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एक पहलू यह भी: बेटे और पति को गंवा कर भी बना रही कच्ची शराब, बोली- हमारी भी मजबूरी है साहब

Fri, 29 Sep 2023 02:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 29 Sep 2023 02:23 PM IST
सार

प्रधान जीतकुमार निषाद ने कहा कि शराब इस समय बंद हो गई है। आगे बंद रहेगी या नहीं, इसके बारे में हम नहीं कह पाएंगे। शराब बनने से गांव की बड़ी बदनामी थी। इस काम में लगे लोगों को सरकारी सुविधा दिलाने के लिए राशन कार्ड व अन्य योजनाओं का फायदा दिलाया जा रहा है।

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woman Making raw liquor even after losing her son and husband
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले में कैंपियरगंज थाना क्षेत्र का मूसाबार गांव कच्ची शराब के धंधे को लेकर सुर्खियों में है। कच्ची शराब को गांव से पूरी तरह से हटाने के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाना भी बड़ा सवाल है। गांव में कई ऐसी महिलाएं हैं जो बेटे या पति को कच्ची शराब की वजह से गंवा चुकी हैं।

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इसके बावजूद कच्ची शराब के धंधे में लगी हैं। उनकी मानें तो उनके पास न तो राशन कार्ड और न ही किसी अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलता है। वह भी सुधरना चाहती हैं, लेकिन कोई तो सुविधा या ऐसा काम होना चाहिए, जिसे किया जा सके। वह प्रधान को कठघरे में खड़ा कर रही हैं।
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गांव में शराब बनाने वाली महिलाएं नाम न छापने के शर्त पर बताती हैं कि उन्होंने इस शराब की वजह से अपनों को खो दिया। कई घर ऐसे हैं, जहां पर कमाने वाले भी नहीं बचे हैं। इनका दर्द है कि लोग अपने बच्चों को रोकते हैं और हम अपनी बेटी, बच्चे के सामने ही शराब बेचते हैं।

उनकी मांग है कि उन्हें सरकारी सुविधाएं दिलाई जाएं, तभी यह धंधा बंद हो सकता है। जेल जाने से सबको डर लगता है, हमें भी। घर के पुरुष भागे हैं, जिस दिन से चौपाल लगी है, वे घर नहीं आए हैं।

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प्रधान जीतकुमार निषाद ने कहा कि शराब इस समय बंद हो गई है। आगे बंद रहेगी या नहीं, इसके बारे में हम नहीं कह पाएंगे। शराब बनने से गांव की बड़ी बदनामी थी। इस काम में लगे लोगों को सरकारी सुविधा दिलाने के लिए राशन कार्ड व अन्य योजनाओं का फायदा दिलाया जा रहा है। जो लोग बचे हैं उन्हें भी जल्द लाभ दिलाया जाएगा।
 
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