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स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2021: गोरखपुर की सफाई व्यवस्था पर अब 19 तक दें अपनी राय
Sat, 11 Dec 2021 10:35 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 11 Dec 2021 10:35 AM IST
सार
स्वच्छता पर फीडबैक देने में गोरखपुर प्रदेश में दूसरे पायदान पर है, पहले पर कानपुर है। गोरखपुर मंडल का महराजगंज जिला चौथे, देवरिया सातवें और कुशीनगर 35वें स्थान पर।
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गोरखपुर शहर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सरकार की ओर से कराए जा रहे स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2021 के तहत गोरखपुर जिले के ग्रामीण अब 19 दिसंबर तक अपनी राय दे सकते हैं। पहले एक दिसंबर आखिरी तारीख तय थी। वहीं, शुक्रवार तक की रैंकिंग में गोरखपुर पूरे प्रदेश में दूसरे पायदान पर है। पहले पायदान पर कानपुर देहात है, जबकि वाराणसी तीसरे नंबर पर है। गोरखपुर मंडल का महराजगंज जिला चौथे, देवरिया सातवें और कुशीनगर 35वें नंबर पर है। स्वच्छता रैकिंग जारी करते समय ये रायशुमारी भी आधार बनेगी।
सिटीजन फीडबैक मोबाइल एप के जरिए लिए जा रहे फीडबैक में गोरखपुर से अब तक 6 लाख 12 हजार 780 लोगों ने सफाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कानपुर देहात में सर्वाधिक 18 लाख 66 हजार 345 लोग प्रतिक्रिया दे चुके हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशु शेखर ठाकुर बताते हैं कि सर्वेक्षण के परिणामों में गोरखपुर श्रेष्ठ रैंकिंग प्राप्त करे, इसके लिए जरूरी है कि गांव में स्वच्छता सुविधाओं का निर्माण होने के साथ-साथ उनका उपयोग और सूचना भी वेबसाइट पर अपलोड हो। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर गांवों में लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे साफ-सफाई रखें। साथ ही मिल रही सुविधाओं का उपयोग भी करें। मिशन (ग्रामीण) के जिला परियोजना संयोजक बच्चा सिंह बताते हैं कि शौचालय निर्माण के साथ-साथ ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गांव में कंपोस्ट व सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है।
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सिटीजन फीडबैक मोबाइल एप के जरिए लिए जा रहे फीडबैक में गोरखपुर से अब तक 6 लाख 12 हजार 780 लोगों ने सफाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कानपुर देहात में सर्वाधिक 18 लाख 66 हजार 345 लोग प्रतिक्रिया दे चुके हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशु शेखर ठाकुर बताते हैं कि सर्वेक्षण के परिणामों में गोरखपुर श्रेष्ठ रैंकिंग प्राप्त करे, इसके लिए जरूरी है कि गांव में स्वच्छता सुविधाओं का निर्माण होने के साथ-साथ उनका उपयोग और सूचना भी वेबसाइट पर अपलोड हो। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर गांवों में लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे साफ-सफाई रखें। साथ ही मिल रही सुविधाओं का उपयोग भी करें। मिशन (ग्रामीण) के जिला परियोजना संयोजक बच्चा सिंह बताते हैं कि शौचालय निर्माण के साथ-साथ ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए गांव में कंपोस्ट व सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है।
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फीडबैक में पूछे जा रहे ये सवाल
ऑनलाइन सर्वेक्षण में एप और वेब पर पांच सवाल पूछे जा रहे हैं। पहला, क्या आप जानते हैं कि घर-घर में शौचालय की सुविधा है? दूसरा, क्या गांव में ठोस कूड़े को एकत्र करने और निपटान की व्यवस्था है? तीसरा, क्या गांव में घर से निकलने वाले गंदे पानी और गीले कूड़े के निपटान की व्यवस्था है? चौथा सवाल, क्या 2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से अब तक आपके गांव में स्वच्छता में कोई सुधार आया है? पांचवां, क्या आप गांव में हो रही ठोस कूड़े और गंदे पानी, गीले कूड़े, दूषित जल के निपटान की व्यवस्था से संतुष्ट हैं?
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