असिस्टेंट प्रोफेसर दीपेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि समकालीन समाज में भौतिक उपलब्धियों को जीवन का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है। इस कारण अच्छी, संपन्न जीवन शैली युवाओं को आकर्षित कर रही है। माता- पिता में संघर्ष, भावनात्मक उपेक्षा, उपभोक्ता संस्कृति और संचार माध्यमों आदि के कारण युवाओं में समाज विरोधी व्यवहार दिखाई दे रहा है। युवाओं को अपराध की ओर उन्मुख होने से रोकने के लिए अभिभावक संवाद बनाए रखें। साथ ही बच्चों को सकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण प्रदान करें।