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Gorakhpur News: मिलावट के खेल पर भारी पड़ी जागरूकता...होली पर समानांतर चढ़ा होम मेड बाजार
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महिला समूहों ने घर पर बनाईं मिठाइयां, पांच लाख की गुझिया और तीन लाख की कचौड़ी बिक गई
गोरखपुर। होली पर मिलावटखोरी की खबरों के बीच एक अच्छी चीज भी देखने को मिली। मिलावट के प्रति जागरूकता की वजह से होम मेड बाजार भी खूब चढ़ा। महिला समूहों ने घर पर मिठाइयां बनाईं और उसे ऑर्डर पर सप्लाई भी किया। इसका असर यह रहा कि पांच लाख की गुझिया और तीन लाख की कचौड़ी बिक गई।
शहर में इस बार होममेड कई तरह की गुझिया, कुकीज, मठरी और कचौड़ी की मांग ज्यादा रही है। बाहर से खरीदने पर लोगों को यह चिंता थी कि कहीं मिलावटी न हो। घर में कम से कम शुद्ध तो बनेगा। इस सोच ने जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार का अवसर भी उपलब्ध करवाया। इन्हीं में उड़ान की समता अग्रवाल और चटपट रसोई की अंजू गुप्ता भी हैं। उन्होंने घरों में ही लगभग पांच लाख की गुझिया और तीन लाख की कचौड़ी बनवाई और बाजार में सब बिक गया।
समता अग्रवाल कहती हैं, मिलावट के चलते लोगों ने होममेड बनी खाद्य सामग्री को पसंद किया है। होली के लिए इस बार भी खूब पकवान बनाए गए थे। इसमें गुझिया और कचौड़ी की खूब डिमांड रही। गुझिया और कचौड़ी की मांग दूसरे शहरों और राज्यों से भी रही।
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अंजू गुप्ता का कहना है कि लगभग 400 घरों की महिलाओं को जोड़कर होममेड गुजिया और कुकीज का कारोबार खड़ा किया। महिलाओं ने पारंपरिक ड्राई और चाशनी वाली गुझिया, विशेष फ्लेवर वाली गुझिया के अलावा अलग-अलग तरह की कचौड़ी तैयार की। बाजार में उतारने क लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जरिया बनाया। सोशल मीडिया पर देखकर बाजार के मिलावटी मिठाइयों के मुकाबले, घर में तैयार की गई शुद्ध और ताजी गुझिया की मांग भी खूब रही।
वह कहती हैं-उनके प्रयास से न सिर्फ लोगों को शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाई मिल रही है, बल्कि अन्य महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। इस बार उन्हें लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में ऑर्डर मिले हैं। खासतौर पर ड्राई फ्रूट गुजिया, शुगर फ्री गुजिया और बेक्ड कुकीज की मांग अधिक रही। इनके अलावा भी कई महिलाओं के ग्रुप ने भी घरों में पारंपरिक तरीके से मावा, सूजी और नारियल की स्टफिंग तैयार की। उनकी भी बाजार में मांग इस बार ज्यादा रही।
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गोरखपुर। होली पर मिलावटखोरी की खबरों के बीच एक अच्छी चीज भी देखने को मिली। मिलावट के प्रति जागरूकता की वजह से होम मेड बाजार भी खूब चढ़ा। महिला समूहों ने घर पर मिठाइयां बनाईं और उसे ऑर्डर पर सप्लाई भी किया। इसका असर यह रहा कि पांच लाख की गुझिया और तीन लाख की कचौड़ी बिक गई।
शहर में इस बार होममेड कई तरह की गुझिया, कुकीज, मठरी और कचौड़ी की मांग ज्यादा रही है। बाहर से खरीदने पर लोगों को यह चिंता थी कि कहीं मिलावटी न हो। घर में कम से कम शुद्ध तो बनेगा। इस सोच ने जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार का अवसर भी उपलब्ध करवाया। इन्हीं में उड़ान की समता अग्रवाल और चटपट रसोई की अंजू गुप्ता भी हैं। उन्होंने घरों में ही लगभग पांच लाख की गुझिया और तीन लाख की कचौड़ी बनवाई और बाजार में सब बिक गया।
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समता अग्रवाल कहती हैं, मिलावट के चलते लोगों ने होममेड बनी खाद्य सामग्री को पसंद किया है। होली के लिए इस बार भी खूब पकवान बनाए गए थे। इसमें गुझिया और कचौड़ी की खूब डिमांड रही। गुझिया और कचौड़ी की मांग दूसरे शहरों और राज्यों से भी रही।
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अंजू गुप्ता का कहना है कि लगभग 400 घरों की महिलाओं को जोड़कर होममेड गुजिया और कुकीज का कारोबार खड़ा किया। महिलाओं ने पारंपरिक ड्राई और चाशनी वाली गुझिया, विशेष फ्लेवर वाली गुझिया के अलावा अलग-अलग तरह की कचौड़ी तैयार की। बाजार में उतारने क लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जरिया बनाया। सोशल मीडिया पर देखकर बाजार के मिलावटी मिठाइयों के मुकाबले, घर में तैयार की गई शुद्ध और ताजी गुझिया की मांग भी खूब रही।
वह कहती हैं-उनके प्रयास से न सिर्फ लोगों को शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाई मिल रही है, बल्कि अन्य महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। इस बार उन्हें लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में ऑर्डर मिले हैं। खासतौर पर ड्राई फ्रूट गुजिया, शुगर फ्री गुजिया और बेक्ड कुकीज की मांग अधिक रही। इनके अलावा भी कई महिलाओं के ग्रुप ने भी घरों में पारंपरिक तरीके से मावा, सूजी और नारियल की स्टफिंग तैयार की। उनकी भी बाजार में मांग इस बार ज्यादा रही।