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साजिश के जाल में फंसकर बिखर गया परिवार, महिलाएं बोलीं- 'इ कानून केहूं के जिंदगी बर्बाद कर दी'

Sat, 24 Oct 2020 03:36 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 24 Oct 2020 03:36 PM IST
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without crime punished man in sexual assulted case in gorakhpur
गुड़िया देवी और शशिकला। - फोटो : अमर उजाला।
आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जो किसी की घिनौनी साजिश का शिकार हो गया। एक साजिश ने उसे दुष्कर्मी बना दिया। जमाने और पुलिस की कलम ने उस पर घिनौनी पहचान चस्पा कर दी। अमर उजाला की टीम उनका दर्द जानने पहुंची जिनका वजूद साजिश के जाल में फंसकर तिनके की तरह बिखर गया।     
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कोई उनका दुख जानने आया है, यह सुनते ही शहर के चिलुआताल के बरगदवां निवासी गुड़िया देवी और शशिकला की आंखें भर आईं। गुड़िया के पति सुनील दुष्कर्म के आरोप में जेल में हैं। कुछ बोलने की कोशिश में गुड़िया की जुबां लड़खड़ाने लगी। बमुश्किल बोलीं- साहब नौ महीने से सुनील जेल काटत बाड़े? उहो जौन अपराध के उ कइले ही नाई बाड़े? ऐसे साबित करे खातिर हम कौना के दरवाजे नाई गईली। एडीजी से लेकर लखनऊ तक दौड़ लगाई तब जाकर जांच के आदेश भईल और उ निर्दोष पाइल गइले। मगर अबो जेल में ही बांटे।
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सुनील के भाई अनिल को पुलिस ने मामला फर्जी होने की वजह से कुछ नहीं बोला। मगर अब वह घर नहीं रहते, किसी रिश्तेदार के घर हैं। उनकी पत्नी शशिकला बताती हैं कि थाने पर जाने पर यही कहा जाता था कि हर मुल्जिम के घरवाले खुद को निर्दोष ही बताते हैं। भगा देते थे। शशिकला की जुबान से दर्द तो गुड़िया की आंखों से दर्द बरस रहा था। इसी बीच एक छोटा बच्चा आया।
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बिना कुछ पूछे ही बच्चा बोला, मम्मी हम लोग को छोड़कर बाहर चली जाती थीं। वह सुनील का बेटा था। गुड़िया ने उसे अपनी ओर खींचकर चुप कराया। जैसे वह एक पल भी बर्बाद नहीं करना चाहती थी। आज पहली बार कोई उसका दर्द जानने आया था। अब तक तो वह किसी को कुछ बताना भी चाहती तो कोई सुनने को तैयार नहीं था। गुड़िया बोली-हम लोगों के पास जो भी पैसा, जेवर था सब बेचकर इंसाफ के लिए दौड़ने में खर्च कर चुके हैं। अब जाकर उम्मीद जगी है कि वह बच जाएंगे। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि बाबू आरोप भी ऐसन बा कि रिश्तेदार भी मदद के नाई आवत बांटे। केतनो कहल जात बा की गलती नाई बा तबो उनके लगत बा कि पुलिस उनहू के पकड़ ली। बहुत झेल लेहली। इ अइसन कानून बा कि केहूं के जिंदगी बर्बाद कर दी।

यह था मामला
करीब दो साल पहले जमीन के विवाद में दूसरे पक्ष ने एक महिला को दलित बनाकर पेट्रोल पंप पर काम करने वाले भाइयों अनिल और सुनील पांडेय पर दलित उत्पीड़न, दुष्कर्म की धारा में केस दर्ज कराया। आरोप था कि वह बर्तन मांजने के लिए बरगदवां आती थी और उस समय ही उसके साथ घटना की गई। दलित उत्पीड़न का मामला होने की वजह से सीओ कैंपियरगंज ने विवेचना की थी। एडीजी के आदेश पर दोबारा जांच हुई तो पता चला कि महिला दलित नहीं मुस्लिम है और वह संतकबीरनगर की रहने वाली है, जहां से रोज आकर बर्तन साफ कर पाना संभव नहीं है। उसकी उम्र भी 55 से ऊपर और एफआईआर में उसने खुद को 35 साल बताया था। दुष्कर्म का मामला गलत पाया गया।

कानून में व्यवस्था मौजूद पर जिम्मेदार कतराते हैं

महिला अपराध के मामलों में खासकर, कोई पुलिस वाला रिस्क नहीं लेता। केस दर्ज किया और भेज दिया जेल। जिसे समझना है कोर्ट से समझे? कुछ मामलों में आला अधिकारियों के हस्तक्षेप पर जांच होती है, तब कहीं राहत मिलती है। मामला गलत पाए जाने के बावजूद पुलिस झूठी एफआईआर दर्ज कराने के दोषी पर कार्रवाई नहीं करती। जबकि, झूठा केस करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन जिम्मेदार अपना काम करना नहीं चाहते हैं।

एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि दुष्कर्म, छेड़खानी या अन्य धाराओं में फर्जी केस दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई पुलिस को करनी होती है। फर्जी तरीके से फंसाने की कई शिकायतें भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों की बारीकी से जांच कराई जाएगी। यदि पुलिसकर्मी की संलिप्तता मिली तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। सभी एसएसपी या एसपी को इसका पालन सुनिश्चित कराना होगा।
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