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गोरखपुर: बॉयोरेमेडिएशन से सुधर रही राप्ती और रोहिन नदी के पानी की गुणवत्ता, खारेपन की मात्रा में हुई कम

Sat, 26 Feb 2022 01:12 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Feb 2022 01:12 PM IST
सार

नगर आयुक्त डॉ. अविनाश सिंह ने बताया कि नदियों के पानी में बीओडी की मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति मिलीमीटर से कम होनी चाहिए। बॉयोरेमेडियल पद्धति से उपचार के बाद राप्ती और रोहिन नदी के पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है।

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Water quality of Rapti and Rohin river improving due to bioremediation
राप्ती नदी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बॉयोरेमेडिएशन पद्धति से राप्ती और रोहिन नदी के पानी की गुणवत्ता सुधर रही है। इस पद्धति से नालों का पानी उपचार के बाद नदियों में गिर रहा है। इससे न सिर्फ ऑक्सीजन की मात्रा मानक से बेहतर हुई है बल्कि पानी में खारेपन की मात्रा में भी कमी आ गई है।

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गोरखपुर शहर के करीब दो तिहाई नालों का पानी राप्ती और रोहिन नदी में गिरता है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद नगर निगम ने राप्ती और रोहिन नदी के पानी के शोधन के लिए बॉयोरेमेडिएशन तकनीक सिस्टम लगाया है। इस तकनीक के इस्तेमाल के बाद पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हो रहा है।
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नालों के पानी के नदी में गिरने से पहले और बाद मापी गई पानी की गुणवत्ता में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी), टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) और पीएच मानक अनुरूप मिली है।
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सहायक नगर आयुक्त डॉ. अविनाश सिंह ने बताया कि नदियों के पानी में बीओडी की मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति मिलीमीटर से कम होनी चाहिए। बॉयोरेमेडियल पद्धति से उपचार के बाद राप्ती और रोहिन नदी के पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है।

 

नालों का नाम    बॉयोरेमेडियल सैंपल के पहले    बॉयोरेमेडियल सैंपल के बाद
                      बीओडी  सीओडी  टीएसएस  पीएच    बीओडी  सीओडी  टीएसएस  पीएच
डोमिनगढ़ नाला  107.0   248.0   267.60  8.37         18.00   57.60   69.00    7.87
इलाहीबाग नाला  95.10   244.0  372.4   7.89          19.20   80.0    61.40    7.71
कटनिया  नाला   94.10    256.0  140.0   7.74           22.70   92.00   50.80   7.66
बसियाडीह नाला  118.2   296.0   106.8   7.85          21.90  90.00     54.80   7.62
बरगदवां नाला     103.2   244.8   127.2   7.40          19.00  68.40     47.00   7.34

यह है बॉयोरेमेडिएशन

बॉयोरेमेडिएशन को सूक्ष्मजीवों और पौधों की मदद से पर्यावरण में अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को हटाने या बेअसर करने की पद्धति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में यह सूक्ष्मजीवों, पौधों या माइक्रोबियल या पौधों के एंजाइमों की मदद से पर्यावरण से प्रदूषण को दूर करने की प्रक्रिया है। यह प्राकृतिक प्रकिया है। इसके लिए मिट्टी जैसे दूषित पदार्थ के लिए स्वीकार्य उपचार प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। यह दूषित पदार्थों को पूरी तरह से हटाने के लिए उपयोगी है।

नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि राप्ती और रोहिन नदी में गिर रहे नालों के पानी की बॉयोरेमेडिएशन पद्धति से शोधन के बाद टेस्टिंग की रिपोर्ट बीओडी, सीओडी, टीएसएस और पीएच वैल्यू मानक के अंतर्गत है।

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