लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur ›   World Homeopathy Day Medicines from kidney to cancer available in homeopathy

विश्व होम्योपैथी दिवस : मीठी गोली से अब हर 'मर्ज' का इलाज, किडनी से लेकर कैंसर तक की दवाएं हैं उपलब्ध

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 10 Apr 2022 02:30 AM IST
सार

होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी शर्मा बताती हैं कि होम्योपैथिक दवाइयां सिमिलिया सिमिलीबस क्युरेंटूर के सिद्धांत पर कार्य करती हैं। इस सिद्धांत के अनुसार दवाइयों के अंदर जिन बीमारियों के लक्षण होते हैं, वह दवाइयां बीमार व्यक्ति को देने पर लक्षणवाले व्यक्ति को स्वस्थ कर देतीं हैं।

विश्व होम्योपैथी दिवस।
विश्व होम्योपैथी दिवस। - फोटो : iStock
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

गोरखपुर के अमित और शिवांगी के साथ-साथ इस विधा के विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी कहना है कि होम्योपैथी इलाज की कारगर विधि है, लेकिन इसमें नियमों का पालन सख्ती से करना होता है। अगर नियम से दवा खाई जाए तो होम्योपैथी की मीठी गोली में हर मर्ज की दवा है। साथ ही इसका इलाज भी बेहद सस्ता है। लेकिन, होम्योपैथी इलाज में लोगों को सब्र करने की जरूरत है। चर्म रोग की सबसे अधिक अच्छी होम्योपैथी में ही हैं। इन दवाओं का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है।  

पथरी से लेकर सर्वाइकल तक का इलाज

जिला अस्पताल के होम्योपैथी चिकित्सक डॉ डीपी सिंह ने बताया कि 10 अप्रैल को होम्योपैथी के जनक फेडरिक समुअल हैनीमेन का जन्म हुआ था, इसीलिए इस दिन को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। बताया कि किडनी स्टोन, पित्ताशय की सिंगल पथरी, गर्भाशय का ट्यूमर, स्तन की गांठ, शरीर पर होने बाले मस्से, चर्म रोग, एलर्जी, शुरुआती अवस्था में पता लगने वाला हार्निया, बुखार, जुकाम आदि के मामलों में होम्योपैथी से सफल इलाज हुए हैं।



किडनी की पांच से 14 एमएम की पथरी आसानी से निकाली जा सकती है। साईटिका, सर्वाइकल स्पांडेलाइटिस और बवासीर की बीमारियों में भी यह विधा फायदेमंद है। जिले में होम्योपैथी के करीब 36 सरकारी अस्पताल हैं, जहां एक रुपये के पर्चे पर निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

सिमिलिया सिमिलीबस क्युरेंटूर सिद्धांत पर करती है काम

होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी शर्मा बताती हैं कि होम्योपैथिक दवाइयां सिमिलिया सिमिलीबस क्युरेंटूर के सिद्धांत पर कार्य करती हैं। इस सिद्धांत के अनुसार दवाइयों के अंदर जिन बीमारियों के लक्षण होते हैं, वह दवाइयां बीमार व्यक्ति को देने पर लक्षणवाले व्यक्ति को स्वस्थ कर देतीं हैं। होम्योपैथी में व्यक्ति के लक्षणों को पूरी तरह से जानने के बाद संपूर्ण व्यक्ति का इलाज करते हैं। ऐसा करने से होम्योपैथिक दवाई शरीर के अंदर जाकर जीवनी शक्ति वाइटल फोर्स (जो स्वत ही शरीर की रक्षाअनेक बीमारियों या इंफेक्शन से करती है उसे बल देती है और मजबूत बनाती है ) देती है ।

केस- एक

पिपराईच कस्बे के अमित त्रिपाठी (35) वर्ष 2013 में प्रयागराज में रह कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, तो उनकी दोनों किडनी में स्टोन (पथरी) की समस्या आ गई। असहनीय दर्द हुआ तो होम्योपैथिक चिकित्सा की शरण ली। इलाज में समय तो लगा, लेकिन काफी कम पैसे में बिना सर्जरी के उनकी पथरी समाप्त हो गई।

केस- दो

खोराबार के रहने वाली शिवांगी को न्यूरो की समस्याद 2019 में आई। इसकी वजह से उन्हें चलने फिरने में दिक्कत होने लगी। दर्द से हालत खराब थी, इस बीच होम्योपैथी दवाओं का इस्तेमाल किया और दो साल के अंदर वह चलने फिरने लगी। इतना ही नहीं दर्द से उन्हें राहत भी मिल गई।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00