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UP Nikay Chunav 2023: किसी का मुर्गा खा गए तो पी गए किसी का पौव्वा, डकार लेने को तैयार नहीं मतदाता

Wed, 03 May 2023 01:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 03 May 2023 01:13 PM IST
सार

जानकारी के मुताबिक, चुनाव अपने अंतिम चरण में है। नतीजतन उम्मीदवार मतदाताओं को लुभावने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। इसी का फायदा मतदाता उठा रहे हैं। आलम यह है कि अब तो दारू पीने के बाद मतदाता एक उम्मीदवार के जाने पर दूसरे के समर्थक से सीधे बोल दे रहे हैं कि फला उम्मीदवार तो मीट और पांच सौ रुपये देकर गए हैं।

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Voters accepted whatever tactic they adopted to woo them in elections
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

दारू, मुर्गा, साड़ी हो या फिर नकदी, इसकी मदद से मतदाताओं को लुभावने की कोशिश तो कुछ उम्मीदवार ने की है, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने उनकी नींद उड़ा दी है। भोले-भाले दिखने वाले मतदाता ही सबसे शातिर निकले हैं। उनके दर पर जो भी उपहार लेकर पहुंचा है, किसी को भी नाराज नहीं किए। किसी का दिया मीट खा गए तो किसी से रोज पौव्वा ले रहे हैं। इन सब के बाद अगर कोई नकदी पकड़ा दे तो उससे भी गुरेज नहीं।

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मतदाता हर उम्मीदवार से मिलने वाले उपहार को पकड़ ले रहे हैं, लेकिन चुप्पी साधे हुए हैं। वोट किसे देंगे, यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि किसका मुर्गा कारगर रहा और किसका नोट।
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जानकारी के मुताबिक, चुनाव अपने अंतिम चरण में है। नतीजतन उम्मीदवार मतदाताओं को लुभावने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। इसी का फायदा मतदाता उठा रहे हैं। आलम यह है कि अब तो दारू पीने के बाद मतदाता एक उम्मीदवार के जाने पर दूसरे के समर्थक से सीधे बोल दे रहे हैं कि फला उम्मीदवार तो मीट और पांच सौ रुपये देकर गए हैं। आप भी जान लीजिए, मेरे घर में छह लोग है, वह तीन लोग का ही देकर गए हैं। उनको तो वोट नहीं देंगे।
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फिर क्या अगले उम्मीदवार को छह लोगों के हिसाब से तीन हजार रुपये, दारू और मीट तो देना ही होगा। इन सब के बाद इसके बाद कोई अन्य प्रत्याशी आया तो फिर से वहीं पुरानी बात कहकर अपना काम चला ले रहे हैं।

 

दृष्य एक

साहब, नेताजी चुनाव बाद थोड़े न आएंगे
उत्तरी क्षेत्र के नगर पंचायत के एक गांव में मंगलवार को गजब नजारा देखने को मिला। दोपहर करीब तीन बजे पसीना पोछते एक नेताजी मतदाताओं को एकत्र कर बता रहे थे कि आज तो आखिरी दिन है प्रचार का। हमने आप की सेवा की है, आप वोट देकर मदद कर दीजिएगा। इतने पर एक ग्रामीण बोल पड़ा, आप तो घर के तीन लोगों का ही देकर गए थे। दूसरे उम्मीदवार तो घर के सभी सदस्य के हिसाब से दिए हैं। इतना ही नहीं, आपका मुर्गा का मीट भी ठीक नहीं था। फिर क्या नेताजी पसीना-पसीना हो गए। मतदाताओं को सहेजने के लिए अपने एक समर्थक को लगा दिए और फिर से मीट, रुपया, शराब तो दिए ही, साड़ी भी दूसरे गांव से मंगवाकर थमा दिए। जाने के बाद ग्रामीण भी बोला, साहब चुनाव बाद यहां थोड़े आएंगे।

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दृष्य दो

नेताजी आपने साड़ी ठीक नहीं दी थी
सहजनवां इलाके के एक गांव में नेताजी ने वोटरों को लुभाने के लिए पुरुष वर्ग के लिए शराब की व्यवस्था की है तो महिलाओं के लिए साड़ी की। अब अंतिम दिन प्रचार करते नेताजी एक गांव में मंगलवार को पहुंचे तो महिलाओं ने कह दिया, नेताजी वोट तो मांग रहे हैं, लेकिन जो साड़ी दिए तो वह ठीक नहीं है। कहिए तो वापस कर दें। नेताजी ने समझाया, और पर्चा में लपेटकर रुपये थमाए और बोले आप मदद करें, चुनाव जीता तो महंगी साड़ी मिलेगी। यह जो रुपये दिया हूं, इससे खरीद लें। इसके बाद नेताजी हाथ जोड़ते निकल गए।

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दृष्य तीन

आप तो दो ही शीशी दे रहे, उसने तो तीन दिया
शहर के उत्तरी इलाके के एक मोहल्ले के निषाद टोले में दूसरे वर्ग के प्रत्याशी पहुंचे थे। मंगलवार को अपना चुनाव चिन्ह याद दिला रहे थे। दोपहर में एक बजे के करीब घर-घर में जा रहे थे। तभी कुछ लोग ताश का पत्ता पलटते मिल गए। उनसे भी बोले, कोई दिक्कत तो नहीं। इतने में एक युवक ने बोल दिया, आप तो एक दिन में दो ही शीशी दे रहे हैं, दूसरे दल के उम्मीदवार ने तो तीन शीशी दिया है। आपकी क्या मदद करनी है। अभी तो वह देकर गए हैं। फिर क्या, समर्थक पीछे से आया और बोला कि अमुक जगह पर आ जाइए, सब हो जाएगा। बस चुनाव चिन्ह...याद रखिएगा।

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