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Gorakhpur News: बिजली ने दिया झटका तो याद आई बिल वसूली में लगे लाइनमैन की
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फोटो
मरम्मत करानी थी तो लाइनमैन वसूल रहे थे बकाया बिल, अंदरखाने जेई भी कोस रहे व्यवस्था में बदलाव को
लाइनमैनों ने समय रहते बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर मेंटेनेंस, तकनीकी उपकरणों के परीक्षण किए ही नहीं
रोहित सिंह
गोरखपुर। प्रचंड गर्मी मेंं जब-तब हो रहे फाल्ट के चलते शहरवासी परेशान हैं। इस समस्या का कारण बिजली निगम की लापरवाही है। मार्च-अप्रैल में जब बिजली के तारों की मरम्मत की जानी थी, जर्जर तारों को बदलना था, उस दौरान लाइनमैनों को बिजली बिल वसूलने में लगा दिया गया। पिछले 10 दिनों से हो रही बिजली की कटौती ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए तो निगम के जेई दबी जुबान खुद इसकी चर्चा कर रहे हैं।
पहले बिजली उपकेंद्रों में तैनात लाइनमैनों के कार्यो का लेखा जोखा प्रतिदिन एक रजिस्टर में दर्ज होता था। इसमें उपभोक्ताओं की शिकायतों पर लाइन मेंटेनेंस वर्क, ट्रांसफार्मर फाल्ट, ट्रिपिंग अटेंड करना, बिजली के खंभों की लाइनों के फाल्ट को देखना और फीडर के अनुसार स्वीकृत कनेक्शन के अनुपात में लोड को जांचना आदि शामिल था। जानकारों की मानें तो पहले यह काम बिजली निगम के सब स्टेशन ऑपरेटरों के जिम्मे था, लेकिन मार्च के बाद से इसे संविदाकर्मियों के भरोसे छोड़ दिया गया।
सूचना पर फाल्ट बनाने के साथ राजस्व वसूली का काम भी लाइनमैनों को दे दिया गया। इन्हें अब लाइन मरम्मत की जगह कनेक्शन काटने, रेवेन्यू, बिल क्रॉस चेकिंग, भुगतान, बकाया के साथ अन्य राजस्व संबंधी विवरण रजिस्टर में भरना होता है। लाइनमैन प्रतिदिन अपने क्षेत्र में राजस्व संबंधी कामों को लेकर घूमते हैं और बिजली उपकेंद्र के रजिस्टर में इसे दर्ज करवाते हैं।
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गर्मी के पहले कर लेते मरम्मत तो नहीं होती दिक्कत
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि इस बार राजस्व वसूली में अभियंताओं के साथ लाइनमैनों को भी लगाया गया था। इसी वजह से मार्च के पहले और बाद में लाइनों के सुधार या ट्रांसफार्मरों की मरम्मत काम नहीं करवाया जा सका। यही कारण रहा है कि गर्मी और लोड का भार केबल झेल नहीं पाए, ट्रांसफार्मर भी फुंकने लगे। बिजली चोरी की भी जांच नहीं हुई। इससे भी लोड बढ़ता गया और विभाग को पता नहीं चला।
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कोट
शासन प्रतिवर्ष बिजली सुधार और लोगों तक सही तरीके से बिजली आपूर्ति के लिए योजनाएं लागू कर रहा है। इस बार गर्मी में बिजली आपूर्ति खराब है, अभियंताओं को खुद सोचना चाहिए कि उन्होंने क्या काम किया है। योजनाओं को जमीन पर उतारने का जिम्मा अधिकारियों का होता है। उन्हें पता होना चाहिए कि किससे, कौन सा काम लेना है? लाइनमैन अगर मरम्मत कार्य की जगह सिर्फ राजस्व वसूली में लगे हैं, तो अभियंताओं की क्या जिम्मेदारी होगी? समय से कहां-कहां मरम्मत काम नहीं करवाए गए हैं, इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी। : सोमेंद्र सिंह तोमर, उर्जा राज्य मंत्री
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मरम्मत करानी थी तो लाइनमैन वसूल रहे थे बकाया बिल, अंदरखाने जेई भी कोस रहे व्यवस्था में बदलाव को
लाइनमैनों ने समय रहते बिजली लाइन, ट्रांसफार्मर मेंटेनेंस, तकनीकी उपकरणों के परीक्षण किए ही नहीं
रोहित सिंह
गोरखपुर। प्रचंड गर्मी मेंं जब-तब हो रहे फाल्ट के चलते शहरवासी परेशान हैं। इस समस्या का कारण बिजली निगम की लापरवाही है। मार्च-अप्रैल में जब बिजली के तारों की मरम्मत की जानी थी, जर्जर तारों को बदलना था, उस दौरान लाइनमैनों को बिजली बिल वसूलने में लगा दिया गया। पिछले 10 दिनों से हो रही बिजली की कटौती ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए तो निगम के जेई दबी जुबान खुद इसकी चर्चा कर रहे हैं।
पहले बिजली उपकेंद्रों में तैनात लाइनमैनों के कार्यो का लेखा जोखा प्रतिदिन एक रजिस्टर में दर्ज होता था। इसमें उपभोक्ताओं की शिकायतों पर लाइन मेंटेनेंस वर्क, ट्रांसफार्मर फाल्ट, ट्रिपिंग अटेंड करना, बिजली के खंभों की लाइनों के फाल्ट को देखना और फीडर के अनुसार स्वीकृत कनेक्शन के अनुपात में लोड को जांचना आदि शामिल था। जानकारों की मानें तो पहले यह काम बिजली निगम के सब स्टेशन ऑपरेटरों के जिम्मे था, लेकिन मार्च के बाद से इसे संविदाकर्मियों के भरोसे छोड़ दिया गया।
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सूचना पर फाल्ट बनाने के साथ राजस्व वसूली का काम भी लाइनमैनों को दे दिया गया। इन्हें अब लाइन मरम्मत की जगह कनेक्शन काटने, रेवेन्यू, बिल क्रॉस चेकिंग, भुगतान, बकाया के साथ अन्य राजस्व संबंधी विवरण रजिस्टर में भरना होता है। लाइनमैन प्रतिदिन अपने क्षेत्र में राजस्व संबंधी कामों को लेकर घूमते हैं और बिजली उपकेंद्र के रजिस्टर में इसे दर्ज करवाते हैं।
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गर्मी के पहले कर लेते मरम्मत तो नहीं होती दिक्कत
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि इस बार राजस्व वसूली में अभियंताओं के साथ लाइनमैनों को भी लगाया गया था। इसी वजह से मार्च के पहले और बाद में लाइनों के सुधार या ट्रांसफार्मरों की मरम्मत काम नहीं करवाया जा सका। यही कारण रहा है कि गर्मी और लोड का भार केबल झेल नहीं पाए, ट्रांसफार्मर भी फुंकने लगे। बिजली चोरी की भी जांच नहीं हुई। इससे भी लोड बढ़ता गया और विभाग को पता नहीं चला।
कोट
शासन प्रतिवर्ष बिजली सुधार और लोगों तक सही तरीके से बिजली आपूर्ति के लिए योजनाएं लागू कर रहा है। इस बार गर्मी में बिजली आपूर्ति खराब है, अभियंताओं को खुद सोचना चाहिए कि उन्होंने क्या काम किया है। योजनाओं को जमीन पर उतारने का जिम्मा अधिकारियों का होता है। उन्हें पता होना चाहिए कि किससे, कौन सा काम लेना है? लाइनमैन अगर मरम्मत कार्य की जगह सिर्फ राजस्व वसूली में लगे हैं, तो अभियंताओं की क्या जिम्मेदारी होगी? समय से कहां-कहां मरम्मत काम नहीं करवाए गए हैं, इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी। : सोमेंद्र सिंह तोमर, उर्जा राज्य मंत्री