अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम के तहत विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) पर अलग-अलग रक्तदान शिविर लगाया गया है। इन शिविरों पर पहुंचकर शहरवासी बढ़चढ़ कर महादान कर रहे हैं।
World Blood Donor Day: अमर उजाला फाउंडेशन का रक्तदान शिविर, महादान के लिए लोगों में दिखा जबरदस्त उत्साह
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि रक्तदान का शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। भारत में हर दो सेकेंड में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है और हर साल पांच करोड़ यूनिट खून की आवश्यकता है।
होटल रेडिसन ब्लू में भी महादान
होटल रेडिसन ब्लू और अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से होटल रेडिसन ब्लू में भी रक्तदान शिविर लगेगा। जिला अस्पताल ब्लड बैंक की टीम रक्तदान कराएगी। आयोजन में एमएलसी सीपी चन्द और अरुण चन्द का खास सहयोग रहेगा। होटल के महाप्रबंधक अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि रक्तदान शिविर को लेकर टीम उत्साहित है। रक्तदान महादान है।
जिला अस्पताल में भी रक्तदान होगा
जिला अस्पताल और अमर उजाला फाउंडेेशन के सहयोग से जिला अस्पताल ब्लड बैंक में भी रक्तदान कराया। ब्लड बैंक प्रभारी डा. एसके यादव ने बताया कि रक्तदान के फायदे ही फायदे हैं। ब्लड बैंक से जरूरतमंदों को रक्त दिया जाता है। लिहाजा, रक्त का रहना जरूरी है।
हर दो सेकेंड में पड़ती है ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि रक्तदान का शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। भारत में हर दो सेकेंड में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है और हर साल पांच करोड़ यूनिट खून की आवश्यकता है।
18 से 60 वर्ष का स्वस्थ व्यक्ति कर सकता है रक्तदान
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसके यादव ने बताया कि नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) की सिफारिशों के अनुसार रक्तदाता को कोई संक्रामक रोग नहीं होना चाहिए। 18-60 आयु वर्ग का कोई स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 50 किलो तक या उससे अधिक है, रक्तदान कर सकता है। रक्तदाता का पल्स रेट 60-100 के बीच होना चाहिए और हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5 ग्राम या इससे अधिक होना चाहिए।
कम समय में शुरू हो जाता है लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि रक्तदान करने के 49 घंटे के भीतर शरीर में कम हुई लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण शुरू हो जाता है, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। रक्तदान करने से शरीर में आयरन का स्तर सही रहता है, इससे हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। इससे कैलोरी कम करने और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद मिलती है। वजन के अनुसार अधिकतम 350 से 450 मिली रक्त ही लिया जाता है।